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मराठा आंदोलन ने धीमी की मुंबई की रफ्तार, बीच रास्ते नहाकर प्रदर्शनकारियों ने जताया विरोध

Maratha Protest: महाराष्ट्र में मराठा कोटा की मांग लिए Manoj Jarange मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर हैं. पुलिस ने उन्हें 30 अगस्त को भी आंदोलन करने की इजाजत दी है.

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मराठा रिजर्वेशन के लिए मनोज जरांगे भूख हड़ताल पर हैं. (PTI)
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ऋत्विक भालेकर
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30 अगस्त 2025 (Updated: 30 अगस्त 2025, 10:14 PM IST)
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मराठा अधिकारों के कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की अगुवाई वाले मराठा आंदोलन में भारी भीड़ जुट रही है. बड़े पैमाने पर लोगों के आने से मुंबई की रफ्तार धीमी पड़ती दिखी. माराठा प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह रोड ब्लॉक कर दी. कई जगह लोग बीच रास्ते में टब रखकर नहाते दिखे. मुंबई पुलिस ने जरांगे पाटिल को 31 अगस्त को भी आंदोलन जारी रखने की इजाजत दे दी है.

जरांगे पाटिल ने शुक्रवार, 29 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की थी. इसके बाद उन्होंने 30 अगस्त को भी आंदोलन करने की इजाजत मांगी थी, जिसे मुंबई पुलिस ने स्वीकार कर लिया. अब उन्होंने 31 अगस्त को भी इजाजत की मांग की, जिसे मुंबई पुलिस ने मंजूर कर लिया है.

मराठा रिजर्वेशन की मांग कर रहे जरांगे पाटिल मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल के जरिए प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि सभी मराठाओं को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का फायदा देने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कैटेगरी में शामिल किया जाए.

इंडिया टुडे से जुडे़ ओंकार वाबले की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे महाराष्ट्र से आए मराठा प्रदर्शनकारियों ने बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के सामने विरोध जताया. उन्होंने रोड भी बंद कर दी. पुलिस को ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए कहा गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है.

पुलिस अधिकारियों के कहने के बावजूद, आजाद मैदान के बाहर प्रदर्शनकारियों ने रास्ते बंद कर दिए, जिससे इलाके में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा. मुंबई में प्रदर्शनकारी नहाते और सड़कें जाम करते दिखे. वे आरक्षण मिलने तक मुंबई छोड़ने से इनकार कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारी शहर की तरफ बढ़े तो नवी मुंबई पर भी इसका असर पड़ा. यहां गाड़ियों की रफ्तार थम गई और ट्रैफिक धीरे-धीरे बढ़ रहा था. ट्रैफिक कंट्रोल करने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.

इससे पहले 30 अगस्त आंदोलन की इजाजत मिलने पर शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने कहा,

“मुंबई में महाराष्ट्र की राजधानी में मराठा समाज के नेता जरांगे पाटिल जी का, एक दिन उनका बढ़ाया है. यह मेहरबानी नहीं है. मुंबई में अगर हमकों आंदोलन करना है, मराठी लोगों को, तो सबसे पहले उसमें न्यायालय का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए. सरकार और हम देखेंगे.”

आजतक से जुड़े ऋत्विक भालेकर की रिपोर्ट के मुताबिक, जरांगे पाटिल का साफ कहना है कि वे मुंबई से नहीं हटेंगे, चाहे उन्हें गोलियां क्यों ना झेलनी पड़ें. उनका कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की महायुति सरकार मराठा आरक्षण की मांग पूरी नहीं करती, आंदोलन चलता रहेगा.

इस बीच विपक्ष के नेता और शिवसेना (उद्धव गुट) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले जो वादे और कसम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम खाई गई थीं, उन्हें पूरा क्यों नहीं किया गया. उन्होंने कहा,

"मुंबई मराठी जनता की राजधानी है. सरकार को छल-कपट नहीं, संवाद करना चाहिए."

वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार मराठा समाज को संवैधानिक दायरे में वैध आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि पहले से ही 10 फीसदी आरक्षण लागू है. उन्होंने उद्धव से पूछा कि उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में मराठा समाज के लिए कौन सा ठोस कदम उठाया.

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