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पहलगाम हमले के बाद अटारी बॉर्डर बंद, लेकिन करतारपुर कॉरिडोर अब भी खुला

बुधवार, 23 अप्रैल को विदेश मंत्रालय ने पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच डिप्लोमैटिक रिलेशन पर कई प्रतिबंधों का एलान किया. इनमें सिंधु जल समझौता पर रोक लगाना, अमृतसर का अटारी चेक पोस्ट बंद करना और SAARC वीजा छूट स्कीम के तहत भारत आने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजना शामिल है.

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24 अप्रैल 2025 (पब्लिश्ड: 09:08 PM IST)
Kartarpur Corridor
करतारपुर कॉरिडोर से तीर्थयात्री पाकिस्तान के गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब जाते हैं. (PTI/India Today)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 23 अप्रैल को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CSS) की मीटिंग हुई. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान से लगता अटारी बॉर्डर बंद कर दिया है और वहां से होने वाले व्यापार पर भी रोक लगा दी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कहीं करतारपुर कॉरिडोर को भी तो बंद नहीं कर दिया गया? तो आपको बता दें कि पंजाब के गुरदासपुर में मौजूद करतारपुर कॉरिडोर खुला है. करतारपुर कॉरिडोर से ही भारतीय सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान के गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब जाते हैं.

बुधवार, 23 अप्रैल को विदेश मंत्रालय ने पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच डिप्लोमैटिक रिलेशन पर कई प्रतिबंधों का एलान किया. इनमें सिंधु जल समझौता पर रोक लगाना, अमृतसर का अटारी चेक पोस्ट बंद करना और SAARC वीजा छूट स्कीम के तहत भारत आने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजना शामिल है.

इस बीच, बटाला के सीनियर पुलिस सुपरिटेंडेंट (SSP) सोहेल कासिम मीर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

गुरुद्वारा जाने के लिए कॉरिडोर से सफर करने के इच्छुक तीर्थयात्री ऐसा कर सकते हैं. फिलहाल, कॉरिडोर खुला है.

SSP ने कंफर्म किया कि करतारपुर कॉरिडोर पहले की तरह काम कर रहा है.

दरअसल, करतारपुर कॉरिडोर एक वीजा-फ्री बॉर्डर क्रॉसिंग है. पाकिस्तान के करतारपुर में गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब जाने के लिए तीर्थयात्री इस कॉरिडोर का इस्तेमाल करते हैं. पंजाब के गुरदासपुर जिले में गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक है, जहां से होकर तीर्थयात्री गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब जाते हैं.

करतारपुर कॉरिडोर एक खास ‘धार्मिक रास्ता’ है. इसका उद्घाटन 9 नवंबर, 2019 को सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक की 550वीं जयंती के मौके पर हुआ था. उन्होंने अपनी जिंदगी के आखिरी 18 साल करतारपुर में ही बिताए थे और यहीं उनका निधन हुआ था. इसलिए यह जगह सिख समाज के लिए बेहद पवित्र मानी जाती है.

इस कॉरिडोर के जरिए हर दिन 5,000 तीर्थयात्रियों को जाने की इजाजत है. हालांकि असल में रोज करीब 400 लोग ही यात्रा करते हैं. यहां जाने के लिए भारतीय नागरिकों और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारकों को वीजा की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ जरूरी शर्तें होती हैं.

करतारपुर कॉरिडोर से जाने के लिए कम से कम एक हफ्ते पहले भारत सरकार की वेबसाइट (prakashpurb550.mha.gov.in) पर रजिस्ट्रेशन करना होता है. इसके अलावा पासपोर्ट डिटेल्स देनी होती हैं और एक इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉराइजेशन (ETA) लेनी होती है. कुछ मामलों में पुलिस वेरिफिकेशन भी किया जाता है.

जब आप यात्रा के लिए निकलते हैं, तो अपने साथ वैलिड पासपोर्ट और ETA का प्रिंटआउट जरूर ले जाएं. ध्यान रहे कि तीर्थयात्री रात भर पाकिस्तान में नहीं रुक सकते, और केवल 7 किलोग्राम तक का सामान साथ ले जा सकते हैं. श्रद्धालु सिर्फ गुरुद्वारा दरबार साहिब तक ही जा सकते हैं, उससे आगे नहीं.

वीडियो: पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा एक्शन, भारत ने उठाए ये 5 कदम

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