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'धर्म के आधार पर दुश्मनी बढ़ाने की बेशर्म कोशिश'- कोर्ट ने कपिल मिश्रा को खूब सुनाया

Kapil Mishra 'Pakistan' Comment: कोर्ट ने कहा है कि कपिल ने 2020 में ‘धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने’ और ‘नफरत फैलाने’ के लिए ‘पाकिस्तान शब्द’ को बहुत कुशलता से गढ़ा था. ये भी कहा गया कि भारत में चुनावों के दौरान वोट हासिल करने के लिए सांप्रदायिक भाषण देने का चलन हो गया है.

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8 मार्च 2025 (पब्लिश्ड: 11:03 AM IST)
Kapil Mishra Used 'Pakistan' Word To Spew Hatred court on Communal Tweets
कपिल मिश्रा ने दिल्ली चुनाव, 2020 को 'भारत बनाम पाकिस्तान' बताया था. (फ़ोटो - PTI)
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दिल्ली के एक कोर्ट ने BJP नेता कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) की याचिका को खारिज कर दिया है. दरअसल, कपिल मिश्रा के 2020 के एक X पोस्ट के चलते उन पर FIR दर्ज की गई थी. इस पर मजिस्ट्रेट ने उन्हें तलब किया. इसी को उन्होंने चुनौती दी थी. इसी पर कोर्ट ने याचिका ख़ारिज करते हुए कई तीखे कॉमेंट किए हैं.

कोर्ट ने कहा,

कपिल मिश्रा ने अपने ‘बयानों’ में नफरत फैलाने के लिए 'पाकिस्तान' शब्द का बहुत ही कुशलता से इस्तेमाल किया है. वो चुनाव अभियान में होने वाले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के प्रति बेपरवाह थे. ताकि सिर्फ़ वोट हासिल किए जा सकें.

कपिल मिश्रा वर्तमान में दिल्ली के कानून और न्याय मंत्री हैं. कपिल ने कहा था कि AAP और कांग्रेस ने शाहीन बाग में एक ‘मिनी पाकिस्तान’ बनाया था. 2020 के अपने पोस्ट में उन्होंने ये भी कहा था कि तत्कालीन विधानसभा चुनाव ‘भारत और पाकिस्तान’ के बीच मुकाबला होगा.

इस पर अब कोर्ट ने कहा है कि कपिल ने 2020 में ‘धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने’ और ‘नफरत फैलाने’ के लिए ‘पाकिस्तान शब्द’ को बहुत कुशलता से गढ़ा था. राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज जितेंद्र सिंह 7 मार्च को मामले की सुनवाई कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में चुनावों के दौरान वोट हासिल करने के लिए सांप्रदायिक भाषण देने का चलन हो गया है.

कोर्ट ने और क्या कहा?

लाइव लॉ की ख़बर के मुताबिक़ जज जितेंद्र सिंह ने आगे कहा,

ये विभाजनकारी राजनीति का नतीजा है. जो देश के लोकतांत्रिक और बहुलतावादी ताने-बाने के लिए ख़तरा है. दुर्भाग्य से उपनिवेशवादियों की फूट डालो और राज करो की नीति भारत में अभी भी चलन में है.

कोर्ट में कपिल मिश्रा की तरफ़ से सीनियर वकील पवन नारंग ने दलीलें पेश कीं. उन्होंने कहा कि बयानों में कहीं भी किसी जाति, समुदाय, धर्म, नस्ल या भाषा का ज़िक्र नहीं किया गया है. बल्कि एक ऐसे देश का उल्लेख किया गया है, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA) की धारा 125 के तहत प्रतिबंधित नहीं है.

लेकिन इस दलील को कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया. जज ने इस पर कहा,

ये दलील पूरी तरह से बेतुकी और अस्वीकार्य है. ‘बयान’ में किसी ख़ास देश का संदर्भ, एक ख़ास धार्मिक समुदाय के लोगों के लिए स्पष्ट संकेत है. जो धार्मिक समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने के लिए स्पष्ट है. इसे एक आम आदमी भी आसानी से समझ सकता है. एक समझदार व्यक्ति की तो बात ही छोड़िए.

कोर्ट की तरफ़ से कहा गया कि कपिल मिश्रा का बयान धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने की एक बेशर्म कोशिश है. जिसमें अप्रत्यक्ष रूप से एक 'देश' का उल्लेख किया गया है. इसे दुर्भाग्य से आम बोलचाल में अक्सर एक ख़ास धर्म के सदस्यों को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

मामला क्या है?

दरअसल, कपिल मिश्रा ने 2020 में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आपत्तिजनक बयान दिए थे. मसलन, ‘दिल्ली में छोटे -छोटे पाकिस्तान बने’ और ‘शाहीन बाग में पाकिस्तान की एंट्री.’ मामला इसी से जुड़ा है. वहीं, सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट से भी. इसमें उन्होंने कहा था कि 2020 में चुनाव के दिन 8 फरवरी को ‘दिल्ली की सड़कों’ पर ‘भारत बनाम पाकिस्तान’ मुकाबला होगा.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, रिटर्निंग ऑफ़िसर के ऑफ़िस से एक लेटर हासिल होने के बाद कपिल मिश्रा के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने आदर्श आचार संहिता और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन किया है. आरोप लगाया गया था कि उन्होंने वर्गों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के मकसद से पोस्ट किए थे.

11 नवंबर 2023 को चार्जशीट दाखिल की गई. इसके बाद अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (ACJM) प्रियंका राजपूत ने शिकायत पर संज्ञान लिया. 22 जून, 2024 में कपिल मिश्रा को तलब किया गया. इसके एक महीने बाद 20 जुलाई 2024 को कपिल मिश्रा ने रिवीज़न पेटीशन याचिका दायर की. इसी पर अब फ़ैसला आया है. कपिल मिश्रा की याचिका को ख़ारिज कर दिया गया है.

बता दें, कपिल मिश्रा अपने विवादित X पोस्ट को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं

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वीडियो: दिल्ली चुनाव: BJP कैंडिडेट ओपी शर्मा ने कपिल मिश्रा के भारत-पाकिस्तान वाले बयान पर क्या कहा?

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