भारत-EU की ऐतिहासिक ट्रेड डील पर लगी मुहर, पीएम मोदी ने बताया किन सेक्टर्स को मिलेगा फायदा
Mother of All Deals: 28 जनवरी को दिल्ली में भारत-EU समिट में जॉइंट स्टेटमेंट जारी करेंगे, जहां डील के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी. ये समझौता ऐसे समय में आया है जब भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ का सामना कर रहा है.

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) ने एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगा दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'लैंडमार्क' करार दिया है. मोदी ने बताया कि ये समझौता लगभग दो दशकों से चल रही बातचीत के बाद सोमवार, 26 जनवरी को अंतिम रूप ले पाया. भारत और EU मिलकर वैश्विक GDP का करीब 25% और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे 2 अरब लोगों का एक विशाल बाजार तैयार हो गया है.
CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक में कहा,
"मैं उन सभी साथियों को बधाई देता हूं जो टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और शूज जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं. ये डील इन क्षेत्रों के लिए बहुत सहायक साबित होगी."
ये समझौता ऐसे समय में आया है जब भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ का सामना कर रहा है. पिछले साल अगस्त में ट्रंप ने भारत पर ये टैरिफ लगाए थे, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका लगा. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां 2024 में भारत का ट्रेड सरप्लस 45.8 बिलियन डॉलर रहा. इन टैरिफ के कारण भारत ने वैकल्पिक बाजार तलाशना शुरू किया और यूके, ओमान, न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते किए.
EU के साथ ये चौथी बड़ी डील है. EU भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. 2024 में दोनों के बीच का द्विपक्षीय व्यापार 120 बिलियन यूरो (लगभग 140 बिलियन डॉलर) से ज्यादा रहा. भारत EU को मशीनरी, केमिकल्स, बेस मेटल्स, मिनरल प्रोडक्ट्स और टेक्सटाइल्स जैसी चीजें निर्यात करता है. जबकि EU से मशीनरी, ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट और केमिकल्स आयात होते हैं.
EU के छह बड़े बाजारों (नीदरलैंड, जर्मनी, इटली, स्पेन, फ्रांस, बेल्जियम) में भारत का निर्यात पिछले साल के नौ महीनों में 43.8 बिलियन डॉलर रहा. जबकि अमेरिका में ये 65.88 बिलियन डॉलर था. EU की ओर से यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में कहा था,
"हम टैरिफ के बजाय फेयर ट्रेड चुन रहे हैं, अलगाव के बजाय पार्टनरशिप, शोषण के बजाय सस्टेनेबिलिटी."
दोनों नेता बुधवार, 28 जनवरी को दिल्ली में भारत-EU समिट में जॉइंट स्टेटमेंट जारी करेंगे, जहां डील के विस्तृत प्रावधान सामने आएंगे.
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ये समझौता भारतीय टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और शूज सेक्टर के लिए बड़ा बूस्ट है, जो अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हुए थे. साथ ही, ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में EU से आयात पर टैरिफ 110% से घटाकर 40% तक लाने की संभावना है. जिससे BMW, Mercedes-Benz जैसी कंपनियों को फायदा होगा.
हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि EU डील अमेरिकी बाजार की भरपाई नहीं कर सकती. फिर भी, ये भारत की ट्रेड डायवर्सिफिकेशन रणनीति का मजबूत कदम है, जो भू-राजनीतिक तनावों के बीच फेयर ट्रेड और पार्टनरशिप को बढ़ावा देता है.
वीडियो: UK के साथ कौन सी डील साइन होने वाली है?

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