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केस सुनवाई से हटाए गए जस्टिस यशवंत वर्मा, हाई कोर्ट ने जारी की नई लिस्ट

Justice Yashwant Varma Heading Div Bench: 24 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक सर्कुलर जारी किया. जिसमें कहा गया- ‘हालिया घटनाओं के मद्देनज़र, जस्टिस यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य अगले आदेश तक वापस ले लिया गया है.’

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24 मार्च 2025 (अपडेटेड: 24 मार्च 2025, 02:19 PM IST)
Justice Yashwant Varma as heading Division Bench
CJI ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को इसे लेकर निर्देश दिया था. (फ़ोटो - PTI/इंडिया टुडे)
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दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Varma) को तत्काल प्रभाव से न्यायिक जि़म्मेदारियों से हटा दिया गया है. इससे पहले, उन्हें 24 मार्च के एक मामले की सुनवाई के लिए दो जजों की बेंच का प्रमुख बनाया गया था. जस्टिस वर्मा (Justice Yashwant Varma) के आवास में आग लगने के बाद कैश बरामद होने से वो लगातार चर्चा में हैं.

इससे पहले, CJI संजीव खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय को इसे लेकर निर्देश दिया था. इसमें कहा गया कि जांच पूरी होने तक वो जस्टिस वर्मा को कोई भी नया केस ना दें.

लेकिन 24 मार्च के लिए दिल्ली हाईकोर्ट की जो कॉजलिस्ट जारी हुई, उसमें जस्टिस वर्मा को कोर्ट में मामलों की सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच नंबर 3 का प्रमुख दिखाया गया. बताया गया कि 24 मार्च की कॉजलिस्ट 17 मार्च के रोस्टर के आधार पर तैयार की गई है. इसलिए जस्टिस वर्मा का नाम लिस्ट में दर्ज था.

इस बीच, आज यानी 24 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक सर्कुलर जारी किया. जिसमें कहा गया- ‘हालिया घटनाओं के मद्देनज़र, जस्टिस यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है.’

हाई कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की पीठ के मामले जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ को सौंप दिए गए हैं. कोर्ट ने एक नया रोस्टर भी जारी किया है, जो 25 मार्च से प्रभावी होगा.

पिछले रोस्टर में क्या था?

इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट के 17 मार्च के रोस्टर की जानकारी दिल्ली हाई कोर्ट की वेबसाइट में दी गई थी. जानकारी के मुताबिक़, जस्टिस वर्मा को डिवीजन बेंच नंबर 3 का नेतृत्व दिया गया. मामले में उनके बेंच पार्टनर जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर रखे गए थे.

delhi high court
सुनवाई के लिए जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम.

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पूरा मामला

जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में 14 मार्च की रात 11.30 बजे आग लगी थी. जिसके बाद फ़ायर सर्विस की टीम को उनके आवास में भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ. मामले ने तूल पकड़ा, तो सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से एक आधिकारिक बयान जारी किया गया. इसमें बताया गया कि जस्टिस यशवंत वर्मा का ट्रांसफर और इन-हाउस जांच पूरी तरह स्वतंत्र और अलग है.

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कैश मिलने के आरोपों को लेकर जांच शुरू की. इसके तहत दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस से एक प्रारंभिक रिपोर्ट मांगी गई. ये रिपोर्ट 21 मार्च को सौंपी गई.

इस रिपोर्ट में बताया गया कि चीफ़ जस्टिस उपाध्याय को 15 मार्च की शाम क़रीब 4:50 बजे दिल्ली के पुलिस कमिश्नर ने इसकी ख़बर दी. इसके बाद चीफ़ जस्टिस ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के साथ घटनास्थल का दौरा किया. जहां उन्होंने जस्टिस वर्मा से भी मुलाक़ात की. इसी दौरे के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने 25 पेज वाली इस रिपोर्ट को सार्वजनिक भी कर दिया था. इधर, जस्टिस वर्मा ने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप आधारहीन हैं.

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