सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से फायदा होगा या नुकसान? सब जान लीजिए
Gold Import Duty Hike: सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद सोना-चांदी का आयात कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना है. सरकार ने इससे पहले साल 2024 के बजट में सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी 15% से घटाकर 6% कर दी थी. इस समय हुए इस फैसले से अपना नफा-नुकसान जान लीजिए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद अब केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के इम्पोर्ट पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी है. सरकार ने ये ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है. इसके लिए 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस लगाया गया है. सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद सोना-चांदी का आयात कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना है. लेकिन इससे आम जन पर क्या असर पड़ेगा? ये समझते हैं.
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड कंज़्यूमर्स में शामिल है. देश अपनी जरूरत का करीब 99% गोल्ड विदेशों से खरीदता है. फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में गोल्ड इम्पोर्ट बिल करीब 6.4 लाख करोड़ रुपए रहा. विदेशों से खरीदे जाने वाले सामान में ऑयल के बाद गोल्ड दूसरे नंबर पर है. सरकार ने साल 2024 के बजट में सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी 15% से घटाकर 6% कर दी थी. इसके बाद गोल्ड इम्पोर्ट तेजी से बढ़ा था. अब सरकार ने कस्टम ड्यूटी फिर से पुराने स्तर पर पहुंचा दी है.
नुकसान क्या हो सकते हैं?इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि इस फैसले से सोने की मांग कम हो सकती है. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (Bullion traders and Jewellers Association) के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार करंट अकाउंट डेफिसिट को काबू में रखने के लिए यह कदम उठा रही है. लेकिन पहले से ऊंची कीमतों के बीच टैक्स बढ़ने से बाजार पर असर पड़ सकता है.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अधिकारियों ने यह भी चिंता जताई है कि ड्यूटी बढ़ने से फिर से गोल्ड स्मगलिंग बढ़ सकती है. उनका कहना है कि 2024 में ड्यूटी घटने के बाद स्मगलिंग के मामलों में कमी आई थी. व्यापारियों का ये भी कहना है कि कैश के ज़रिए लेन-देन बढ़ेगा जिसकी वजह से इसे ट्रेस कर पाना भी मुश्किल हो सकता है. फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत हर महीने औसतन 60 टन सोना इम्पोर्ट कर रहा था. इस पर हर महीने करीब 6 बिलियन डॉलर यानी लगभग 57 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे थे.
11 मई को शेयर बाजार खुलने के बाद ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई. Titan Company के शेयर करीब 7% टूटे, जबकि Kalyan Jewellers और Senco Gold के शेयर करीब 10% तक गिर गए. इसके अलावा पीएन गाडगिल और थंगमयिल ज्वेलरी समेत कई दूसरे ज्वेलरी शेयरों में भी कमजोरी देखी गई.
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फायदा क्या होगा?इससे पहले पीएम मोदी लगातार दो दिन 10 और 11 मई को देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील कर चुके हैं. पीएम ने कहा था, ‘एक समय था, जब संकट आने पर देशहित में लोग सोना दान दे देते थे. अब दान देने की ज़रूरत नहीं है. अगर आपके घर में कोई कार्यक्रम हो तो सोने के गहने न खरीदें.’ जब सरकार ने इम्पोर्ट ड्यूटी कम की थी तब गोल्ड के आयात में तगड़ा उछाल देखा गया था. लेकिन इंपोर्ट में इजाफा देश के फॉरेक्स रिजर्व पर बड़ा दबाव डालने वाला साबित हुआ. सरकार का ये कदम इसी दबाव को कम करने की दिशा में लिया गया है.
डॉलर जितना कम खर्च होगा, उतना फॉरेक्स रिज़र्व बचेगा.एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया का फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व (फॉरेक्स) 690.69 बिलियन डॉलर है. पीएम का मैसेज एकदम क्लियर है. डॉलर जितना कम खर्च होगा उतना फॉरेक्स रिज़र्व बचेगा. इससे हम गोल्ड से ज्यादा ज़रूरी चीज़ खरीद सकते हैं. भारत गोल्ड से ज्यादा तेल आयात करता है. पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट को देख ये पैसे तेल के आयात में खर्च किए जा सकते हैं. अगर गोल्ड के आयात में 30-40 फीसदी की भी गिरावट देखी गई तो हम 20-25 बिलियन डॉलर की बचत कर सकते हैं.
12 मई को रुपया ऑलटाइम लो पर चला गया था. एक डॉलर की कीमत 95.50 रुपये हो गई थी. सरकार ने गिरते रुपये को संभालने के लिए भी ये कदम उठाया है. इंडस्ट्री में कुछ ट्रेडर्स ने इस फैसले को सपोर्ट किया है. Malabar Gold & Diamonds ने गोल्ड मॉनेटाइज़ेशन स्कीम के लिए सरकार को कुछ प्रस्ताव भेजे हैं. उनके हिसाब से भारत की इकोनॉमी को मज़बूत करने के लिए ये जरूरी कदम है.
वीडियो: खर्चा-पानीः पीएम मोदी ने गोल्ड खरीदने से बचने को क्यों कहा? क्या संकट में है रुपया और इकोनॉमी?


