आपके सोना खरीदने का विदेशी मुद्रा भंडार से क्या कनेक्शन है?
PM Modi not buy gold statement: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान ईरान जंग को लेकर वैश्विक मुश्किलों की चर्चा की. लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने, खाने के तेल की बचत करने और विदेशी यात्रा से न करने जैसी कई सलाहें दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिकंदराबाद में एक जनसभा में लोगों को एक साल तक सोना न खरीदने, खाने के तेल की बचत करने और विदेशी यात्रा से न करने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें ये स्वीकार करके विदेशी मुद्रा बचानी होगी. हालांकि, इन सभी अपीलों के बीच एक बात ने लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा, वो है सोना न खरीदने की अपील. ऐसे देश में जहां सोने की खरीद संस्कृति से जुड़ा मामला है. शादियों में सोने के जेवरात उपहार में दिए जाते हैं, वहां सोने की खरीद कम करने की अपील पर हैरान होना लाजिमी है. भारत में गोल्ड बचत और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है.
हालांकि, पीएम मोदी के इस बयान के पीछे एक बड़ी आर्थिक चिंता छिपी है. ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बीच भारत के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व पर दबाव पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आस-पास तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है. प्रति बैरल कच्चे तेल के दाम 75 डॉलर से बढ़कर 110 डॉलर तक पहुंच गए हैं. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% हिस्सा आयात करता है और सोना भी बड़ी मात्रा में इंपोर्ट किया जाता है.
दोनों का भुगतान करने के लिए डॉलर की जरूरत पड़ती है. जिसका सीधा असर भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा) और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है. ऐसे में जब परिवार किसी वैश्विक संकट के बीच बड़ी मात्रा में इंपोर्ट किया सोना खरीदता है, तो देश से ज्यादा डॉलर बाहर चले जाते हैं. इससे भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है. ज्यादा घाटा अक्सर रुपये को कमजोर कर देता है क्योंकि देश जितनी विदेशी मुद्रा कमाता है. उससे ज्यादा खर्च करता है.
यही एक वजह है कि सरकार अक्सर इन स्थितियों के दौरान सोने के आयात को लेकर सतर्क हो जाती हैं. भारतीय रुपया इस समय डॉलर के मुकाबले, तोड़ निचले स्तर पर चल रहा है. BBC हिंदी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद के इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर की प्रमुख प्रोफेसर सुंदरावल्ली के हवाले से बताया,
देश में हर साल 600 से 700 टन सोना आयात होता है. और निर्यात बहुत कम है, इसलिए यह सोना घरों में जमा हो गया है. घरों में मौजूद सोने को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं, लेकिन आमतौर पर इसे 25 हजार से 27 हजार टन माना जाता है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार पहले भी आर्थिक संकट के समय सोने के ज्यादा आयात को कम करने के लिए कदम उठा चुकी है. मतलब सोने पर इंपोर्ट टैक्स बढ़ा देना. आयात पर प्रतिबंध लगाना. और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे ऑप्शन को बढ़ावा देना. इसका मकसद विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और रुपये को स्थिर करना है.
आखिर में एक सवाल है. क्या एक परिवार के गहनों की खरीद रुपये की कीमत पर सीधा असर डाल सकती है? जवाब है नहीं. एक परिवार नहीं. लेकिन जब करोड़ों परिवारों की कुल मांग और हर साल सैकड़ों टन सोने के आयात को देखें, तो ये काफी असर डाल सकती है.
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