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114 वर्षीय फौजा सिंह की सड़क हादसे में मौत, घर के बाहर गाड़ी ने मारी टक्कर

Fauja Singh का जन्म 1 अप्रैल 1911 को Punjab के Jalandhar के ब्यास गांव में हुआ था. यह ब्रिटिश इंडिया का दौर था. एक किसान परिवार में फौजा सिंह चार बच्चों में सबसे छोटे थे.

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Fauja Singh, Fauja Singh died
फौजा सिंह भारतीय मूल के ब्रिटिश मैराथन रनर थे.
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मौ. जिशान
14 जुलाई 2025 (Updated: 14 जुलाई 2025, 11:28 PM IST)
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भारतीय मूल और ब्रिटेन के पूर्व मैराथन रनर फौजा सिंह की एक सड़क हादसे में मौत हो गई है. 114 साल के फौजा सिंह हादसे के वक्त जालंधर में अपने गांव ब्यास में थे. दोपहर करीब साढ़े 3 बजे घर के नजदीक ही एक अज्ञात गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी. बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.

फौजा सिंह ने 89 साल की उम्र दौड़ना शुरू किया था. उनके नाम कई आयु वर्गों में अनगिनत रिकॉर्ड दर्ज हैं. फौजा सिंह लंबी दूरी के धावक रहे हैं. उन्हें 100 साल की उम्र में फुल मैराथन पूरी करने वाला सबसे उम्रदराज व्यक्ति भी माना जाता है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत सोमवार, 14 जुलाई की शाम जालंधर के एक प्राइवेट अस्पताल में हुई. पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उनकी मौत पर दुख जताया है. राज्यपाल कटारिया ने एक्स पर लिखा,

"महान मैराथन रनर और दृढ़ता के प्रतीक सरदार फौजा सिंह जी के निधन से काफी दुखी हूं. 114 साल की उम्र में वे अद्वितीय उत्साह के साथ 'नशा मुक्त - रंगला पंजाब' मार्च में मेरे साथ शामिल हुए थे. उनकी विरासत नशा मुक्त पंजाब के लिए प्रेरणा बनी रहेगी."

परिवार को अपंग लगते थे फौजा सिंह

फौजा सिंह का जन्म 1 अप्रैल 1911 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के जालंधर जिले के ब्यास गांव में हुआ था. वे एक किसान परिवार में चार बच्चों में सबसे छोटे थे. उनका बचपन आसान नहीं था. ओलंपिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके परिवार को लगता था कि वे अपंग हैं, क्योंकि वे पांच साल की उम्र तक चल नहीं पाए थे. उनके पैर बहुत कमजोर और पतले थे, इसलिए वे ज्यादा दूरी तक चल नहीं सकते थे. बड़े होने पर उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए खेती का काम किया.

1992 में अपनी पत्नी जियान कौर की मृत्यु के बाद वे इंग्लैंड चले गए और अपने बेटे के साथ ईस्ट लंदन में बस गए.

फौजा सिंह ने कब दौड़ना शुरू किया?

1994 में अपने बेटे कुलदीप की मृत्यु के बाद फौजा सिंह ने दौड़ना शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने दुख से उबरने के लिए हल्की दौड़ लगाना शुरू किया. लेकिन उन्होंने 2000 में रनिंग को गंभीरता से लेना शुरू किया. तब वे 89 साल के थे. उसी साल उन्होंने पहली बार लंदन मैराथन पूरी की, जिसमें उन्हें 6 घंटे 54 मिनट लगे. इस दौरान उन्होंने 90 प्लस उम्र वर्ग का पिछला रिकॉर्ड 58 मिनट से तोड़ा था. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. इंडो-ब्रिटिश खिलाड़ी ने न्यूयॉर्क, टोरंटो और मुंबई जैसे शहरों में मैराथन में भाग लिया. उनके पूरे करियर में उनके निजी कोच हरमिंदर सिंह ने उन्हें ट्रेनिंग दी थी.

फौजा सिंह ने 2003 के टोरंटो वाटरफ्रंट मैराथन को '90 से ज्यादा' वर्ग में 5 घंटे 40 मिनट में पूरा करके एक कदम और आगे बढ़ाया, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय था. फौजा सिंह ने कई चैरिटी के लिए धन जुटाया और दुनियाभर में सिख संस्कृति को बढ़ावा दिया.

16 अक्टूबर 2011 को फौजा सिंह 100 साल की उम्र में मैराथन पूरा करने वाले पहले व्यक्ति बने, जिससे वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग मैराथन धावक बन गए. उन्होंने टोरंटो वॉटरफ्रंट मैराथन को 8 घंटे 11 मिनट 6 सेकंड में पूरा किया.

क्योंकि उन्हें स्टार्टिंग लाइन तक पहुंचने में 14 मिनट से ज्यादा का समय लगा था, इसलिए उनकी आधिकारिक समय सीमा 8 घंटे 25 मिनट 17 सेकंड मानी गई. इसे उनके एज ग्रुप में वर्ल्ड रिकॉर्ड के तौर पर पेश किया गया.

हालांकि, यह एक विश्व रिकॉर्ड था, लेकिन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इसे मान्यता नहीं दी क्योंकि फौजा सिंह अपना जन्म प्रमाण पत्र पेश नहीं कर सके. भारत में 1911 में आधिकारिक जन्म रजिस्ट्रेशन के रिकॉर्ड नहीं रखे जाते थे. इसलिए उनके पास यह प्रमाण नहीं था. हालांकि, उनके पासपोर्ट पर जन्म तिथि 1 अप्रैल 1911 दर्ज है. ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ द्वितीय ने भी उन्हें उनके 100वें जन्मदिन पर व्यक्तिगत रूप से एक पर्सनल लेटर दिया था.

फौजा सिंह लंदन 2012 ओलंपिक में ओलंपिक मशाल लेकर चलने वाले धावकों में भी शामिल थे. उन्होंने 101 साल की उम्र में रिटायरमेंट लिया. उन्होंने हांगकांग में अपनी आखिरी लंबी दूरी की दौड़ पूरी की. यह दौड़ 10 किलोमीटर की थी, जिसे उन्होंने 1 घंटा 32 मिनट और 28 सेकंड में पूरी की.

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