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आवारा कुत्तों को 'राहत या आफत'? आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई, 3 जजों की बेंच बनी

Stray Dogs Case: आवारा कुत्तों से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ गठित की गई है, जो गुरुवार, 14 अगस्त को मामले की सुनवाई करेगी.

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13 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 14 अगस्त 2025, 06:47 AM IST)
Stray Dogs
आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई. (India Today)
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दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को शेल्टर में शिफ्ट करने के मामले को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच को सौंप दिया गया है. गुरुवार, 14 अगस्त को इस मामले में सुनवाई होगी. 11 अगस्त को स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने आदेश दिया था कि एमसीडी और दिल्ली सरकार इलाके के आवारा कुत्तों को शेल्टर में शिफ्ट करने का काम तत्काल शुरू करे. डॉग लवर्स कोर्ट के इस आदेश का विरोध कर रहे थे. 

बुधवार, 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बीआर गवई के सामने दो बार ये मुद्दा उठाया गया था. बीआर गवई ने भी कहा था कि वे इस मामले को देखेंगे. इसके कुछ घंटों बाद ही ये मामला सुनवाई के लिए तीन जजों की पीठ को सौंप दिया गया. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, नई बेंच में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया होंगे, जो इस पर गुरुवार, 14 अगस्त को सुनवाई करेंगे.

सीजेआई के सामने उठा था मुद्दा

बुधवार, 13 अगस्त को कुत्तों के नसबंदी कार्यक्रम को लेकर एक पुरानी याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील ननिता शर्मा ने यह मुद्दा सीजेआई गवई के सामने उठाया था. उन्होंने कहा था कि पर्याप्त फंड जारी होने के बाद भी एमसीडी दिल्ली में कुत्तों की संख्या में कमी लाने में विफल रहा. अगर प्रोग्राम के लिए जारी पैसे का सही इस्तेमाल करते हुए कुत्तों के नसबंदी का कार्यक्रम ठीक से चलाया गया होता तो सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश की जरूरत नहीं पड़ती. 

शर्मा ने आगाह किया कि कुत्तों को शेल्टर्स में शिफ्ट करने से वहां बीमारियां बढ़ सकती हैं, जिसका संक्रमण इंसानों में भी फैलने का खतरा होगा. उन्होंने मुख्य न्यायाधीश गवई से आग्रह किया कि 11 अगस्त के कुत्तों को शेल्टर्स में शिफ्ट करने के मामले को सूचीबद्ध किया जाए ताकि कोर्ट ये तय कर सके कि इस विवाद को एक बड़ी पीठ को सौंपकर सुलझाया जाए या नहीं?

इस पर सीजेआई ने कहा था कि (जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की) दूसरी पीठ ने पहले ही आदेश पारित कर दिया है लेकिन वे इस पर गौर करेंगे.
 

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