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ठगों ने दिल्ली पुलिस तक को ना छोड़ा, बेटे का एडमिशन कराने का झांसे देकर 2.3 लाख लूट लिए

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ 30 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज पाई गईं. इनमें से कई दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को पहले ही ट्रांसफर कर दी गई हैं. पुलिस ने बताया कि आरोपियों से आगे की पूछताछ जारी है.

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admission scam targeted Delhi cop
एडमिशन रैकेट ने दिल्ली पुलिस की हेड कॉन्सटेबल को भी ठगा. (फोटो- X/@DCPDwarka)
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हरीश
30 अगस्त 2025 (Updated: 30 अगस्त 2025, 06:27 PM IST)
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दिल्ली पुलिस की एक महिला हेड कॉन्स्टेबल अपने बच्चे के कॉलेज एडमिशन को लेकर चिंता में थीं. क्योंकि कॉलेजों में दाखिले के मौसम का आखिरी महीना जुलाई आ चुका था. और उनका बेटा अपनी पसंद के किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज की एडमिशन लिस्ट में जगह नहीं बना पाया था.

फिर 28 जुलाई को हेड कॉन्स्टेबल के फोन पर एक SMS आया, जो उन्हें तो किसी संजीवनी बूटी की तरह लगा. लेकिन था वो एक बड़ा एडमिशन रैकेड चलाने वाले गैंग का SMS. आगे जो हुआ, उसमें हेड कॉन्स्टेबल ने अपने 2.3 लाख रुपये खो दिए. उन्होंने स्थानीय पुलिस ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद अब 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस का कहना है कि आरोपियों के पास से 1.34 करोड़ रुपये नकद, छह महंगे मोबाइल फोन, एक महंगा लैपटॉप और छात्रों-कॉलेजों के डॉक्यूमेंट्स भी बरामद किए गए हैं.

पूरा मामला क्या है?

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, मामले पर द्वारका के DCP अंकित सिंह ने बताया,

हेड कॉन्स्टेबल को जो मैसेज आया था, वो 'JM-IPUUDL-P' से था. जिसमें उनके बेटे को आईपी यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट कोटे से दाखिला दिलाने का प्रस्ताव था. SMS में लावण्या नाम की एक महिला का नंबर था.

पुलिस ने बताया कि जब हेड कांस्टेबल ने लावण्या से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि उन्हें कंपनी के ऑफिस में आना होगा. जहां आगे की जानकारी दी जाएगी. ये ऑफिस 604, भंडारी हाउस, नेहरू प्लेस, नई दिल्ली में मौजूद था. हेड कांस्टेबल बताए गए पते पर (ऑफिस) पहुंचीं. जहां उन्हें बताया गया कि फर्म के पास कॉलेज स्टाफ को अलॉटेड मैनेजमेंट कोटे के जरिए कॉलेज की कुछ सीटों तक पहुंच है.

बातचीत के बाद 3.5 लाख रुपये में हेड कांस्टेबल के बेटे का सूरजमल कॉलेज में दाखिला दिलाना तय हुआ. हेड कांस्टेबल को इस खर्च से कोई ऐतराज नहीं था. क्योंकि उन्हें अपने बेटे का ‘भविष्य सुरक्षित’ करना था. इसलिए 29 जुलाई को वो भंडारी हाउस मौजूद उसी ऑफिस में 2.3 लाख रुपये नकद लेकर पहुंचीं. इस दौरान उन्हें बताया गया था कि दाखिला हो जाने के बाद वो बाकी रकम दे सकती हैं.

धोखेबाजों ने कहा कि उसके बेटे का नाम अगले 15 दिनों में कॉलेज के एडमिशन लिस्ट में दिखेगा. लेकिन हेड कांस्टेबल को धोखेबाजों से फिर कभी कोई खबर नहीं मिली. और उसके बेटे का नाम कभी किसी एडमिशन लिस्ट में नहीं आया. लावण्या का फोन नहीं लग रहा था और भंडारी हाउस के दरवाजे बंद थे. एडमिशन सेशन आधिकारिक रूप से खत्म होने के बाद 25 अगस्त को हेड कांस्टेबल ने शिकायत दर्ज कराई.

पुलिस की एक टीम ने काम शुरू कर दिया. उन्होंने लावण्या के फोन नंबर को ट्रैक किया और उसके आईपी एड्रेस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की. उसके नंबर को निगरानी में रखा गया. एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि डिजिटल फुटप्रिंट के एनालिसिस, आईपी ट्रेसिंग और भंडारी हाउस क्षेत्र के आसपास के सीसीटीवी कैमरा फुटेज का इस्तेमाल किया गया. जिससे पता चला कि आरोपी गाजियाबाद में है.

पुलिस ने बताया कि गुरुवार, 28 को गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित नीति खंड इलाके में एक फ्लैट पर छापा मारा गया. इस दौरान दो लोगों कुशाग्र श्रीवास्तव (35) और चिन्मय सिन्हा (32) को गिरफ्तार किया गया. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ 30 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज पाई गईं. इनमें से कई दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को पहले ही ट्रांसफर कर दी गई हैं.

पुलिस ने बताया कि आरोपियों से आगे की पूछताछ जारी है. पुलिस ने बताया कि महिला लावण्या का अभी तक पता नहीं चल पाया है.

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