The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Delhi Man Critical After AI Advice Risks Of HIV Drug Misuse Explained

HIV से बचने के लिए AI पूछकर दवा ली, शख्स गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

AI की बात मानकर शख्स ने लोकल मेडिकल स्टोर से बिना प्रिस्क्रिप्शन के पूरे 28 दिनों की दवाइयां खरीद ली. 7वें दिन उसे पूरे शरीर पर रैशेज (लाल दाने) हो गए. फिर आंखों में समस्या, त्वचा में जलन और दूसरे कॉम्प्लिकेशन्स शुरू हो गए.

Advertisement
Delhi Man Critical After AI Advice Risks Of HIV Drug Misuse Explained
डॉक्टरों ने मेडिकल टेस्ट किए तो पता चला कि उसे स्टीवेंस-जॉनसन सिंड्रोम (Stevens-Johnson Syndrome) हो गया है. (फोटो- iStock)
pic
प्रशांत सिंह
2 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 08:00 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

दिल्ली में एक 45 साल के आदमी ने HIV से बचने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां ले लीं. जिसके बाद उसकी हालत क्रिटिकल हो गई. ये दवाइयां उसने एक AI चैट प्लेटफॉर्म (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की सलाह पर ली थीं.

दरअसल, शख्स को हाल ही में एक हाई-रिस्क सेक्सुअल कॉन्टैक्ट हुआ था. वो डर गया और HIV से बचने के उपाय खोजने के लिए उसने AI चैटबॉट का इस्तेमाल किया. AI ने उसे बताया कि हाई-रिस्क एक्सपोजर के बाद पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) दवाइयां लेनी चाहिए, जो HIV होने से रोकती हैं. ये दवाइयां आमतौर पर 28 दिनों तक ली जाती हैं, लेकिन सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक AI की बात मानकर शख्स ने लोकल मेडिकल स्टोर से बिना प्रिस्क्रिप्शन के पूरे 28 दिनों की दवाइयां खरीद ली. उसने ये दवाइयां खुद से शुरू कीं और 7 दिन तक लीं. लेकिन 7वें दिन उसे पूरे शरीर पर रैशेज (लाल दाने) हो गए. फिर आंखों में समस्या, त्वचा में जलन और दूसरे कॉम्प्लिकेशन्स शुरू हो गए.

गंभीर सिंड्रोम हुआ

वो कई अस्पतालों में गया, लेकिन हालत बिगड़ती गई. आखिरकार उसे डॉक्टर राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में भर्ती किया गया. डॉक्टरों ने मेडिकल टेस्ट किए तो पता चला कि उसे स्टीवेंस-जॉनसन सिंड्रोम (Stevens-Johnson Syndrome) हो गया है. ये एक बहुत रेयर लेकिन जानलेवा ड्रग रिएक्शन है, जिसमें त्वचा और मुंह-आंखों की झिल्लियां छिल जाती हैं. बड़े-बड़े छाले पड़ जाते हैं और कई बार सांस लेने में भी दिक्कत होने लगती है.

शख्स फिलहाल ICU में है और उसकी हालत क्रिटिकल बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक उसके ट्रीटमेंट में लगे एक डॉक्टरों ने बताया,

“शख्स की हालत अभी भी गंभीर है. हमारा पहला फोसक ड्रग रिएक्शन को कंट्रोल करना है.”

डॉक्टरों ने क्या बताया?

डॉक्टरों ने बताया कि HIV की PEP दवाइयां अब रूटीन में नहीं दी जातीं, क्योंकि गाइडलाइंस बदल गई हैं. ये दवाइयां तभी लेनी चाहिए जब एक्सपोजर के 72 घंटे के अंदर डॉक्टर जांच करें, रिस्क देखें, ब्लड टेस्ट करवाएं और फिर पूरी निगरानी में कोर्स पूरा करें.

रिपोर्ट के अनुसार अगर सोर्स पर्सन HIV नेगेटिव निकलता है तो दवा रोक दी जाती है. लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से लीवर, किडनी डैमेज, गंभीर एलर्जी जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं.

डॉक्टरों ने हैरानी जताई कि आज भी ऐसे ड्रग्स बिना प्रिस्क्रिप्शन के मिल जाते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि AI सिर्फ जानकारी दे सकता है, वो डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता. मेडिकल केस में पर्सनल हिस्ट्री, जांच और एक्सपीरियंस की जरूरत होती है. जो AI नहीं कर सकता.

ये भी पढ़ें- लखनऊ के स्कूल में 5वीं के छात्र की बेरहमी से पिटाई, जूते की एड़ी चेहरे पर रगड़ी, एक आंख की रोशनी गई

स्टीवेंस-जॉनसन सिंड्रोम क्या है?

ये एक दुर्लभ लेकिन बेहद गंभीर बीमारी है, जो ज़्यादातर किसी दवा के रिएक्शन या कभी-कभी इंफेक्शन की वजह से होती है. इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम गड़बड़ा जाती है और त्वचा व म्यूकस मेम्ब्रेन यानी मुंह, आंख और प्राइवेट पार्ट्स की परत पर हमला कर देती है. शुरुआत में बुखार, गले में दर्द, आंखों में जलन जैसे लक्षण आते हैं, फिर त्वचा पर लाल चकत्ते और फफोले बनते हैं और ऊपर की त्वचा उतरने लगती है. हालत इतनी गंभीर हो सकती है कि मरीज को ICU या बर्न यूनिट में भर्ती करना पड़ता है, इसलिए जैसे ही ऐसे लक्षण दिखें, तुरंत डॉक्टर को दिखाना बहुत ज़रूरी होता है.

ये घटना बताती है कि स्वास्थ्य से जुड़े फैसले में AI पर पूरा भरोसा नहीं करना चाहिए. डॉक्टरों ने कहा कि सरकार को AI प्लेटफॉर्म्स पर हेल्थ एडवाइस के लिए सख्त नियम बनाने चाहिए. ऐसी दवाओं की ओवर-द-काउंटर बिक्री पर रोक लगानी चाहिए.

वीडियो: दिल्ली में तीन नाबालिगों ने 6 साल की बच्ची के साथ किया रेप, दो आरोपी गिरफ्तार

Advertisement

Advertisement

()