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नक्सलियों ने टीचर को घर से निकाल कुल्हाड़ी से मार डाला, 6 महीने पहले भाई की हत्या की थी

Sukma Maoists Kill Teacher: अधिकारियों के मुताबिक, नक्सलियों को शक था कि लक्ष्मण सिलगेर पुलिस कैंप को सूचनाएं दे रहे थे. 6 महीने पहले, नक्सलियों ने पेगडापल्ली गांव में ‘मुखबिर होने’ के नाम पर लक्ष्मण के भाई की भी हत्या कर दी थी.

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Sukma Maoists Kill Teacher
घटना पुलिस कैंप से मुश्किल से तीन किलोमीटर दूर हुई. (प्रतीकात्मक फोटो- इंडिया टुडे)
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हरीश
28 अगस्त 2025 (Published: 11:51 PM IST)
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छत्तीसगढ़ के सबसे दक्षिणी जिले सुकमा में नक्सलियों ने एक शिक्षक (अस्थायी) की उनके घर में घुसकर ‘हत्या कर दी’. आरोप है कि जब उनके परिवार के सदस्यों ने नक्सलियों को रोकने की कोशिश की, तो उन पर भी हमला किया गया. बीते एक साल में राज्य में किसी अस्थायी शिक्षक की ये पांचवीं हत्या है.

ये घटना 27 अगस्त की शाम करीब सात बजे सिलगेर इलाके में हुई. ये इलाका पुलिस कैंप से मुश्किल से तीन किलोमीटर दूर मौजूद है. बताया गया कि लगभग 20 नक्सली टीचर लक्ष्मण बारसे के घर पहुंचे और उन्हें घसीटकर बाहर ले गए. एक ग्रामीण ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

लक्ष्मण की पत्नी ने उन्हें रोकने की कोशिश की. लेकिन नक्सलियों ने उसके बाल पकड़ लिए और उसे घसीटकर उससे दूर ले गए. लक्ष्मण पर लाठियों और कुल्हाड़ी से हमला किया गया. हत्या से पहले कोई धमकी या जन अदालत नहीं लगाई गई, जो माओवादियों की एक परंपरा है.

6 महीने पहले, नक्सलियों ने पेगडापल्ली गांव में ‘मुखबिर होने’ के नाम पर लक्ष्मण के भाई की भी हत्या कर दी थी. गांव के एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस से कहा,

लक्ष्मण ने 12वीं तक पढ़ाई की थी और सिलगेर में 10-12 साल तक अस्थायी शिक्षक रहे थे. वो सरकार से शिक्षादूतों को नियमित करने की मांग कर रहे थे. उन्होंने हाल ही में मुझे बताया कि माओवादियों ने शिक्षकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है और उन्हें डर है कि वे उन पर भी हमला कर सकते हैं.

अधिकारियों के मुताबिक, नक्सलियों को शक था कि लक्ष्मण सिलगेर पुलिस कैंप को सूचनाएं दे रहे थे. वो अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं. एक तीन साल का है और दूसरा छह महीने पहले ही पैदा हुआ है.

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवादियों का काफी प्रभाव है. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षकों की भारी कमी है. इन इलाकों में सरकारी स्कूल सालों से बंद पड़े थे. वहां शिक्षकों की नियुक्ति भी मुश्किल से होती है. 2019 में अस्थायी ‘शिक्षादूत’ के रूप में शिक्षकों की तैनाती की गई थी. इसके तहत, हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट (HSC) पूरा करने वाले किसी भी ग्रामीण को शिक्षक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है. उन्हें 12,000 रुपये हर महीने वेतन दिया जाता है. वे प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाते हैं, जो ज्यादातर छोटी-छोटी झोपड़ियों में चलते हैं.

हालिया घटना पर एक अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा,

हालांकि, मकसद स्पष्ट नहीं है. लेकिन नक्सलियों ने बार-बार नागरिकों को निशाना बनाया है, खासकर उन लोगों को जिन पर उन्हें पुलिस मुखबिर के रूप में काम करने का शक है.

इससे पहले, 14 जुलाई को सुकमा के पड़ोसी जिले बीजापुर के फरसेगढ़ इलाके में नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर होने के नाम पर दो शिक्षादूतों की हत्या कर दी. 19 फरवरी को दंतेवाड़ा जिले में एक शिक्षादूत समेत दो लोगों की हत्या कर दी गई. सितंबर में सुकमा के गोंडपल्ली गाव में एक शिक्षादूत डोडी अर्जुन की हत्या कर दी गई.

शिक्षकों का आरोप है कि उन्होंने दो साल पहले सुकमा प्रशासन से जीवन बीमा कवर की मांग की थी. लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई. एक अस्थायी शिक्षक यानी शिक्षादूत ने नाम न छापने की शर्त पर हिंदुस्तान टाइम्स से कहा,

हम बेहद जोखिम भरी परिस्थितियों में काम कर रहे हैं. लेकिन सामान्य स्थिति बहाल होते ही हमें नौकरी से निकाल दिया जाएगा. हमारी नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है. राज्य ने अब तक कई बार शिक्षकों की भर्ती की है. 

शिक्षादूत बताते हैं कि उनमें से कई लोगों के पास डी.एल.एड (प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोमा) है. जो उन्हें नियमित नियुक्ति के योग्य बनाता है.

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