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IAS ने पंचायतों की लाइब्रेरी लिस्ट में शामिल करवा दीं अपने पिता की 36 किताबें, पूरे प्रदेश में बवाल

बिहार में पंचायत लाइब्रेरी की लिस्ट में अपने पिता की किताबों को शामिल करने के बाद IAS अधिकारी मिहिर कुमार सिंह चर्चा में है. उन्होंने लिस्ट में अपने पिता की 36 किताबों को शामिल कराया. उनसे ज्यादा रचनाएं सिर्फ रामधारी सिंह दिनकर की ही हैं. जिसके बाद से उनकी आलोचना हो रही है.

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22 दिसंबर 2024 (अपडेटेड: 22 दिसंबर 2024, 02:36 PM IST)
Bihar IAS officer Mihir Kumar Singh Fathers Books
बिहार में पंचायतों की लाइब्रेरी में IAS अधिकारी ने अपने पिता की किताबों को लिस्ट में शामिल कराया (फोटो-इंडिया टुडे)
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बिहार में IAS मिहिर कुमार सिंह (IAS Mihir Kumar Singh) का नाम इस समय सुर्खियों में है. उन्होंने राज्य में पंचायत भवनों या सामुदायिक भवनों में बन रही लाइब्रेरी (Panchayat Libraries) में किताबों की लिस्ट में अपने पिता की पुस्तकों को शामिल कराया. जिसके बाद से वह चर्चा में हैं. कई लोगों ने इस लिस्ट के सामने आने के बाद नाराजगी जताई. वहीं,जदयू ने भी लिस्ट को खारिज करने की मांग की. एमएलसी नीरज कुमार ने आरोप लगाते हुए आईएएस अधिकारी मिहिर कुमार सिंह पर इसे सत्ता का खुला दुरुपयोग बताया.

लाइब्रेरी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएएस मिहिर कुमार सिंह मई 2022 से 25 अक्टूबर 2024 तक पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव थे. उन्होंने बिहार की ग्राम पंचायतों में अपने पिता जगदीश प्रसाद सिंह की लिखीं 36 किताबों की सिफारिश की थी. यहां देखने की बात है कि अधिकारी के पिता से ज्यादा सिर्फ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की ही 47 रचनाएं थीं.

आईएएस के पिता जगदीश प्रसाद सिंह गया यूनिवर्सिटी से रिटायर्ड इंग्लिश के प्रोफेसर थे. इसी साल उनका निधन हुआ था. 2013 में उन्हें "शिक्षा के क्षेत्र में योगदान" के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.

इस साल जून में बिहार पंचायती राज विभाग की अपर सचिव कल्पना कुमारी ने सभी जिलों के पंचायती राज अधिकारियों को जारी एक पत्र में लिस्ट को मंजूरी दी थी. लिस्ट में राज्य भर की 8,053 पंचायतों में लाइब्रेरी के लिए कुल 303 पुस्तकों की सिफारिश शामिल थी. बेशक किताब की लिस्ट का ऑर्डर अपर सचिव ने जारी किया था. लेकिन फाइल को विभाग के हेड यानी मिहिर सिंह ने अप्रूव किया था. इस समय मिहिर पथ निर्माण विभाग के मुख्य सचिव हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, पंचायती राज विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह किताबें अभी तक नहीं खरीदी गई हैं. विभाग के मंत्री ने अभी किताबों की लिस्ट को रिव्यू के लिए कहा है इसलिए इसे रोक दिया गया है.

पुस्तकालय में अपने पिता की किताबों को शामिल करने के मुद्दे पर जनता दल (यूनाइटेड) ने इस लिस्ट को कैंसल करने की मांग की. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने इसे मिहिर कुमार सिंह द्वारा सत्ता का खुला दुरुपयोग बताया. उन्होंने कहा कि इस लिस्ट पर तुरंत काम किया जाना चाहिए.

वहीं, पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा, हम इस मामले की जांच करेंगे और खरीद कमेटी इस लिस्ट पर अच्छे से विचार करेगी और एक्सपर्ट्स की सलाह से इस पर दोबारा काम करेगी. 

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