The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Health
  • why you should never ignore ear pain causes symptoms dos & don'ts treatment

कान के दर्द को हल्के में न लें, मुंह के कैंसर की शुरुआत भी हो सकती है

आज डॉक्टर से समझेंगे कि कान में दर्द किन वजहों से हो सकता है. कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए. कौन-से घरेलू उपाय सेफ हैं, कौन-से नहीं. और कान दर्द का सही इलाज क्या है.

Advertisement
pic
3 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 03:37 PM IST)
why you should never ignore ear pain causes symptoms dos & don'ts treatment
कान में दर्द होना एक आम दिक्कत है
Quick AI Highlights
Click here to view more

कान में दर्द होना एक बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम है. कई बार ये दर्द अपने आप ठीक हो जाता है. लेकिन कभी-कभार बढ़ भी जाता है. जब दर्द बढ़ता है, तो राहत पाने के लिए लोग कई नुस्खे आजमाते हैं. कोई कान में गर्म तेल डालता है. कोई ईयर बड्स से कान साफ करता है, तो कोई ईयर ड्रॉप्स डालता है.

लेकिन क्या ये नुस्खे सच में काम करते हैं, या फिर आपकी दिक्कत को और बढ़ा सकते हैं. यहीं जानेंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि कान में दर्द किन वजहों से हो सकता है. कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए. कौन-से घरेलू उपाय सेफ हैं, कौन-से नहीं. और कान दर्द का सही इलाज क्या है. 

कान में दर्द किन वजहों से हो सकता है?

ये हमें बताया डॉक्टर (मेजर) राजेश भारद्वाज ने. 

doctor rajesh bhardwaj
डॉ.(मेजर) राजेश भारद्वाज, कंसल्टेंट, ईएनटी, मेडफर्स्ट ईएनटी सेंटर

कान के दो हिस्से होते हैं- एक्सटर्नल ईयर (बाहरी हिस्सा) और मिडिल ईयर (बीच वाला हिस्सा). इन दोनों हिस्सों में दिक्कत होने से कान में दर्द हो सकता है. 

कान दर्द का सबसे आम कारण इंफेक्शन है. अगर मिडिल ईयर में इंफेक्शन हो, तो इसे ओटाइटिस मीडिया कहते हैं. अगर एक्सटर्नल ईयर में इंफेक्शन हो, तो इसे ओटाइटिस एक्सटर्ना कहा जाता है. इसमें कान के बाहरी हिस्से में इंफेक्शन हो जाता है. 

कभी-कभी कान में फोड़ा या फुंसी भी हो सकती है. कई बार फंगल इंफेक्शन की वजह से भी कान में दर्द होता है. जब मिडिल ईयर में पस भर जाता है, तो इसे ASOM (एक्यूट सप्यूरेटिव ओटाइटिस मीडिया) कहते हैं. ASOM में पस भरने से ईयरड्रम (कान के पर्दे) पर दबाव पड़ता है, जिससे दर्द होता है. 

कभी-कभी चोट लगने से भी कान में दर्द होता है. अगर कान में फिजिकल ट्रॉमा हो या ईयरड्रम फट जाए (परफोरेशन), तो दर्द हो सकता है. कुछ मामलों में वायरल इंफेक्शन, जैसे हर्पीस ज़ोस्टर, भी कान में तेज़ दर्द कर सकता है. इसमें कान में जलन होती है और सुनने की क्षमता भी कम हो सकती है. 

रेफर्ड ओटाल्जिया की वजह से भी कान में दर्द हो सकता है. रेफर्ड ओटाल्जिया यानी दर्द की वजह कान में नहीं, बल्कि शरीर के किसी और हिस्से में है. जैसे दांत, मसूड़े, जीभ या टॉन्सिल्स. इनमें इंफेक्शन अल्सर या किसी गांठ की वजह से भी कान में दर्द हो सकता है.

doctor meet
अगर कान में दर्द के साथ पस निकले, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है 
कब डॉक्टर को दिखाएं?

अगर कान में दर्द के साथ पस (मवाद) आ रहा है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. दर्द और पस का मतलब है कि अंदर इंफेक्शन और प्रेशर बढ़ रहा है. ये आगे चलकर फोड़ा बना सकता है और दिक्कत बढ़ा सकता है. समय पर इलाज न होने पर कान में कॉम्प्लिकेशंस हो सकती हैं. जैसे चेहरे की नस पर असर (फेशियल नर्व पाल्सी), अंदरूनी कान का इंफेक्शन (लेबिरिंथाइटिस) और सुनने की क्षमता कम होना (सेंसरी न्यूरल डेफनेस). इसलिए, जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है. 

अगर कान के दर्द के साथ चेहरे की मांसपेशियां कमजोर लगें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. ये संकेत हो सकता है कि इंफेक्शन फेशियल नर्व तक पहुंच गया है. अगर सुनाई कम दे, या कान में सांय-सांय की आवाज़ आए, तो भी डॉक्टर से मिलें. अगर साथ में चक्कर या गिरने जैसा लगे, तो देरी न करें. कभी-कभी मुंह में कैंसर होने पर भी कान में दर्द महसूस हो सकता है. ऐसे में जांच ज़रूरी है, ताकि बायोप्सी करके सही कारण पता लगाया जा सके.

ear oil
कान में कभी भी तेल न डालें
कान दर्द होने पर क्या करें और क्या नहीं?

घरेलू उपाय आजमाते समय सावधानी रखें, क्योंकि कई बार गलती से नुकसान भी हो सकता है. पहला, कान में कभी भी तेल न डालें. अक्सर लोग सरसों का तेल गर्म करके कान में डाल देते हैं, जो ख़तरनाक हो सकता है. इससे कान में इंफेक्शन और फंगल इंफेक्शन बढ़ सकता है. अगर कान के पर्दे में पहले से छेद है, तो तेल डालने से दिक्कत और बढ़ सकती है.

दूसरा, कान को खुद साफ करने की कोशिश न करें. अगर कान में कुछ जमा महसूस हो, तो ईयर बड या पिन का इस्तेमाल न करें. इससे कान को नुकसान पहुंच सकता है और बीमारी बढ़ सकती है. ईयर बड ज़्यादा अंदर डालने से कान का पर्दा भी डैमेज हो सकता है. 

तीसरा, हाइड्रोजन परऑक्साइड जैसे लिक्विड कान में न डालें. इससे भी कान में कई तरह की परेशानियां हो सकती है. 

दर्द कम करने के लिए आप पेनकिलर ले सकते हैं. अगर बाहरी कान में इंफेक्शन लगे, तो हल्की गर्म सिकाई से राहत मिल सकती है. अगर कान में कोई कीड़ा चला जाए और फड़फड़ा रहा हो, तब ऐसे में थोड़ा पानी या तेल डाल सकते हैं, जिससे कीड़ा मर जाए.

ear buds
कान में दर्द होने पर ईयर बड्स डालना सेफ नहीं है 
कान में दर्द का इलाज  

अगर कान में इंफेक्शन है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं. जो आमतौर पर कम से कम 5 दिन तक ली जाती हैं. दर्द कम करने के लिए पेन रिलीवर (दर्द की दवा) दी जाती है. 

आजकल कई तरह के ईयर ड्रॉप्स भी मौजूद हैं. दर्द कम करने के लिए पेन रिलीविंग ईयर ड्रॉप्स दिए जाते हैं. इंफेक्शन ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक या एंटीसेप्टिक ईयर ड्रॉप्स दिए जाते हैं. अगर दर्द नसों से जुड़ा हो, तो उसे शांत करने के लिए खास दवाएं दी जाती हैं. जैसे हर्पीस या न्यूरैल्जिक पेन में. 

अगर कोई और कारण हो, तो उसी के हिसाब से इलाज किया जाता है. कभी-कभी इंफेक्शन ज़्यादा बढ़ जाए, तो छोटा ऑपरेशन करना पड़ सकता है. अगर बाहरी कान में फोड़ा बन जाए, तो उसे काटकर मवाद निकाला जाता है. अगर मिडिल ईयर में पस जमा हो जाए, तो मायरिंगोटॉमी (कान के पर्दे में छोटा छेद) और ग्रोमेट्स (ट्यूब) डालकर पस निकाला जाता है. अगर इंफेक्शन बहुत गंभीर हो जाए, जैसे मास्टोइडाइटिस, तो मास्टोइडेक्टॉमी सर्जरी करनी पड़ सकती है. यानी कान में दर्द की वजह के हिसाब से ही उसका इलाज किया जाता है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: कितना बड़ा किडनी स्टोन खुद से निकल जाता है?

Advertisement

Advertisement

()