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दवा लेकर ठीक लेकिन कुछ दिन में फिर बीमार, आपकी दिक्कत ये है

गर्म और नमी वाले मौसम में कुछ बीमारियां ज़्यादा देखने को मिलती हैं. जैसे शरीर में पानी की कमी, तेज़ बुखार, शरीर का तापमान बढ़ना. ऐसे में मरीज़ को तेज़ सिरदर्द, चक्कर, कानों में आवाज़ जैसे लक्षण दिख सकते हैं.

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20 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 03:52 PM IST)
why do you get sick again after feeling better
आपकी भी तबीयत अक्सर ख़राब रहती है?
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कभी पेट खराब हुआ. कभी बुखार आ गया. कभी खांसी आने लगी, तो कभी सिर दर्द से फटने लगा. अगर हर कुछ दिनों में आपकी तबीयत खराब हो जाती है. आप दो-तीन दिन तक बीमार रहते हैं. फिर दवा लेकर ठीक हो जाते हैं. और फिर दोबारा बीमार पड़ जाते हैं. तब समझ लीजिए, पक्का शरीर में कोई ऐसी दिक्कत है. जो पूरी तरह ठीक नहीं हुई है.

आप बार-बार बीमार क्यों पड़ते हैं, चलिए इस सवाल का जवाब पता करते हैं. डॉक्टर से समझेंगे कि किन लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. कौन-से टेस्ट करवाने पड़ सकते हैं. और बार-बार बीमार पड़ने से कैसे बचें. 

बार-बार बीमार पड़ने के पीछे क्या कारण हैं?

ये हमें बताया डॉक्टर मनीष पेंडसे ने. 

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डॉ. मनीष पेंडसे, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, न्यूएरा हॉस्पिटल, नवी मुंबई

अक्सर कई मरीज़ हर 2–3 महीने में बीमार पड़ जाते हैं. उन्हें समझ नहीं आता कि वो बार-बार बीमार क्यों पड़ रहे हैं. बार-बार बीमार पड़ने की वजह खुद का ख्याल न रखना है. कोविड-19 के दौरान हम अपने हाथ बार-बार मुंह या चेहरे के पास नहीं ले जाते थे. बाहर की चीज़ें नहीं खाते थे, भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचते थे. लेकिन अब लोग इन बातों को काफी हद तक नहीं मानते. इसी वजह से वो बार-बार बीमार पड़ते हैं. 

दूसरा बड़ा कारण एक्सरसाइज़ न करना है. वो 12 घंटे-16 घंटे काम तो करते हैं, पर एक्सरसाइज़ नहीं करते. ज्यादातर लोग वीकेंड पर सिर्फ आराम, पार्टी या बाहर खाना खाते हैं. लेकिन वीकेंड में रोज़ 2-2 घंटे अपने शरीर को देना ज़रूरी है. इन छोटी-छोटी आदतों में सुधार करके बार-बार होने वाले इन्फेक्शन और बीमारियों से बचा जा सकता है.

किन लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें?

गर्म और नमी वाले मौसम में कुछ बीमारियां ज़्यादा देखने को मिलती हैं. जैसे शरीर में पानी की कमी, तेज़ बुखार, शरीर का तापमान बढ़ना. ऐसे में मरीज़ को तेज़ सिरदर्द, चक्कर, कानों में आवाज़ जैसे लक्षण दिख सकते हैं. 

गर्मी में खाना जल्दी खराब हो सकता है, जिससे पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. जैसे पेट में गुड़गुड़ होना, पेटदर्द होना, दस्त लगना, उल्टी जैसा महसूस होना. ऐसे लक्षणों के साथ कई मरीज़ आते हैं, इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना है. यही दिक्कतें आगे चलकर गंभीर हो सकती हैं. आपको भर्ती होने की ज़रूरत भी पड़ सकती है. इसलिए चक्कर, मुंह सूखने, कानों में आवाज़, उल्टी, पैरों में ऐंठन और पेटदर्द जैसे लक्षणों को इग्नोर न करें.

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हॉस्पिटल में डॉक्टर सबसे पहले आपका ब्लड प्रेशर चेक करेंगे 
क्या कोई खास टेस्ट करवाना चाहिए?

- ऐसा कोई एक खास टेस्ट नहीं है जो हर किसी के लिए ज़रूरी हो.

- जब आप डॉक्टर के पास जाएंगे, तो सबसे पहले वो आपकी पल्स और ब्लड प्रेशर चेक करेंगे.

- गर्मी और डिहाइड्रेशन की वजह से कई बार ब्लड प्रेशर लो हो सकता है.

- इसके बाद, ज़रूरत के हिसाब से ही डॉक्टर आगे के टेस्ट बताते हैं.

- जैसे ब्लड टेस्ट, पेट की सोनोग्राफी, स्टूल टेस्ट, छाती का एक्सरे वगैरा.

बार-बार बीमार पड़ने से कैसे बचें?

अगर बार-बार बीमार नहीं पड़ना, तो कुछ बातों का ध्यान रखें. अपने घर और काम की जगह को हमेशा साफ रखें. गंदे हाथों से अपना चेहरा न छुएं. बार-बार हाथ धुलते रहें. सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें. बाहर का खाना अवॉइड करें. अगर बाहर खा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि वहां गंदगी न हो. जब बच्चे धूल-मिट्टी में खेलकर आएं, तो ज़रूर नहाएं. 

हफ्ते में कम से कम 4 घंटा एक्सरसाइज़ करें. दो-तीन दिन कार्डियो एक्सरसाइज़ करें, बाकी 2-3 दिन वेट ट्रेनिंग करें. कई महिलाएं वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज़ करने से बचती हैं, ऐसा न करें. वेट ट्रेनिंग से हमारी इम्यूनिटी मज़बूत होती है. इसलिए वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज़ ज़रूर करें. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: पेशाब में खून किसी बीमारी की वजह से आता है?

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