दिन से भी ख़तरनाक हो सकती है रात की गर्मी, जानें कैसे बचना है
रात की लू आमतौर पर बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों, प्रेग्नेंट महिलाओं और डायबिटीज़, दिल की बीमारियों, फेफड़ों और किडनी के मरीज़ों के लिए ख़तरनाक हो सकती है.

गर्मी के मारे लोगों का बुरा हाल है. ऐसा लग रहा है, जैसे आसमान से आग बरस रही हो. कई राज्यों में तापमान 48 डिग्री के पार पहुंच चुका है. गूगल पर मौसम सर्च करो, तो कई जगहों पर Excessive Heat यानी भयंकर गर्मी की चेतावनी दिख रही है. और परेशानी सिर्फ दिन की गर्मी तक सीमित नहीं है. रातें भी लगातार गर्म बनी हुई हैं.
रात का तापमान दिन से थोड़ा कम ज़रूर होता है, पर राहत फिर भी नहीं मिल रही. इसलिए, जितना ज़रूरी दिन में खुद को लू से बचाना है. उतना ही ज़रूरी रात की गर्मी से बचना भी है. क्योंकि कई बार रात की गर्मी, दिन की लू से भी ज़्यादा ख़तरनाक हो सकती है. लेकिन ऐसा क्यों होता है? यही समझेंगे आज. डॉक्टर से जानेंगे कि रात की लू लगने पर क्या दिक्कतें हो सकती हैं, किन लोगों को ज्यादा ख़तरा है और इससे बचाव कैसे करें.
रात की लू ज़्यादा ख़तरनाक क्यों?हमें बताया डॉक्टर सौरदीप चौधरी ने.

आमतौर पर लू दिन में चलती है. लू यानी बहुत गर्म और सूखी हवा चलना. लेकिन कई शहरों में रात का तापमान बहुत ज़्यादा हो जाता है. इससे शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता. इसे ही रात की लू या नाइट टाइम हीट स्ट्रेस कहते हैं. दिनभर गर्मी झेलने के बाद शरीर रात में रिकवर करता है. आमतौर पर रात में तापमान कम होता है. जिससे हार्ट रेट और शरीर की गर्मी कम होने लगती है. लेकिन अगर रात में भी गर्मी और उमस बनी रहे. हवा कम चले और कमरा गर्मी रोककर रखने लगे. तब शरीर लगातार हीट स्ट्रेस में बना रहता है. इसी वजह से रात की लू कई बार दिन की लू से भी ज़्यादा ख़तरनाक हो सकती है.
रात की लू लगने पर क्या दिक्कतें हो सकती हैं?- रात की लू आमतौर पर बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों, प्रेग्नेंट महिलाओं और डायबिटीज़, दिल की बीमारियों, फेफड़ों और किडनी के मरीज़ों के लिए ख़तरनाक हो सकती है
- जो लोग बिना AC या कम वेंटिलेशन वाले छोटे कमरों में रहते हैं, उनमें इसका ख़तरा बढ़ जाता है.
- रात की लू लगने पर शुरू में कमज़ोरी लगती है.
- ज़्यादा प्यास लगने लगती है.
- सिरदर्द और चक्कर आने लगते हैं.
- बेचैनी होती है, पसीना आता है.
- मांसपेशियों में ऐंठन होने लगती है.
- कुछ लोगों को घुटन या सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है.
- स्थिति गंभीर होने पर डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, भ्रम, बेहोशी और हीट एग्ज़ॉशन जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं.
रात की लू से बचाव और इलाज- खुद को हाइड्रेटेड रखें.
- दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें.
- सादा पानी के साथ ORS भी ले सकते हैं.
- रात में लोग अक्सर पानी कम पीते हैं.
- इसलिए सोने से कुछ देर पहले तक पानी ज़रूर पिएं.
- कमरे में जितना हो सके वेंटिलेशन बनाए रखें.
- AC, कूलर या पंखे का इस्तेमाल करें.
- अगर AC नहीं है, तो क्रॉस वेंटिलेशन का ध्यान ज़रूर रखें.
- जैसे खिड़की और दरवाजा खुला रखकर हवा आने-जाने का रास्ता बनाएं.
- गीला कपड़ा लगाने या ठंडे पानी से नहाने पर शरीर का तापमान जल्दी कम करने में मदद मिल सकती हैं.
- रात में हैवी एक्सरसाइज़ या बेवजह बाहर जाने से बचें.
- घर के बुज़ुर्गों का खास ध्यान रखें, क्योंकि उनमें लक्षण कई बार धीरे-धीरे दिखाई देते हैं.
- अगर किसी को भ्रम हो, बहुत ज़्यादा कमजोरी लगे या बेहोशी छाए, तो तुरंत अस्पताल लेकर जाएं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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