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RO का पानी पीने वालों को भी क्यों हो रहा टायफॉइड?

टायफॉइड एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है. ये साल्मोनेला टाइफी नाम के बैक्टीरिया से होता है. ये बैक्टीरिया मुंह के रास्ते शरीर में जाता है.

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why are typhoid cases rising in India even with RO water
RO का पानी पीकर ख़ुद को सेफ़ न समझें
13 जनवरी 2026 (Published: 02:59 PM IST)
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देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार टायफॉइड में मामले बढ़ रहे हैं. इंदौर, गांधीनगर, हैदराबाद, बेंगलुरु और ग्रेटर नोएडा. इन सभी जगहों पर दूषित पानी पीने से लोग बीमार पड़े हैं. डायरिया और टायफॉयड से जूझ रहे हैं.

चौंकाने वाली बात ये है कि ऐसा केवल नल का पानी पीने से नहीं हो रहा. साफ़ माने जाने वाले RO का पानी पीने से भी हो रहा है.  तो ऐसा क्यों हो रहा है, ये हमने पूछा फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट में सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर सुरक्षित टी.के. से.

dr surakshith tk
डॉ. सुरक्षित टी.के., सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला

डॉक्टर सुरक्षित बताते हैं कि टायफॉइड एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है. ये साल्मोनेला टाइफी नाम के बैक्टीरिया से होता है. ये बैक्टीरिया मुंह के रास्ते शरीर में जाता है. ये पहले आंतों तक पहुंचता है. फिर आंतों की दीवार को पार करके खून में फैल जाता है.

टायफॉइड के लक्षण

- लगातार तेज़ बुखार 

- सिरदर्द 

- कमज़ोरी और थकान 

- पेट में दर्द 

- भूख न लगना

- दस्त या कब्ज़ होना

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साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया की वजह से होता है टायफॉइड (फोटो: Freepik)
टायफॉइड करने वाला बैक्टीरिया कैसे फैलता है?

साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया दूषित पानी और दूषित खाने से फैलता है. जब कोई व्यक्ति गंदा पानी पीता है. यानी ऐसा पानी जिसमें सीवर का पानी मिला हुआ हो या कोई दूसरी गंदगी मिली हो. इससे पानी में बैक्टीरिया पैदा होते हैं. ये आसानी से इंसान के शरीर में पहुंचकर उसे बीमार बना देते है.

RO का पानी पीने वालों को भी क्यों हो रहा टायफॉइड?

जहां तक RO के पानी की बात है, तो इसे फूलप्रूफ नहीं मान सकते. अगर आप अपने RO की सर्विसिंग समय-समय पर नहीं करवाते या ख़राब हो चुके पार्ट्स की जांच नहीं करवाते. उन्हें बदलवाते नहीं हैं, तो आपका RO अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाता. नतीजा? आपका पानी उतना साफ़ है नहीं, जितना आप उसे समझ रहे हैं.

इसके अलावा, अगर आप बाहर से खाना मंगाकर खाते हैं. रेस्टोरेंट का खाना या स्ट्रीट फूड खूब खाते हैं, तो भी इन्फेक्शन होने का रिस्क ज़्यादा है. अगर खाने में इस्तेमाल होने वाली सब्ज़ियों को अच्छे से धोया नहीं गया है, ख़ासकर पत्तेदार सब्ज़ियों को, तो उनमें साल्मोनेला टाइफी हो सकता है. जिससे टायफॉइड हो सकता है. इसी तरह, अगर फलों को बिना धोए खाया जाए या दूषित पानी से धोया जाए तो बैक्टीरिया शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं.

pani puri
अगर गोलगप्पे का पानी गंदा हुआ, तो उसमें भी साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया हो सकता है 

सड़क किनारे मिलने वाली चाट अगर साफ़ पानी और साफ हाथों से न बनाई जाए, तो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया सीधे खाने में जा सकते हैं. गंदे हाथों से खाना खाना या बनाना टायफॉइड फैलने का बड़ा कारण है.

कई लोग पैकेट वाली बर्फ खरीदते हैं. इस बर्फ को किस पानी से तैयार किया गया है. ये आपको नहीं मालूम होता. दूषित पानी से जमाई गई बर्फ़ से भी टायफॉइड हो सकता है. यानी ज़रूरी नहीं, साफ दिखने वाली हर चीज़ साफ ही हो. 

टायफॉइड से कैसे बचें?

बाहर का खाना अवॉयड करिए. जो खाने का मन है, घर पर बनाइए. वो हेल्दी भी होगा और उससे बीमार पड़ने का रिस्क भी कम होगा. अगर बाहर का खाना खाने का बहुत मन है, तो कच्चा खाना अवॉइड करिए. खाने से पहले अपने हाथ धोइए. RO का फ़िल्टर भी समय-समय पर बदलते रहिए.

एक ज़रूरी बात. अगर टायफॉइड के लक्षण हैं, तो खुद से दवा न लीजिए. तुरंत डॉक्टर के पास जाइए. जो दवा डॉक्टर दें, वही लीजिए. दवाइयों का कोर्स पूरा ज़रूर करिए. साथ ही, खूब आराम करिए. ढेर सारा लिक्विड पीजिए. आप टायफॉइड की वैक्सीन भी लगवा सकते हैं.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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