डायबिटीज़ के मरीज़ को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो क्या होगा?
कई लोग ऐसे हैं. जिन्हें डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर, दोनों की ही दिक्कत है. देखिए, जब किसी को डायबिटीज़ होता है, तो हाई बीपी का रिस्क भी बढ़ जाता है. और, जिन लोगों को हाई बीपी की दिक्कत होती है, उनमें डायबिटीज़ का रिस्क होता है. ऐसा क्यों? ये डॉक्टर से जानेंगे.
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डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर. ये दोनों ही बीमारियां हमारे देश में बहुत आम हैं. यहां तक कि भारत को डायबिटीज़ कैपिटल ऑफ़ द वर्ल्ड कहा जाता है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 तक, हमारे देश में 10 करोड़ से ज़्यादा डायबिटीज़ के मरीज़ थे. ये नंबर हर साल बढ़ रहा है. वहीं WHO के मुताबिक, करीब 22 करोड़ से ज़्यादा लोगों को हाई बीपी है. ये आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है.
अब कई लोग ऐसे हैं. जिन्हें डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर, दोनों की ही दिक्कत है. देखिए, जब किसी को डायबिटीज़ होता है, तो हाई बीपी का रिस्क भी बढ़ जाता है. और, जिन लोगों को हाई बीपी की दिक्कत होती है, उनमें डायबिटीज़ का रिस्क होता है. ऐसा क्यों? ये डॉक्टर से जानेंगे. समझेंगे कि डायबिटीज़ के मरीज़ों को ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखना क्यों ज़रूरी है, क्यों डायबिटीज़ की वजह से ब्लड प्रेशर की दिक्कत होती है, अगर डायबिटीज़ के मरीज़ का बीपी हाई रहे तो क्या नुकसान पहुंचता है, और सबसे ज़रूरी, डायबिटीज़ के मरीज़ ब्लड प्रेशर कैसे कंट्रोल करें.
डायबिटीज़ वालों के लिए ब्लड प्रेशर कंट्रोल करना क्यों ज़रूरी?ये हमें बताया डॉक्टर राजीव कोविल ने.
भारत में लगभग 12% लोगों को डायबिटीज़ है. वहीं करीब 40% लोगों को ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं हैं. यानी भारत में ब्लड प्रेशर के मरीज़ डायबिटीज़ से ज़्यादा हैं. ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ के रिस्क फैक्टर्स काफी मिलते-जुलते हैं. जैसे मोटापा, गलत खान-पान, आनुवंशिकी और एक्सरसाइज़ की कमी. करीब 80%-90% डायबिटीज़ के मरीज़ों को ब्लड प्रेशर की समस्या होती है. वहीं करीब 50% ब्लड प्रेशर के मरीज़ों को डायबिटीज़ होता है. यानी डायबिटीज़ और ब्लड प्रेशर एक ही मरीज़ में अक्सर साथ-साथ होते हैं.
डायबिटीज़ की वजह से ब्लड प्रेशर की दिक्कत क्यों होती है?हमारा दिल जिस प्रेशर से खून को शरीर के अलग-अलग अंगों में भेजता है, उसे ब्लड प्रेशर कहते हैं. इसी प्रेशर से किडनी, दिल, लिवर और दिमाग जैसे ज़रूरी अंगों को खून की सप्लाई होती है. खून में काफी सारे सेल्स होते हैं, जैसे रेड ब्लड सेल्स और वाइट ब्लड सेल्स. खून में शक्कर यानी ग्लूकोज़ भी होता है. अब अगर खून में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ जाए तो वो खून में मौजूद सेल्स के साथ जमने लगती है. इससे खून थोड़ा-सा स्टिकी (चिपचिपा) हो जाता है. इस तरह का खून नलियों में फंस सकता है. जिसकी वजह से दिल को ज़्यादा प्रेशर लगाना पड़ता है. ताकि खून को शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जा सके. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है.
जैसे दही और छाछ में फर्क होता है. दही थोड़ा गाढ़ा होता है और छाछ पतली होती है. वैसा ही फर्क डायबिटिक और नॉन-डायबिटिक लोगों के खून में होता है. डायबिटीज़ के मरीज़ों के खून में गाढ़ापन और चिपचिपाहट बढ़ जाती है. इस वजह से डायबिटीज़ के काफी मरीज़ों को ब्लड प्रेशर की दिक्कत होती है.
डायबिटीज़ और ब्लड प्रेशर एक साथ होने पर कॉम्प्लिकेशन का चांस बढ़ जाता है. इससे हार्ट अटैक आ सकता है. हार्ट फेलियर हो सकता है. दिमाग में खून का बहाव कम होने से स्ट्रोक हो सकता है. किडनी से जुड़ी दिक्कतें होती हैं. क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ हो सकती है. डायबिटीज़ और ब्लड प्रेशर से जुड़े ये चार सबसे आम कॉम्प्लिकेशन होते हैं.
डायबिटीज़ के मरीज़ ब्लड प्रेशर कैसे कंट्रोल में रखें?ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ का इलाज काफी हद तक एक जैसा ही है. आपकी डाइट अच्छी होनी चाहिए. नमक सीमित मात्रा में लेना चाहिए. डाइट में ज़्यादा फाइबर और नेचुरल फूड्स होने चाहिए. जैसे हरी सब्ज़ियां और फल. साथ ही, रेड मीट और दूसरी नॉन-वेजटेरियन चीज़ें कम खाएं. रोज़ ब्लड प्रेशर की दवाइयां लें. डॉक्टर से नियमित चेकअप कराते रहें. रेगुलर ब्लड टेस्ट कराएं ताकि ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ से जुड़े कॉम्प्लिकेशंस का पता चल सके. डॉक्टर तय करता है कि दवाइयां कब और कैसे देनी हैं.
अगर ऊपर वाला ब्लड प्रेशर (सिस्टॉलिक ब्लड प्रेशर) 140 से ज़्यादा है और नीचे वाला ब्लड प्रेशर (डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर) 90 से ऊपर है , तो ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है. ब्लड प्रेशर का इलाज काफी चीज़ों पर निर्भर करता है. जैसे बीमारी की वजह क्या है और उससे कैसे बचना है. पल्स रेट क्या है. रिस्क फैक्टर्स क्या हैं, जैसे कहीं हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर का चांस तो नहीं हैं. ये सारी चीज़ें देखकर ब्लड प्रेशर की दवाई तय की जाती है. ब्लड प्रेशर कम करने के लिए सख्त डाइट प्लान, नियमित एक्सरसाइज़ और समय-समय पर चेकअप बेहद जरूरी है. अगर ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ दोनों हों, तो हर 3 महीने में डॉक्टर से जांच करवाएं. ब्लड प्रेशर भी डायबिटीज़ जितना ही खतरनाक कॉम्प्लिकेशन हो सकता है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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