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अचानक बढ़ी गर्मी शरीर का क्या हाल करती है? धूप में निकलने से पहले जान लीजिए

अचानक बढ़ी ये गर्मी शरीर के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है. क्यों, ये जानेंगे डॉक्टर साहब से. ये भी समझेंगे कि कौन लोग इस बढ़ी हुई गर्मी के ज़्यादा जोखिम में हैं. और अचानक तापमान बढ़ने पर आप खुद को कैसे सेफ़ रख सकते हैं.

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21 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 09:00 PM IST)
What effects does a sudden rise in temperature have on the body
तेज़ धूप के साथ गर्म हवाएं चलने लगी हैं
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पिछले कुछ वक्त से मौसम काफी बदल गया है. अभी कुछ दिनों पहले सुहाना मौसम था. ठंडी हवाएं चल रही थीं. बारिश भी हो रही थी. अब तेज़ धूप निकलने से गर्मी बढ़ गई है. मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जल्दी ही देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में हीटवेव यानी लू चलने जैसी स्थिति बन सकती है. नागपुर, भोपाल, अमरावती और भुवनेश्वर जैसे शहरों में तापमान 42 से 45 डिग्री तक पहुंच सकता है.

अचानक बढ़ी ये गर्मी शरीर के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है. क्यों, ये जानेंगे डॉक्टर साहब से. ये भी समझेंगे कि कौन लोग इस बढ़ी हुई गर्मी के ज़्यादा जोखिम में हैं. और अचानक तापमान बढ़ने पर आप खुद को कैसे सेफ़ रख सकते हैं.

अचानक गर्मी बढ़ने का शरीर पर क्या असर पड़ता है?

ये हमें बताया डॉक्टर चारु गोयल सचदेवा ने. 

dr charu goyal sachdeva
डॉ. चारु गोयल सचदेवा, चेयरमैन एंड कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, मणिपाल हॉस्पिटल्स, द्वारका, नई दिल्ली

गर्मियां बढ़ती जा रही हैं. अचानक गर्मी बढ़ने से शरीर को खुद को ढालने का समय नहीं मिल पाता. ऐसे में पसीना ज़्यादा आने लगता है. इससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स (मिनरल्स) कम हो जाते हैं. जिससे व्यक्ति का शरीर डिहाइड्रेटेड हो जाता है. उसे थकावट महसूस होती है. चक्कर आ सकते हैं. उबकाई और उल्टी आ सकती है. 

गर्मी की वजह से हीट क्रैम्प्स हो सकते हैं. इसमें मांसपेशियों, खासकर पैरों में दर्द होता है. हीट एग्ज़ॉशन हो सकता है. इसमें थकावट होती है. उल्टियां आ सकती हैं. चक्कर आ सकते हैं. यहां तक कि हीट स्ट्रोक भी पड़ सकता है. इसमें शरीर का तापमान 40 डिग्री से ज़्यादा चला जाता है. हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना ज़रूरी होता है.

अचानक गर्मी बढ़ने से किन्हें ज़्यादा ख़तरा?

अचानक गर्मी बढ़ने से बुज़ुर्गों को सबसे ज़्यादा दिक्कत हो सकती है. छोटे बच्चे या जो लोग बाहर धूप में काम करते हैं, उन्हें ज़्यादा ख़तरा रहता है. प्रेग्नेंट महिलाओं, डायिबिटीज़ और किडनी के मरीज़ों को भी रिस्क ज़्यादा है. जो लोग डाययुरेटिक दवाइयां ले रहे हैं, उनमें डिहाइड्रेशन होने का ख़तरा ज़्यादा होता है. ऐसे सभी लोग अपना खास ख़्याल रखें.

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गर्मियों में हाइड्रेटेड रहना बहुत ज़रूरी है 
अचानक तापमान बढ़ने पर खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

- दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें.

- खुद को हाइड्रेटेड रखें, खूब पानी पिएं.

- आप नारियल पानी और ORS भी पीते रहें.

- अगर बाहर जाना पड़े, तो छाता या टोपी लगाकर जाएं.

- ज़्यादा से ज़्यादा छांव में रहें.

- घर के अंदर भी ठंडी जगह पर रहें और पानी पीते रहें.

- इस दौरान कुछ दवाइयों को एडजस्ट करने की ज़रूरत पड़ सकती है.

बहुत ज़रूरी है कि आप इन सभी बातों का ध्यान रखें ताकि बीमारियों से जूझना न पड़ें. याद रखें, बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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