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महीने में दो बार पीरियड्स आ सकते हैं, वजह और बचाव जरूर जानें

महीने में दो बार पीरियड्स आने से शरीर में कमज़ोरी महसूस हो सकती है. बार-बार ब्लीडिंग होने से खून की कमी हो सकती है. रोज़ के काम ठीक से नहीं कर पाते, इससे प्रोडक्टिविटी घटती है.

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7 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 7 अप्रैल 2026, 04:47 PM IST)
Two Periods in one Month possible causes & ways to prevent & treat it
आमतौर पर पीरियड्स महीने में एक बार ही आते हैं.
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एक सवाल है. खास हमारी फीमेल रीडर्स के लिए. आपको महीने में कितनी बार पीरियड्स आते हैं? हो सकता है, आप कहें- ये कैसा सवाल है, एक ही बार आते हैं और उतना ही काफी है. अगर आपको PCOD है, तो शायद आपका जवाब हो कि 2-3 महीने में एक बार पीरियड्स आते हैं. पर आपको पता है, कई महिलाओं को एक ही महीने में दो बार पीरियड्स आते हैं. यानी 30 दिनों में से 10-12 दिन उनके पीरियड्स ही चल रहे होते हैं.

सोचिए, जब महीने में एक बार पीरियड्स आते हैं, तब कितना दर्द, कितनी दिक्कतें होती हैं. तो जिनके दो-दो बार आते हैं, उन्हें कितनी परेशानी होती होगी. ये समस्या बहुत आम नहीं है. इसलिए इस पर ज़्यादा बात भी नहीं होती. लेकिन हम करेंगे. आज World Health Day पर डॉक्टर से जानेंगे कि महीने में दो बार पीरियड्स आने की क्या वजहें हो सकती हैं. इसका शरीर पर क्या असर पड़ता है. इससे बचाव व इलाज कैसे किया जाए.

महीने में दो बार पीरियड्स आने की वजहें

हमें बताईं डॉक्टर साक्षी गोयल ने. 

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डॉ. साक्षी गोयल, सीनियर कसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, दिल्ली

महीने में दो बार पीरियड्स आना कुछ लोगों के लिए नॉर्मल हो सकता है. आमतौर पर पीरियड्स 21 से 35 दिनों के बीच आते हैं. इसलिए जिनका साइकिल छोटा होता है, उन्हें एक महीने में दो बार पीरियड्स आ सकते हैं. 

इसे असामान्य तब माना जाता है, जब आपके पीरियड्स के पैटर्न में बदलाव दिखे. जैसे पहले पीरियड्स 28 दिन में आते थे, लेकिन अब पहले आने लगे हैं. पीरियड्स के दौरान खून का फ्लो या दर्द पहले से ज़्यादा हो गया हो. इसकी वजह से आपके रोज़मर्रा के काम प्रभावित हो रहे हों. महीने में दो बार पीरियड्स आने के कई कारण हो सकते हैं. जैसे लाइफस्टाइल में बदलाव या डेली रूटीन बदल जाना. काम का ज्यादा स्ट्रेस, नींद के पैटर्न में बदलाव या हॉर्मोनल असंतुलन.

कुछ मामलों में फाइब्रॉयड्स या पॉलिप्स (टिशू की गांठें) की वजह से भी ऐसा हो सकता है. ओवरी में सिस्ट (गांठ) होने पर भी पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं. अगर पीरियड्स रोज़ के कामों में दिक्कत पैदा कर रहे हैं या बार-बार हैवी ब्लीडिंग हो रही है. तब आपको गायनेकोलॉजिस्ट को ज़रूर दिखाना चाहिए. ऐसे लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए.

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महीने में दो बार पीरियड्स आने से शरीर कमज़ोर हो जाता है 
महीने में दो बार पीरियड्स आने का शरीर पर असर

महीने में दो बार पीरियड्स आने से शरीर में कमज़ोरी महसूस हो सकती है. बार-बार ब्लीडिंग होने से खून की कमी हो सकती है. रोज़ के काम ठीक से नहीं कर पाते, इससे प्रोडक्टिविटी घटती है. काम पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है. कई बार अपना काम भी ठीक से नहीं हो पाता.

बचाव और इलाज

सबसे पहले लाइफस्टाइल सुधारनी होगी. संतुलित और सही डाइट लें. आयरन से भरपूर चीज़ें खाएं. जैसे खजूर, अंजीर, अनार, किशमिश, चुकंदर, पालक और साग. गुड़ और चना भी ले सकते हैं, इससे खून की कमी से बचाव होता है. मैदा, प्रोसेस्ड और तला-भुना खाना ज़्यादा मात्रा में लेने से बचें. एक्सरसाइज़ ज़रूर करें ताकि शरीर में अच्छे हॉर्मोन्स का प्रोडक्शन बढ़े. साथ ही, डॉक्टर को दिखाकर असली कारण जानना बहुत ज़रूरी है. जिससे फाइब्रॉयड, पॉलिप या सिस्ट जैसी समस्या का समय पर इलाज हो सके.

अगर आपको पीरियड्स से जुड़ी कोई दिक्कत है, फिर चाहे वो उनके जल्दी आने की हो या देर से आने की. हैवी ब्लीडिंग की हो या हल्की ब्लीडिंग की. तो इसे इग्नोर न करें. एक बार डॉक्टर को दिखा लें, ताकि पता चल सके कि कहीं कोई दिक्कत तो नहीं है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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