थायरॉइड में कैंसर क्यों हो जाता है? शुरुआती संकेत जान लीजिए
WHO के ग्लोबोकैन डेटाबेस के मुताबिक, साल 2022 में हमारे देश में थायरॉइड कैंसर के साढ़े 21 हज़ार से ज़्यादा नए मामले आए थे. साढ़े 5 हज़ार के करीब मौतें भी हुई थीं. इसके बावजूद लोगों को थायरॉइड कैंसर के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है. इसके आम लक्षण भी उन्हें नहीं पता हैं.

आज है वर्ल्ड थायरॉइड डे. थायरॉइड हमारे गले में मौजूद एक ग्रंथि है. ये तितली के आकार की होती है. थायरॉइड ग्रंथि का काम है, टी3 और टी4 हॉर्मोन बनाना. दोनों हॉर्मोन्स शरीर के मेटाबॉलिज़्म को दुरुस्त रखते हैं. ये दिल, हड्डियों, मांसपेशियों और रिप्रोडक्टिव अंगों के सही से काम करने के लिए भी ज़रूरी है. अब इसी थायरॉइड ग्रंथि में कई बार कैंसर हो जाता है.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO के ग्लोबोकैन डेटाबेस के मुताबिक, साल 2022 में हमारे देश में थायरॉइड कैंसर के साढ़े 21 हज़ार से ज़्यादा नए मामले आए थे. साढ़े 5 हज़ार के करीब मौतें भी हुई थीं. पर इसके बावजूद लोगों को थायरॉइड कैंसर के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है. इसके आम लक्षण भी उन्हें नहीं पता हैं.
थायरॉइड कैंसर क्यों होता है? किन लोगों में इसका ज़्यादा रिस्क है? इसके लक्षण क्या हैं? थायरॉइड कैंसर का इलाज कैसे होता है, और क्या इससे बचा जा सकता है? ये सब हमने पूछा, अपोलो एथेना वीमेन कैंसर सेंटर में हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के लीड, डॉ. अनिक के.डि’क्रूज़ से.

डॉक्टर अनिल कहते हैं कि ज़्यादातर मरीज़ों में थायरॉइड कैंसर का कोई एक तय कारण नहीं मिलता. हालांकि इसके कुछ रिस्क फैक्टर्स ज़रूर हैं. जैसे अगर परिवार में किसी को थायरॉइड कैंसर रहा हो. बचपन में गर्दन पर रेडिएशन लिया हो. या थायरॉइड से जुड़ी कुछ पुरानी समस्याएं हों, तो इसका ख़तरा बढ़ सकता है. महिलाओं में थायरॉइड कैंसर ज़्यादा देखा जाता है. पुरुषों की तुलना में करीब 3-4 गुना अधिक. ये ज़्यादातर 18 से 45 साल की महिलाओं को होता है. माना जाता है कि इसकी वजह शरीर में होने वाले हॉर्मोनल बदलाव हैं. पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज़ और एस्ट्रोजन हॉर्मोन में बदलाव का असर थायरॉइड ग्रंथि पर पड़ सकता है. हालांकि ये कारण सीधे तौर पर थायरॉइड कैंसर की वजह नहीं बनते. लेकिन ये स्थितियां पहले से मौजूद थायरॉइड की समस्या सामने ला सकती हैं.
थायरॉइड कैंसर के लक्षणथायरॉयड कैंसर शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं देता. कई बार इसका पता अचानक अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन या MRI के दौरान चलता है, जो किसी दूसरी वजह से कराया जाता है. थायरॉइड कैंसर होने पर मरीज़ को गले के बीच या निचले हिस्से में छोटी गांठ या सूजन महसूस हो सकती है. फिर जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है. कई और लक्षण भी दिखने लगते हैं. जैसे आवाज़ बैठना. आवाज़ में हल्का बदलाव. निगलने में दिक्कत. सांस लेने में परेशानी. और गर्दन के साइड में सूजन.
महिलाएं अक्सर थायरॉइड कैंसर के शुरुआती लक्षण इग्नोर कर देती हैं. वो इसे थायरॉइड की नॉर्मल दिक्कत या हॉर्मोनल बदलाव समझ लेती हैं. अब क्योंकि थायरॉइड कैंसर के शुरुआती स्टेज में कोई दर्द नहीं होता, इसलिए मरीज़ लंबे वक्त तक जांच नहीं कराते और कैंसर बढ़ता जाता है. इसलिए अगर गले में कोई गांठ लगातार बनी रहे या आवाज़ में बदलाव ठीक न हो, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें.

अगर जांच में थायरॉइड कैंसर निकलता है. तो आमतौर पर सर्जरी की जाती है. हर मरीज़ में पूरी थायरॉइड ग्रंथि निकालना ज़रूरी नहीं होता. अगर कैंसर छोटा है, एक ही तरफ है, और मरीज़ की उम्र कम है, तो सिर्फ आधी ग्रंथि हटाई जा सकती है. लेकिन अगर कैंसर दोनों तरफ फैल गया है. लिम्फ नोड्स या आसपास के टिशूज़ तक पहुंच गया है. या बायोप्सी में कैंसर का आक्रामक प्रकार दिखे. तो पूरी थायरॉइड ग्रंथि निकालनी पड़ सकती है. अगर थायरॉइड कैंसर एडवांस स्टेज में है, और सर्जरी मुमकिन नहीं है. तब वहां टारगेटेड थेरेपी दी जाती है. कभी-कभार रेडियोथेरेपी भी देनी पड़ सकती है.
देखिए, थायरॉइड कैंसर को पूरी तरह रोकने का कोई खास तरीका नहीं है. अगर घर में कैंसर की हिस्ट्री हो, तो समय-समय पर जांच कराएं. और थायरॉइड ग्रंथि से जुड़ी कोई भी दिक्कत होने पर डॉक्टर से मिलें. अगर ये कैंसर शुरुआती स्टेज में ही पकड़ लिया जाए, तो 95 से 99 फीसदी मरीज़ पूरी तरह ठीक हो सकते हैं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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