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राजस्थान के 'मिनी स्विट्ज़रलैंड' को देखकर धोखा न खाएं, कैंसर दे सकता है

किशनगढ़ डंपिंग यार्ड में मार्बल स्लरी को डंप किया जाता है. ये मार्बल की बहुत बारीक धूल और पानी का मिक्सचर है जो सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह है.

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This ‘Mini Switzerland’ in Rajasthan Is Toxic Marble Waste Here’s the Real Risk
हर इंस्टा-फ्रेंडली चीज़ हेल्थ-फ्रेंडली नहीं होती (फोटो: Adobe Stock)
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अदिति अग्निहोत्री
17 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 11:24 PM IST)
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ये तस्वीर देखिए… 

kishangarh dumping yard
इसे सोशल मीडिया पर ‘मिनी स्विट्ज़रलैंड’ कहा जा रहा है (फोटो: Adobe Stock)

लग रहा है, जैसे बर्फ गिरी हो. इस जगह को लोग ‘मिनी स्विट्ज़रलैंड’ कह रहे हैं. यहां वो सेल्फी ले रहे हैं. पिकनिक मना रहे हैं. फोटोशूट करा रहे हैं. रील्स बना रहे हैं. लेकिन ये जो बर्फ जैसा दिख रहा है. वो असल में बर्फ नहीं, बल्कि कचरा है. मार्बल का कचरा. मार्बल यानी संगमरमर.

ये जगह है किशनगढ़ डंपिंग यार्ड. ये राजस्थान के अजमेर ज़िले में है. इसे मूनलैंड ऑफ राजस्थान भी कहा जाता है. पर हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती. ये बर्फ जैसी दिखने वाली चीज़ असल में मार्बल स्लरी है.

kishangarh snow dump
ये बर्फ नहीं, मार्बल से निकलने वाला कचरा है (फोटो: Adobe Stock)

जब मार्बल को काटा और पॉलिश किया जाता है. तब उससे एक तरह का कचरा निकलता है. इसे मार्बल स्लरी कहते हैं. ये मार्बल की बहुत बारीक धूल और पानी का मिक्सचर होता है. जब ये स्लरी सूख जाती है, तो सफेद पाउडर जैसे ढेर में बदल जाती है. जो दूर से देखने पर बिल्कुल बर्फ जैसी लगती है. लेकिन इस मार्बल स्लरी में ‘रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका’ हो सकती है. जो सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह है. 

रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजे़शन की International Agency For Research On Cancer ने ग्रुप 1 कार्सिनोजेन माना है. यानी पक्के सबूत हैं कि ये इंसानों में कैंसर कर सकता है.

पर रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका क्या है? इससे शरीर को क्या-क्या दिक्कतें हो सकती हैं? किन लोगों को ज़्यादा ख़तरा है? ये हमने पूछा पारस हेल्थ, उदयपुर के पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट में कंसल्टेंट, डॉ. मानसी वदगामा से.

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डॉ. मानसी वदगामा, कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, पारस हेल्थ, उदयपुर

डॉक्टर मानसी बताती हैं कि रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका बारीक धूल के कण हैं. जो पत्थर, जैसे मार्बल, ग्रेनाइट और सैंडस्टोन की कटाई, घिसाई या पॉलिशिंग के दौरान बनते हैं. रेस्पिरेबल यानी ये इतने छोटे कण हैं, कि सांस के ज़रिए सीधे फेफड़ों के अंदर गहराई तक पहुंच सकते हैं. ये कण इतने महीन होते हैं कि शरीर इन्हें आसानी से बाहर नहीं निकाल पाता. धीरे-धीरे ये फेफड़ों में जमा होकर सूजन और परमानेंट डैमेज करते हैं.

लंबे समय तक एक्सपोज़र होने पर ये गंभीर और कभी-कभी जानलेवा बीमारियों की वजह भी बन सकते हैं. इनसे सिलिकोसिस हो सकता है. जो फेफड़ों की लाइलाज बीमारी है. फेफड़ों का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ यानी COPD और किडनी की बीमारियां भी हो सकती हैं.

रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका के संपर्क में रहने से लगातार खांसी, सांस फूलने, सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं. लंबे समय में फेफड़ों की क्षमता कम हो जाती है. कई बार शुरुआती स्टेज में लक्षण बहुत हल्के या न के बराबर होते हैं, इसलिए ख़तरा अनदेखा रह जाता है.

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जो लोग स्टोन कटिंग का काम करते हैं, उन्हें रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका से बीमार पड़ने का ज़्यादा ख़तरा (फोटो: Adobe Stock)

रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका से बीमार पड़ने का रिस्क उन लोगों को ज़्यादा है, जो मार्बल इंडस्ट्री में काम करते हैं. स्टोन कटिंग या पॉलिशिंग करते हैं. जो बार-बार या लंबे समय तक ऐसे डंपिंग यार्ड में जाते हैं. जो बच्चे हैं, बुज़ुर्ग हैं. जिन्हें अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी है. जो बिना मास्क के अक्सर वहां फोटो खींचने या रील्स बनाने जाते हैं.

वैसे तो इस जगह पर जाना अवॉइड करें. लेकिन अगर जा ही रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें. जैसे N-95 या उससे बेहतर क्वालिटी का मास्क लगाएं. धूल उड़ने वाले एरिया में ज्यादा देर न रुकें. हवा तेज़ हो तो वहां जाने से बचें. बच्चों को साथ न ले जाएं. आंखों की सेफ्टी के लिए चश्मा पहनें. जिन लोगों को दमा या COPD है. सांस की दिक्कत है. वो यहां कतई न जाएं.

डंपिंग यार्ड से आने के बाद नहाएं और कपड़े धो लें. अगर सांस या खांसी की दिक्कत हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.

देखिए, किशनगढ़ का स्नो यार्ड दिखने में भले खूबसूरत हो. लेकिन ये असल में इंडस्ट्रियल वेस्ट है, और इसमें मौजूद सिलिका डस्ट सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. इसलिए यहां जाते समय सावधानी बरतना ज़रूरी है. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: इस मेडिकल कंडीशन से जूझ रहे हरीश राणा

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