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सिर्फ एक डोज से शरीर का 62% बैड कोलेस्ट्रॉल खत्म? क्या है Verve 102 जीन थेरेपी?

वर्व-102 थेरेपी क्या है. ये कैसे काम करती है. आने वाले समय में इससे मरीज़ों को कितना फायदा मिल सकता है. ये सब हमने पूछा शारदाकेयर हेल्थसिटी में कार्डियक साइंसेज़ के सीनियर डायरेक्टर और एचओडी, डॉक्टर अखिल कुमार रुस्तगी से.

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28 मई 2026 (पब्लिश्ड: 11:31 PM IST)
Bad Cholesterol
शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर हार्ट पर बुरा असर पड़ सकता है. (फोटो- इंडिया टुडे)
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अगर शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL बढ़ा हुआ हो, तो इलाज कैसे होता है? डॉक्टर लाइफस्टाइल सुधारने को कहते हैं. डाइट सही करने को कहते हैं. और साथ में देते हैं दवाइयां. जो एक लंबे अरसे तक रोज़ खानी पड़ती हैं. पर हो सकता है, आने वाले वक्त में कोलेस्ट्रॉल घटाने के लिए दवाइयों की ज़रूरत ही न पड़े. आपको बस एक थेरेपी दी जाए, और महीनों-सालों तक कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में आ जाए.

इस थेरेपी का नाम है Verve-102. ये एक जीन एडिटिंग थेरेपी है. इसे वर्व थेरेप्यूटिक्स बना रही है. जो अमेरिका की फार्मास्युटिकल कंपनी एली-लिली की सब्सिडियरी है. इस थेरेपी के अर्ली-स्टेज क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे The New England Journal of Medicine में छपे हैं. स्टडी को यूरोपियन एथेरो-स्क्लेरो-सिस सोसाइटी कांग्रेस में भी पेश किया गया है. रिसर्चर्स का कहना है कि वर्व-102 थेरेपी की सिर्फ एक डोज़ से बैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL 62 पर्सेंट तक कम हो सकता है. इस थेरेपी का असर इलाज के बाद कम से कम 18 महीने तक बना रहता है.

वर्व-102 थेरेपी क्या है. ये कैसे काम करती है. आने वाले समय में इससे मरीज़ों को कितना फायदा मिल सकता है. ये सब हमने पूछा शारदाकेयर हेल्थसिटी में कार्डियक साइंसेज़ के सीनियर डायरेक्टर और एचओडी, डॉक्टर अखिल कुमार रुस्तगी से.

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डॉक्टर अखिल कुमार रुस्तगी, शारदाकेयर हेल्थसिटी, सीनियर डायरेक्टर और एचओडी, कार्डियक साइंसेज़.

डॉक्टर अखिल कहते हैं कि वर्व-102 एक जीन एडिटिंग थेरेपी है. ऐसी थेरेपी, शरीर के जीन यानी DNA में बदलाव करती हैं. ये उसमें मौजूद किसी गड़बड़ी को सुधारने या बदलने का काम करती हैं. इससे बीमारी का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. जीन एडिटिंग थेरेपी, जैसे वर्व-102 आमतौर पर नस के ज़रिए ड्रिप से दी जाती है. फिर ये दवा शरीर के खास सेल्स तक पहुंचती है, और वहां जीन में ज़रूरी बदलाव करती है.  

वर्व-102 थेरेपी PCSK9 नाम के जीन को टारगेट करती है. PCSK9 जीन मुख्य रूप से लिवर के सेल्स में पाया जाता है. ये जीन, PCSK9 नाम का प्रोटीन बनाता है. यानी जीन अपने ही नाम का प्रोटीन बनाता है. अब ये जो PCSK9 प्रोटीन है, वो लिवर में मौजूद LDL रिसेप्टर्स को खत्म करने का काम करता है. और LDL रिसेप्टर्स हमारे लिए बहुत अच्छे होते हैं. क्योंकि, ये खून में से बैड कोलेस्ट्रॉल को पकड़कर बाहर निकालते हैं. पर PCSK9 प्रोटीन इन्हीं रिसेप्टर्स को खत्म करने लगता है. इससे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है.

और यहीं काम आती है, वर्व-102 थेरेपी. ये PCSK9 जीन को हमेशा के लिए बंद कर देती है. एकदम स्विच ऑफ. जीन बंद होने से PCSK9 प्रोटीन बनना ही बंद हो जाता है. जब PCSK9 प्रोटीन नहीं बनता, तो LDL रिसेप्टर्स पर रोक-टोक लगाने वाला कोई नहीं रहता. वो अपना काम ज़्यादा संख्या में और ज़्यादा देर तक करते रहते हैं. यानी खून से बैड कोलेस्ट्रॉल की जमकर सफाई करते हैं. नतीजा? बैड कोलेस्ट्रॉल काफी हद तक घट जाता है.

अभी इस थेरेपी का फेज़ Phase 1b Heart-2 ट्रायल हुआ है. इसमें 35 मरीज़ शामिल थे. जिन्हें जेनेटिकली हाई कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत थी. या जिन्हें कम उम्र में ही कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ हो गई थी. इन सभी को सिर्फ एक बार वर्व-102 जीन एडिटिंग थेरेपी दी गई. हालांकि, हर व्यक्ति को दी गई डोज़ की मात्रा अलग-अलग रखी गई. देखा गया कि सबसे ज़्यादा डोज़ लेने वाले लोगों में PCSK9 प्रोटीन 88 पर्सेंट तक कम हो गया. वहीं, बैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL में 62 पर्सेंट तक की कमी आई. 

सबसे बड़ी बात, ये असर लंबे समय तक बना रहा. कुछ मरीज़ों को 18 महीने तक फॉलो किया गया. और इस दौरान उनका कोलेस्ट्रॉल लेवल लगातार कम बना रहा.

डॉक्टर अखिल कहते हैं कि वर्व-102 जीन एडिटिंग थेरेपी पर चल रही रिसर्च, मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी उम्मीद मानी जा रही है. अगर ये थेरेपी बड़े ट्रायल्स में भी सफल रहती है. तब भविष्य में कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए बार-बार दवाइयों की ज़रूरत कम हो सकती है. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा घट सकता है.

लेकिन ध्यान रखें कि ये तकनीक अभी रिसर्च और ट्रायल में है. फिलहाल इसका इस्तेमाल आम इलाज के रूप में नहीं किया जा सकता. कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने का सबसे सेफ और असरदार तरीका अभी भी हेल्दी लाइफस्टाइल ही है. बैलेंस्ड डाइट लेना. रोज़ एक्सरसाइज़ करना. सिगरेट-शराब न पीना. अच्छे से सोना. और समय-समय पर हेल्थ चेकअप बहुत ज़रूरी हैं. जिन लोगों के परिवार में दिल की बीमारियों या हाई कोलेस्ट्रॉल की हिस्ट्री है उन्हें ज़्यादा सतर्कता बरतनी चाहिए.

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