सिंगर सोनू निगम तकलीफ में, कौन सी नस दबी कि पेनकिलर्स खाने पड़ रहे?
वीडियो में सोनू निगम बताते हैं कि उनकी गर्दन की नस दब गई है. वो एक हफ्ते से MRI, सीटी स्कैन करा रहे हैं. अपना दर्द कम करने के लिए पेनकिलर्स खा रहे हैं. और उनकी फिज़ियोथेरेपी भी चल रही है.

सिंगर सोनू निगम पिंच्ड नर्व से जूझ रहे हैं. यानी उनकी गर्दन की कोई नस दब गई है. ये जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर दी. इसमें सोनू की गर्दन पर कुछ बैंडेजेस देखे जा सकते हैं.
वीडियो में सोनू बताते हैं कि उनकी गर्दन की नस दब गई है. वो एक हफ्ते से MRI, सीटी स्कैन करा रहे हैं. अपना दर्द कम करने के लिए पेनकिलर्स खा रहे हैं. और उनकी फिज़ियोथेरेपी भी चल रही है.
सोनू निगम जिस दिक्कत से परेशान हैं, वो है नस का दबना. पर कोई नस दब कैसे जाती है? इसके पीछे क्या वजहें हैं, कौन-से लक्षण दिखते हैं, और पिंच्ड नर्व का इलाज क्या है? ये सब हमने पूछा मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन, गुरुग्राम में चेयरमैन, डॉक्टर प्रवीण गुप्ता से.
ये भी पढ़ें: कफ सिरप डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगा, तो हल्की खांसी में क्या करें? डॉक्टर ने बताया
डॉक्टर प्रवीण कहते हैं कि जब किसी नस पर आसपास की कोई हड्डी, कार्टिलेज, मांसपेशी, टेंडन या टिशूज़ दबाव डालने लगते हैं, तब इस स्थिति को नस का दबना यानी पिंच्ड नर्व कहते हैं. इस दबाव की वजह से नस ठीक से काम नहीं कर पाती और कई दिक्कतें होती हैं. नस पर दबाव पड़ने से तेज़, टीस उठने वाला या जलन जैसा दर्द होता है. ये दर्द शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है. जहां नस दबी है, वहां झनझनाहट और सुन्नपन होता है. उस हिस्से की मांसपेशियों में कमज़ोरी भी आ जाती है. सोते समय ये लक्षण और गंभीर हो सकते हैं.

नस कई वजहों से दब सकती है. पहली वजह है रीढ़ की डिस्क खिसकना. देखिए, रीढ़ की हड्डियों के बीच डिस्क होती हैं. जो कुशन का काम करती हैं. जब कोई डिस्क बाहर की ओर उभर आती है या फट जाती है. तो वो पास की नस पर दबाव डाल सकती है. इससे गर्दन, कमर, हाथ या पैरों पर असर पड़ सकता है. दूसरी वजह है गठिया. खासकर ऑस्टियोअर्थराइटिस. इसमें कार्टिलेज घिसने के बाद हड्डियों के किनारों पर एक्स्ट्रा उभार आ जाता है, या हड्डी जैसी गांठें बन जाती हैं. जो नसों के लिए जगह कम करके उन पर दबाव डाल सकती है.
ये भी पढ़ें: लिवर में ये खराबी हुई तो भरने लगेगा पेट में पानी, वजह समझ लीजिए
तीसरी वजह है लंबे वक्त तक एक ही पोश्चर में बैठना. अगर आप घंटों कंप्यूटर पर काम करते हैं. फोन चलाते हैं. गलत पोश्चर में बैठते हैं. तो गर्दन, कंधों और कमर पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ सकता है. जो वहां की नसों को दबा सकता है. चौथी वजह है बार-बार एक ही हरकत करना. किसी मशीन को बार-बार चलाने, भारी सामान उठाने, टाइपिंग करने या किसी खेल में एक ही एक्टिविटी बार-बार करने से आसपास के टिशूज़ में सूजन आ सकती है. ये सूजन वहां की नस को दबा सकती है.
पांचवीं वजह है चोट लगना. गिरने, खेल के दौरान चोट लगने या किसी एक्सीडेंट की वजह से हड्डियों, मांसपेशियों और डिस्क में बदलाव आ सकता है. जिससे किसी नस पर अचानक दबाव पड़ सकता है. छठवीं वजह है मोटापा. ज़्यादा वज़न से रीढ़ और जोड़ों पर दबाव पड़ता है. जो नसों को भी प्रभावित कर सकता है.

सातवीं वजह प्रेग्नेंसी है. प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भाशय का साइज बढ़ता है. जो रीढ़ की हड्डी और नसों पर दबाव डालता है. इससे हाथ-पैरों या कमर में दर्द, सुन्नपन और झुनझुनी हो सकती है. प्रेग्नेंसी में हॉर्मोनल बदलाव भी होते हैं. रिलैक्सिन जैसे हॉर्मोन जोड़ों और मांसपेशियों को ढीला करते हैं. जिससे नसें दब सकती हैं. एक वजह उम्र बढ़ना भी है. जब उम्र बढ़ती है, तो जोड़ों में घिसाव होने लगता है. रीढ़ की हड्डी में बदलाव आते हैं. डिस्क पतली होने लगती है. इससे नसों के लिए जगह घट जाती है और उनके दबने का खतरा बढ़ जाता है.
शरीर के कई हिस्सों में नस दब सकती है. पर सबसे आम प्रकार हैं- गर्दन की नस दबना यानी सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी. पीठ के बीच वाले हिस्से की नस दबना यानी थोरैसिक रेडिकुलोपैथी. और कमर की नस दबना यानी लम्बर रेडिकुलोपैथी. इसके अलावा, कलाई में नस दबने से कार्पल टनल सिंड्रोम, कोहनी के पास नस दबने से क्यूबिटल टनल सिंड्रोम और टखने के अंदरूनी हिस्से में नस दबने से टार्सल टनल सिंड्रोम हो सकता है.

कोई नस दबी है या नहीं, ये पता करने के लिए डॉक्टर कई तरह के टेस्ट करते हैं. जैसे ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई, इलेक्ट्रोमायोग्राफी और नर्व कंडक्शन स्टडी. इसके इलाज की बात करें, तो सबसे ज़रूरी है प्रभावित हिस्से को आराम देना. साथ में दवाएं दी जाती हैं. फिज़िकल थेरेपी की जाती है. ठंडी या गर्म सिकाई करने को कहा जा सकता है. ज़रूरत पड़ने पर सर्जरी भी करनी पड़ सकती है.
पिंच्ड नर्व यानी नस के दबने से बचना है तो अपना पोश्चर सही रखें. देर तक एक ही पोज़ीशन में न बैठें. रोज़ थोड़ी एक्सरसाइज़ और स्ट्रेचिंग करें. वज़न कंट्रोल में रखें. और भारी सामान सही तरीके से उठाएं, ताकि शरीर के किसी हिस्से पर अचानक तेज़ दबाव न पड़े.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: सेहत: पेट में पानी भरना खतरनाक, लिवर की ये बीमारी है वजह

