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हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर को एक ही समझते हैं? दोनों अलग-अलग हैं, जानिए इनसे कैसे बचें?

हार्ट अटैक दिल की नसों यानी कोरोनरी आर्टरीज़ में ब्लॉकेज होने से पड़ता है. वहीं, हार्ट फ़ेल तब होता है, जब हार्ट अपना काम ठीक से नहीं कर पाता. अगर बार-बार हार्ट अटैक पड़े तो हार्ट फ़ेलियर का ख़तरा बढ़ जाता है.

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relation between heart attack and heart failure know how to prevent them
हार्ट अटैक के मामले पिछले कुछ सालों में तेज़ी से बढ़े हैं
12 मार्च 2025 (पब्लिश्ड: 02:05 PM IST)
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आजकल आप ख़बरों में खूब सुन रहे होंगे कि फलां-फलां इंसान को हार्ट अटैक पड़ गया. किसी को नाचते हुए. किसी को जिम में एक्सरसाइज करते हुए. आस-पड़ोस में किसी की हार्ट अटैक से मौत हो गई. अब एक होता है ‘हार्ट अटैक’ और दूसरा होता है ‘हार्ट फ़ेल’. ये शब्द भी आपने कई बार सुना होगा. फलां-फलां का हार्ट फ़ेल हो गया. अक्सर हम हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेल को एक ही बात समझते हैं. पर ये दोनों अलग-अलग हैं.

हार्ट अटैक क्या होता है?

ये हमें बताया डॉक्टर सुशांत श्रीवास्तव ने. 

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डॉ. सुशांत श्रीवास्तव, चेयरपर्सन, हार्ट एंड लंग्स ट्रांस्पलांट, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स

हार्ट अटैक दिल की नसों यानी कोरोनरी आर्टरीज़ में ब्लॉकेज होने से पड़ता है. कई बार दिल की नसें ब्लॉक हो जाती हैं. अगर तीन नसें ब्लॉक हों, तो बाईपास सर्जरी करवानी पड़ती है. अगर एक नस में ब्लॉकेज हो, तो एंजियोप्लास्टी या स्टेंट लगाया जाता है. अगर ब्लॉकेज कम हैं, तो दवाइयों से भी काम चल जाता है. 

ब्लॉकेज अलग-अलग स्तर के हो सकते हैं, जैसे 20%, 50% या 90%. जब ब्लॉकेज अचानक 100% हो जाता है, तो हार्ट अटैक पड़ता है. ब्लॉकेज कोलेस्ट्रॉल के जमा होने के कारण होता है, जिसे प्लाक कहते हैं. प्लाक का ऊपरी हिस्सा अस्थिर हो सकता है और कई वजहों से टूट सकता है. जब प्लाक टूटता है, तो उस जगह पर खून का थक्का बन जाता है. ये थक्का कोरोनरी आर्टरी को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है.

हार्ट अटैक आने पर मरीज़ को सीने में तेज़ दर्द होता है. घुटन महसूस होती है. बहुत ज़्यादा घबराहट होती है. तबियत एकदम से बिगड़ने लगती है.

हार्ट फ़ेल क्या होता है?

हार्ट फ़ेल तब होता है, जब हार्ट अपना काम ठीक से नहीं कर पाता. ये ज़रूरी नहीं है कि हार्ट फ़ेलियर सिर्फ ब्लॉकेज की वजह से हो. अगर दिल की मांसपेशियां कमजोर हो जाएं और खून पंप करने की क्षमता कम हो जाए, तो इसे हार्ट फ़ेलियर की स्थिति कहते हैं.

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बार-बार हार्ट अटैक आने से हार्ट फ़ेलियर का ख़तरा बढ़ जाता है (फोटो: Getty Images)
हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर के बीच संबंध

हार्ट अटैक होने पर हार्ट का एक हिस्सा कमज़ोर या नष्ट हो सकता है. अगर दो बार हार्ट अटैक आ जाए, तो हार्ट का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है. जो हिस्सा नष्ट (डेड) हो जाता है, वो ठीक से पंप नहीं कर पाता. इससे पूरा दिल कमजोर हो जाता है. बार-बार हार्ट अटैक आने से हार्ट फ़ेलियर का ख़तरा बढ़ जाता है.

हार्ट अटैक से कैसे बचें?

अगर हार्ट अटैक का शक है तो तुरंत अस्पताल जाएं. वहां 2 घंटे के अंदर एंजियोप्लास्टी करके दिल को बचाया जा सकता है. अगर हार्ट अटैक आ जाए और समय पर इलाज न मिले, तो जिस कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज हुआ है, वो खून की सप्लाई नहीं कर पाएगी. इससे दिल का वो हिस्सा डेड हो जाएगा, जिससे दिल के काम करने की क्षमता कम हो जाएगी.

हार्ट फ़ेल से कैसे बचें?

हार्ट फ़ेलियर की सबसे आम वजह हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) है. अगर हाई ब्लड प्रेशर का इलाज न किया जाए, तो इससे हार्ट फ़ेल हो सकता है. हाई ब्लड प्रेशर की सबसे खतरनाक बात ये है कि इसके कोई लक्षण नहीं होते. कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर हाई है. इसलिए, 40 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से मेडिकल चेकअप कराना ज़रूरी है.

अगर आपका ब्लड प्रेशर हाई है, तो उसका इलाज कराएं. लंबे वक्त तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से हार्ट फ़ेलियर हो सकता है. अगर किसी को दिल की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारी है, तो उससे भी हार्ट कमज़ोर हो सकता है और पंपिंग कम हो सकती है. इस स्थिति को डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी कहते हैं. इससे भी हार्ट फ़ेलियर हो सकता है.

अगर हार्ट अटैक और हार्ट फ़ेलियर से बचना है, तो 40 की उम्र के बाद रेगुलर चेकअप कराते रहें. दिल से जुड़ी कोई दिक्कत महसूस हो तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें. ध्यान रखें, समय से इलाज आपकी जान बचा सकता है.

(यहां बताई गईं बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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