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बस 2 मिनट की सांस फुलाऊ एक्सरसाइज़ देगी 8 बीमारियों से छुटकारा: स्टडी

तेज़ फिज़िकल एक्टिविटी करके आप खुद को जिन बीमारियों से बचाएंगे, वो हैं अर्थराइटिस, दिल की बीमारियां, इर्रेगुलर हार्टबीट, टाइप-2 डायबिटीज़, लिवर की बीमारियां, लंबे समय तक चलने वाली सांस की बीमारियां, क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ और डिमेंशिया.

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3 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 3 अप्रैल 2026, 04:15 PM IST)
new study highlights that vigorous activity may reduce the risk of eight diseases
रोज़ थोड़ी देर एक्सरसाइज़ तो करनी ही चाहिए. (तस्वीर- Unsplash.com)
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क्या आप रोज़ कोई ऐसी फिज़िकल एक्टिविटी करते हैं, जिसे करते हुए आपकी सांस फूलने लगती है? धड़कनें तेज़ हो जाती हैं? अगर जवाब हां है, तो बधाई हो. आप खुद को 8 बड़ी बीमारियों से बचा रहे हैं. इसमें शामिल हैं- अर्थराइटिस. दिल की बीमारियां. इर्रेगुलर हार्टबीट. टाइप-2 डायबिटीज़. लिवर की बीमारियां. लंबे समय तक चलने वाली सांस की बीमारियां. क्रोनिक किडनी डिज़ीज़, और डिमेंशिया. ये सामने आया है European Heart Journal में 30 मार्च 2026 को छपी एक रिसर्च से. इसे एक इंटरनेशनल टीम ने किया है.

इस रिसर्च के लिए रिसर्चर्स ने यूके बायोबैंक प्रोजेक्ट का हिस्सा रहे करीब 96 हज़ार लोगों का डेटा लिया. यूके बायोबैंक, एक तरह का डेटाबेस है. इसमें यूके यानी यूनाइटेड किंगडम के लाखों लोगों के मेडिकल और लाइफस्टाइल रिकॉर्ड्स शामिल हैं.

रिसर्च में शामिल सभी लोगों को कलाई पर पहनने के लिए एक्सेलेरोमीटर दिया गया. ये एक छोटा-सा सेंसर होता है. जो शरीर की हरकतों को मापता है. एक्सेलेरोमीटर कई चीज़ों को रिकॉर्ड करता है. जैसे आप कितनी तेज़ी से मूव कर रहे हैं. आपकी चाल धीमी है या तेज़. आप चल रहे हैं या दौड़ रहे हैं.

फिर एक हफ्ते बाद एक्सेलेरोमीटर पर रिकॉर्ड डेटा का एनालिसिस किया गया. देखा गया कि लोगों ने कितनी देर फिज़िकल एक्टिविटी की, और उस एक्टिविटी की इंटेंसिटी कितनी थी. इससे सामने आया कि कौन लोग सिर्फ हल्की एक्टिविटी कर रहे थे. और कौन लोग थोड़े समय के लिए ही सही, लेकिन तेज़ एक्टिविटी कर रहे थे. फिर इस डेटा को अगले 7 सालों में मौत और 8 गंभीर बीमारियों के रिस्क से जोड़ा गया. बीमारियों के नाम आप अपनी स्क्रीन पर देख सकते हैं.

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एक्सरसाइज़ की टाइमिंग से ज़्यादा मायने उसकी इंटेंसिटी रखती है

पता चला कि जो लोग थोड़ी देर के लिए भी तेज़ फिज़िकल एक्टिविटी कर रहे थे. उनमें इन 8 बीमारियों और मौत का रिस्क कम था. जिन लोगों ने बिल्कुल भी तेज़ एक्टिविटी नहीं की. उनकी तुलना में जिन लोगों ने सबसे ज़्यादा तेज़ एक्टिविटी की. उन्हें डिमेंशिया का रिस्क 63 परसेंट कम था. टाइप-2 डायबिटीज़ का रिस्क 60 परसेंट. और मौत का खतरा 46 परसेंट तक कम था. सबसे ज़रूरी बात, ये फायदे तब भी मिले, जब लोगों ने ज़्यादा नहीं, बल्कि थोड़े समय के लिए ही तेज़ एक्टिविटी की.

ये भी पता चला कि कुछ बीमारियों में एक्टिविटी की तेज़ी बहुत मायने रखती है. अगर आप तेज़ फिज़िकल एक्टिविटी कर रहे हैं. तो कुछ खास बीमारियों से ज़्यादा सुरक्षा मिलती है. मसलन सूजन से जुड़ी बीमारियां जैसे गठिया और सोरायसिस. दिल की गंभीर बीमारियां जैसे हार्ट अटैक और स्ट्रोक. और डिमेंशिया.

पर तेज़ फिज़िकल एक्टिविटी इतनी फायदेमंद क्यों है? इस सवाल का जवाब दिया स्टडी के ऑथर्स में से एक Minxue Shen ने. वो चीन की सेंट्रल साउथ यूनिवर्सिटी के Xiangya School of Public Health में प्रोफेसर हैं.

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Prof. Minxue Shen

प्रोफेसर शेन बताते हैं कि तेज़ फिज़िकल एक्टिविटी करने से शरीर में कुछ खास बदलाव होते हैं. जो हल्की एक्टिविटी में नहीं हो पाते. जब आप कोई एक्टिविटी करते हैं, जिससे सांस फूलने लगती है. तब शरीर ज़्यादा ताकत से काम करता है. दिल तेज़ी से और बेहतर तरीके से खून पंप करता है. खून की नलियां ज़्यादा लचीली बनती हैं. शरीर ऑक्सीज़न का इस्तेमाल और अच्छे से करने लगता है. इससे शरीर ज़्यादा हेल्दी बनता है. तेज़ फिज़िकल एक्टिवटी शरीर की अंदरूनी सूजन भी घटाती है. इससे सोरायसिस और गठिया जैसी बीमारियों का रिस्क कम होता है. साथ ही, ये दिमाग में ऐसे केमिकल्स बढ़ाती है. जो दिमाग के सेल्स को हेल्दी रखते हैं. इससे डिमेंशिया का रिस्क भी घटता है.

प्रोफेसर शेन आगे कहते हैं कि अपनी रोज़ की एक्टिविटीज़ में थोड़ी तेज़ी जोड़ना भी बहुत फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए आपको जिम जाने की ज़रूरत नहीं है. आप छोटी-छोटी चीज़ें कर सकते हैं. जैसे तेज़ी से सीढ़ियां चढ़ना. जल्दी-जल्दी चलना. बच्चों के साथ एक्टिवली खेलना. अगर हफ्ते में 15-20 मिनट भी ऐसा करेंगे तो भी सेहत पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा.

अभी एक्सरसाइज़ से जुड़ी जितनी भी गाइडलाइंस हैं. वो इस बात पर ध्यान देती हैं कि आप हफ्ते में कितनी देर एक्टिव रहते हैं. लेकिन ये स्टडी बताती है कि एक्टिविटी का कुल टाइम ही नहीं. वो किस इंटेंसिटी से की जा रही है. ये भी बहुत मायने रखता है.  

हालांकि ये ध्यान रखें कि तेज़ फिज़िकल एक्टिविटी हर किसी के लिए सेफ नहीं है. खासकर बुज़ुर्गों और कुछ खास बीमारी के मरीज़ों के लिए. ऐसे लोगों को हल्की-फुल्की एक्टिविटी ही करनी चाहिए. वो भी डॉक्टर से पूछने के बाद.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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