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महाराष्ट्र में खुले देश के पहले मेनोपॉज़ क्लीनिक्स, पर महिलाओं की इनकी ज़रूरत क्यों है?

मेनोपॉज़ यानी पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाना. मेनोपॉज़ के बाद एक महिला प्रेग्नेंट नहीं हो सकती. इस दौरान शरीर में बहुत सारे बदलाव आते हैं. हॉर्मोन्स के बीच तालमेल बिगड़ जाता है. इससे महिलाओं को मेंटल और फिजिकल समस्याओं का सामना करना पड़ता है. यहां काम आती हैं मेनोपॉज़ क्लीनिक्स.

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Maharashtra Launches Menopause Clinics but what health issues do women face during menopause
मेनोपॉज़ एक नेचुरल प्रक्रिया है, जो 45 से 55 साल की महिलाओं में होती ही है. (फोटो: Unsplash.com)
29 जनवरी 2026 (अपडेटेड: 29 जनवरी 2026, 03:48 PM IST)
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महाराष्ट्र में मेनोपॉज़ क्लीनिक्स खोले गए हैं. ऐसा करने वाला, महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है. ये मेनोपॉज़ क्लीनिक्स सरकारी अस्पतालों और अर्बन हेल्थ फैसिलिटीज़ में तैयार किए गए हैं. यहां डॉक्टर्स महिलाओं को मेनोपॉज़ से जुड़ी सलाह देंगे. उनकी मेंटल हेल्थ काउंसलिंग की जाएगी. महिलाओं की हड्डियों, दिल और हॉर्मोन्स की जांच भी होगी. ज़रूरत पड़ने पर उन्हें दवाएं दी जाएंगी.

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 जनवरी से ये क्लिनिक्स खुल गए हैं. पर मेनोपॉज़ क्लीनिक्स खोलने की ज़रूरत क्यों पड़ी? मेनोपॉज़ यानी पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाना. मेनोपॉज़ के बाद एक महिला प्रेग्नेंट नहीं हो सकती. इस दौरान शरीर में बहुत सारे बदलाव आते हैं. हॉर्मोन्स के बीच तालमेल बिगड़ जाता है. इससे महिलाओं को मेंटल और फिजिकल समस्याओं का सामना करना पड़ता है. यहां काम आती हैं मेनोपॉज़ क्लीनिक्स.

मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं के शरीर में किस तरह के बदलाव आते हैं. इस बारे में हमें बताया सेंटर फॉर इनफर्टिलिटी एंड असिस्टेड रिप्रोडक्शन, गुरुग्राम में गायनेकोलॉजिस्ट एंड आईवीएफ एक्सपर्ट, डॉक्टर पुनीत राणा अरोड़ा ने.

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डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा, गायनेकोलॉजिस्ट एंड आईवीएफ एक्सपर्ट, सीआईएफएआर, गुरुग्राम
मेनोपॉज़ क्या है? 

डॉक्टर पुनीत कहती हैं कि जब लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते. तब इसे मेनोपॉज़ कहा जाता है. ये एक नेचुरल प्रक्रिया है. जो 45 से 55 साल की महिलाओं में होती ही है. इसके बाद महिलाएं प्रेग्नेंट नहीं हो सकतीं. 

मेनोपॉज़ क्यों होता है?

मेनोपॉज़ होने का मुख्य कारण हॉर्मोन्स में बदलाव है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी हो जाती है. ये हॉर्मोन पीरियड्स और प्रेग्नेंसी के लिए ज़रूरी हैं. जब एस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी होती है. तब पीरियड्स अनियमित होकर धीरे-धीरे पूरी तरह बंद हो जाते हैं.

उम्र बढ़ने के साथ ओवरी यानी अंडाशय में अंडों की संख्या और क्वालिटी कम होने लगती है. फिर एक वक्त ऐसा आता है, जब ओवरी अंडे बनाना बंद कर देती है. जब अंडे नहीं बनते तो पीरियड्स आना भी बंद हो जाते हैं. यानी मेनोपॉज़ हो जाता है. वैसे तो मेनोपॉज़ 45 से 55 साल की उम्र में होता है. पर कुछ मामलों में ये जल्दी भी हो सकता है.

जैसे अगर महिला की ओवरी निकालनी पड़ी हो. कैंसर की वजह से उसकी कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी हुई हो. कोई ऑटोइम्यून बीमारी हो या फिर जेनेटिक वजहों से भी मेनोपॉज़ समय से पहले हो सकता है.

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मेनोपॉज़ के दौरान पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं (फोटो: Freepik)
मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं मे क्या बदलाव आते हैं?

मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं. जैसे पीरियड्स अनियमित हो जाना. पीरियड्स कम या ज़्यादा होना. वजाइना में ड्राइनेस होना. बार-बार यूरिन इंफेक्शन होना. स्किन काफी रूखी हो जाना. कुछ महिलाओं के बाल भी झड़ने लगते हैं.

एस्ट्रोजन हॉर्मोन कम बनने की वजह से मांसपेशियां और हड्डियां भी काफ़ी कमज़ोर हो जाती हैं. जिन महिलाओं को मेनोपॉज हो जाता है, उन्हें अलग-अलग हड्डियों में दर्द की शिकायत रहती है. ऑस्टियोपोरोसिस भी हो सकता है. ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों में खोखलापन होना. 

इन सबका असर पड़ता है उनके मूड पर. इसी वजह से मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं को बहुत गुस्सा आता है. चिड़चिड़ापन होता है. उन्हें नींद ठीक से नहीं आती. वो परेशान रहती हैं. कभी-कभी महिलाओं को बहुत गर्मी या बहुत ठंड लगती है. इसे हॉट फ्लैशेज़ या कोल्ड स्वेट कहते हैं. कुछ केसेज़ में वज़न बढ़ना भी शुरू हो जाता है. पर इन सारे लक्षणों को कम किया जा सकता है.

मेनोपॉज़ के लक्षण कैसे कम करें?

इसके लिए महिलाएं हेल्दी खाना खाएं. उनके खाने में प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम समेत तमाम पोषक तत्व हों. प्रोटीन के लिए दूध, दही, पनीर, दालें, स्प्राउट्स, सोया प्रोडक्ट्स, अंडे, मछली और चिकन लिया जा सकता है. फाइबर के लिए हरी सब्ज़ियां और मौसमी फल खाएं. कैल्शियम के लिए दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स लें. जैसे दही, चीज़ और पनीर वगैरा. हड्डियों को मज़बूत करने के लिए कैल्शियम सप्लीमेंट भी ले सकते हैं. लेकिन कोई भी सप्लीमेंट बिना डॉक्टर की सलाह के न लें.

साथ ही, रोज़ थोड़ी देर एक्सरसाइज़ करें. आप टहल सकते हैं. योग कर सकते हैं. इससे हड्डियां और मांसपेशियां मज़बूत होती हैं. जिन महिलाओं में मेनोपॉज़ के लक्षण बहुत ज़्यादा होते हैं. उन्हें हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी भी दी जा सकती है. इसमें ज़रूरी हॉर्मोन्स, जैसे एस्ट्रोजन को इंजेक्शन, क्रीम, जेल या टैबलेट के रूप में दिया जा सकता है. पर इन्हें लंबे वक्त तक नहीं लिया जा सकता. वर्ना शरीर पर उल्टा असर भी पड़ सकता है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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