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भारत में फेफड़ों के कैंसर बाढ़ की तरह बढ़ेंगे! नई स्टडी में खुलासा, इन पर होगा सबसे ज्यादा खतरा

फिलहाल भारत में लंग कैंसर चौथा सबसे आम कैंसर है. World Health Organization की एक एजेंसी है. International Agency For Research On Cancer. इसके मुताबिक, 2022 में हमारे देश में लंग कैंसर के 81,500 से ज़्यादा मामले सामने आए थे.

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Lung Cancer cases to rise sharply by 2030 in india says latest study
लंग कैंसर चौथा सबसे आम कैंसर है (फोटो: Freepik)
27 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 04:44 PM IST)
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साल 2030 तक भारत में लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) बहुत तेज़ी से बढ़ चुका होगा. इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा नॉर्थ ईस्ट पर. यही नहीं, महिलाओं में लंग कैंसर के केस ज़्यादा देखने को मिलेंगे. ये बात Indian Journal of Medical Research में छपी एक स्टडी में सामने आई है. मौजूदा वक्त में भारत में लंग कैंसर चौथा सबसे आम कैंसर है. World Health Organization की एजेंसी है International Agency For Research On Cancer. इसके GLOBOCAN डेटाबेस के मुताबिक, 2022 में हमारे देश में लंग कैंसर के 81 हजार 500 से ज़्यादा मामले सामने आए थे. पर, देश में किस इलाके के लोग लंग कैंसर से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं, ये तब पता नहीं चल सका था. 

इस नई स्टडी ने बताया है कि इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले लोग नॉर्थ ईस्ट इंडिया में रहते हैं. रिसर्च के लिए देश के 6 अलग-अलग क्षेत्रों के 57 आबादी समूहों का डेटा स्टडी किया गया है. हैरानी की बात ये है कि महिलाओं में अब लंग कैंसर के मामले पुरुषों के बराबर पहुंच रहे हैं, जो कम से कम भारत में सामान्य बात नहीं थी. 

मगर ऐसा हो क्यों रहा है? चलिए समझते हैं कि भारत में लंग कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं. खासकर नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों और महिलाओं में. लंग कैंसर के किन लक्षणों को जानना ज़रूरी है. और लंग कैंसर के रिस्क से बचने के लिए क्या करें? 

भारत में लंग कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

इसके बारे में हमें बताया है डॉक्टर निष्ठा सचदेवा ने. 

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डॉ. निष्ठा सचदेवा, कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, यशोदा इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर

डॉक्टर निष्ठा बताती हैं कि भारत में पिछले दो सालों से लंग कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. ऐसा सिर्फ गांवों और कस्बों में ही नहीं हो रहा बल्कि बड़े शहरों में भी लंग कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू का सेवन है. जैसे सिगरेट, गुटखा और बीड़ी. इंडोर प्रदूषण जैसे चूल्हे का इस्तेमाल भी इसकी एक वजह है. इसी तरह, वायु प्रदूषण भी लंग कैंसर का बड़ा कारण है.

नॉर्थ-ईस्ट और महिलाओं में कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

नॉर्थ ईस्ट में तंबाकू का सेवन ज़्यादा किया जाता है. चाहे वो बीड़ी हो, गुटखा हो या फिर सिगरेट. वहां खाना भी ज़्यादातर धुएं में पकाया जाता है. इसके अलावा, घर के अंदर का प्रदूषण भी एक वजह है. नॉर्थ ईस्ट में चूल्हे का ज़्यादा इस्तेमाल होता है और इस वजह से वहां लंग कैंसर के मामले ज़्यादा पाए जाते हैं. 

महिलाओं की बात करें तो पहले के मुकाबले अब उनमें भी लंग कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. बड़े शहरों में वायु प्रदूषण बहुत ज़्यादा है. AQI ख़राब है. इस वजह से महिलाओं में कैंसर के मामले बढ़े हैं. 

सेकंड हैंड या पैसिव स्मोकिंग भी एक बड़ी वजह है. कई महिलाएं खुद स्मोक नहीं करतीं लेकिन, घर में दूसरे लोग सिगरेट पीते हैं. इससे वो लगातार सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहती हैं, जिस वजह से उनमें भी लंग कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं.

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अगर खांसी कई हफ्तों से बनी हुई है, तो ये लंग कैंसर का लक्षण हो सकता है (फोटो: Freepik)
लंग कैंसर के किन लक्षणों को जानना ज़रूरी है?

- लगातार तीन हफ्ते से ज़्यादा खांसी आना

- बार-बार सांस फूलना

- खांसी में बलगम के साथ खून आना

- बेवजह वज़न कम होना

- भूख कम लगना

- बार-बार छाती का इंफेक्शन, जैसे निमोनिया होना

- अगर ऐसे लक्षण तीन हफ्ते से ज़्यादा बने रहें, तो तुरंत हॉस्पिटल जाकर चेकअप कराएं

लंग कैंसर से बचने के लिए क्या करें?

सबसे ज़रूरी है स्मोकिंग छोड़ना. जो लोग सिगरेट पीते हैं, वो इसे छोड़ दें. जो नहीं पीते हैं, वो शुरू न करें. अगर आसपास कोई सिगरेट पिए तो दूर हो जाएं. आजकल वायु प्रदूषण बहुत ज़्यादा है, इसलिए मास्क लगाएं. घर पर एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें. हेल्दी खाना खाएं. फिज़िकल एक्टिविटी यानी सैर और कसरत करें.

अगर लंग से जुड़ा कोई भी लक्षण दिखता है. जैसे तीन हफ्ते से ज़्यादा खांसी आना. खांसी में बलगम के साथ खून आना. सांस फूलना. तब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, ताकि कैंसर को जल्दी पकड़ा जा सके.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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