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H5N1 वायरस से 44 मोरों की मौत, इंसानों में भी फैलने का डर, लक्षण और इलाज जानें

मोरों की मौत का कारण पता चलने के बाद अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं. उनसे कहा गया है कि वो चिड़ियाघर, बर्ड सैंक्चुरीज़ और जंगलों में इसका फैलाव रोकने के लिए सावधानी बरतें. साथ ही, अगर किसी पक्षी की मौत होती है, तो तुरंत इसकी सूचना दें और सैंपल लेकर टेस्टिंग के लिए भेजें.

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6 मई 2026 (पब्लिश्ड: 04:06 PM IST)
Karnataka reports 44 peacock deaths due to H5N1 virus how does it spread from infected animals to human
सभी मोरों की मौत 16 से 21 अप्रैल के बीच हुई है
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कर्नाटक के तुमाकुरु ज़िले में करीब 44 मोरों की मौत हो गई है. वजह है H5N1 वायरस. सभी मौतें 16 से 21 अप्रैल के बीच हुई हैं. मोरों की मौत का कारण पता चलने के बाद अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं. उनसे कहा गया है कि वो चिड़ियाघर, बर्ड सैंक्चुरीज़ और जंगलों में इसका फैलाव रोकने के लिए सावधानी बरतें. साथ ही, अगर किसी पक्षी की मौत होती है, तो तुरंत इसकी सूचना दें और सैंपल लेकर टेस्टिंग के लिए भेजें. 

हेल्थ डिपार्टमेंट के अनुसार, अगले 10 दिनों तक 38 गांवों के 20 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जांच की जाएगी. देखा जाएगा कि किसी को बुखार, फ्लू जैसे लक्षण या सांस से जुड़ा कोई गंभीर इंफेक्शन तो नहीं है. डिपार्टमेंट ने आम लोगों को भी इंफेक्शन से बचने के लिए एहतियात बरतने की सलाह दी है.

लोगों को सावधानी बरतने के लिए इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि H5N1 वायरस के मामले सिर्फ पक्षियों और जानवरों तक सीमित नहीं हैं. ये उनसे इंसानों में भी फैल सकता है. पहले भी फैला है. अब ये H5N1 वायरस क्या है, ये इंसानों में कैसे फैलता है, इसके लक्षण क्या हैं, इलाज और बचाव कैसे करें? ये सब हमें बताया अपोलो हॉस्पिटल, पुणे में जनरल मेडिसिन डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट, डॉक्टर सम्राट शाह ने.

dr samrat shah
डॉक्टर सम्राट शाह, कंसल्टेंट, जनरल मेडिसिन, अपोलो हॉस्पिटल, पुणे

डॉक्टर सम्राट कहते हैं कि इंफ्लूएंज़ा वायरस चार तरह के होते हैं. इंफ्लूएंज़ा A, B, C और D. इनमें इंफ्लूएंज़ा A वायरस का सब-टाइप है-H5N1. जिसे बर्ड फ्लू या एवियन इंफ्लूएंज़ा भी कहते हैं. बर्ड फ्लू ज़्यादातर पक्षियों और जानवरों को होता है. जैसे मुर्गी, बत्तख, कबूतर, बकरी और गाय. लेकिन संक्रमित जानवर या पक्षी के संपर्क में आने से इंसान भी बीमार हो सकता है. खासकर अगर वो उनके मल-मूत्र, थूक या गंदगी को छू ले. इसका रिस्क उन लोगों को ज़्यादा हैं, जो मुर्गी पालन करते हैं. चिड़ियाघर में काम करते हैं. पशु चिकित्सक हैं. मांस-मछली बेचते हैं. और चिकन या अंडा खाते हैं.  

H5N1 इंफेक्शन के लक्षण 

अगर H5N1 का इंफेक्शन हो जाए, तो लक्षण दिखने में 2 से 8 दिन लगते हैं. H5N1 इंफेक्शन के लक्षणों में शामिल हैं: तेज़ बुखार, कमज़ोरी, खांसी, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द. कभी-कभार कंजक्टिवाइटिस भी हो सकता है. अगर दिक्कत बढ़ जाए तो सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. दिमाग पर असर पड़ने से दौरे भी पड़ सकते हैं. ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

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H5N1 इंफेक्शन से बचाने में फ्लू की वैक्सीन मदद कर सकती है 
H5N1 इंफेक्शन से बचाव और इलाज 

डॉक्टर लक्षण देखकर एंटी वायरल दवाइयां देते हैं. हालत गंभीर होने पर मरीज़ को अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है. H5N1 से बचना है तो हर साल फ्लू की वैक्सीन लें. इससे थोड़ी मदद मिल सकती है. वहीं, जिस जगह पर H5N1 वायरस के मामले मिले हों, वहां के लोग थोड़ी ज़्यादा सावधानी बरतें. 

संक्रमित मुर्गी या उसके अंडे खाने से भी ये वायरस फैल सकता है. इसलिए जो लोग नॉन-वेज खाते हैं. वो चिकन अच्छे से धोकर ही पकाएं. अगर चिकन अच्छे से नहीं पका है. तो वायरस की चपेट में आने का रिस्क है. इसी तरह अंडा उबालकर ही खाएं. और कच्चा दूध पीने से बचें. खाना बनाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें. क्योंकि ये वायरस हाथों और बर्तनों से भी फैल सकता है.

इसके अलावा जो लोग मुर्गी पालन करते हैं. वो पूरी बांह के कपड़े पहनें. ग्लव्स का इस्तेमाल करें. ग्लव्स उताने के बाद अपने हाथों को अच्छे से सैनिटाइज़ करें. अगर हैंड सैनिटाइजर नहीं है तो साबुन और पानी से भी साफ कर सकते हैं. इस तरह ही आप खुद को इस वायरस से बचा सकते हैं.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)  

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