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'IVF से सिर्फ लड़का होता है', इंटरनेट पर फैली ऐसी 6 बातों का सच डॉक्टर ने बता दिया

जब आप IVF के बारे में ऑनलाइन सर्च करना शुरू करते हैं. तब दिखती हैं कई बातें, जिन्हें पढ़कर समझ नहीं आता कि आखिर ये सच हैं या झूठ.

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9 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 08:11 PM IST)
ivf pregnancy high risk it gives you a boy myths vs facts
जो कपल्स नेचुरली प्रेग्नेंट नहीं हो सकते, उनमें से कई IVF का सहारा लेते हैं.
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हमारे देश में ढाई करोड़ से ज़्यादा लोग इनफर्टिलिटी से जूझ रहे हैं. इसमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल हैं. अगर कपल्स की बात करें तो हर 6 में से 1 कपल इनफर्टिलिटी से जूझ रहा है. इनफर्टिलिटी यानी आप बच्चा पैदा नहीं कर पाते. अब जो कपल्स नेचुरली प्रेग्नेंट नहीं हो सकते. उनमें से कई सहारा लेते हैं IVF का. IVF यानी इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन. इसमें महिला के एग्स और पुरुष के स्पर्म को लैब में मिलाया जाता है. फिर इससे बनने वाले भ्रूण यानी एम्ब्रयो को महिला के गर्भाशय में डाल दिया जाता है. IVF से पैदा हुए बच्चों को टेस्ट ट्यूब बेबी भी कहा जाता है.

जब आप IVF के बारे में ऑनलाइन सर्च करना शुरू करते हैं. पढ़ना शुरू करते हैं. तो दिखती हैं कई बातें, जिन्हें पढ़कर समझ नहीं आता कि आखिर ये सच हैं या झूठ. जैसे IVF से सिर्फ लड़का ही होता है. IVF से हुए बच्चे हमेशा बीमार ही रहते हैं. IVF कराया तो कैंसर का रिस्क बढ़ जाएगा. IVF प्रेग्नेंसी 'हाई रिस्क' होती है. वगैरा वगैरा. अब इन बातों में कोई सच्चाई है भी या नहीं? चलिए डॉक्टर से पता करते हैं. 

IVF में सिर्फ लड़का होता है?

इस बारे में हमें बताया डॉक्टर मनन गुप्ता ने. 

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डॉ. मनन गुप्ता, चेयरमैन, आईवीएफ डिपार्टमेंट, एलांटिस हेल्थकेयर, दिल्ली

मनन गुप्ता कहते हैं कि ये मिथ है कि IVF में सिर्फ लड़का होता है. IVF में लड़का भी हो सकता है और लड़की भी. IVF में दो लड़के भी हो सकते हैं और दो लड़कियां भी. IVF में एक लड़का और एक लड़की भी हो सकती है. भारत में IVF के ज़रिए बच्चे का सेक्स चुनना बैन है.

IVF हमेशा सफल होता है?

डॉक्टर के मुताबिक, दुनियाभर में IVF का सक्सेस रेट बेहतरीन परिस्थितियों में भी 35 से 40% ही होता है. अगर कोई क्लीनिक या अस्पताल 70 से 80% सक्सेस रेट का दावा करता है तो वो गलत है. रिसर्च के मुताबिक, IVF का स्टैंडर्ड (मानक) सक्सेस रेट 35 से 40% ही माना जाता है.

IVF से हुए बच्चे अक्सर बीमार रहते हैं?

मनन गुप्ता बताते हैं कि IVF से हुए बच्चे बिल्कुल नॉर्मल बच्चों जैसे होते हैं. प्रेग्नेंसी भी बिल्कुल नॉर्मल प्रेग्नेंसी जैसी होती है. साल 1993-95 में IVF से हुए कई बच्चे आज वकील, जज और डॉक्टर हैं. कई विदेशी यूनिवर्सिटीज़ में जाकर पढ़ रहे हैं. वो बहुत सफल हैं और पूरी तरह नॉर्मल हैं.

IVF से कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है?

मनन गुप्ता के मुताबिक अगर किसी ने कई बार IVF कराया है और बार-बार हॉर्मोनल स्टिमुलेशन (दवाइयों के ज़रिए हॉर्मोन) लिया है. तब ओवेरियन कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क थोड़ा बढ़ सकता है. इसलिए बार-बार IVF साइकिल्स न कराने की सलाह दी जाती है.

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IVF में महिला के एग्स और पुरुष के स्पर्म को लैब में मिलाया जाता है
IVF प्रेग्नेंसी 'हाई रिस्क' होती है?

डॉक्टर कहते हैं कि IVF प्रेग्नेंसी बहुत खास मानी जाती है क्योंकि ये काफी खर्च, कोशिशों और इलाज के बाद आई होती है. इसलिए प्रेग्नेंसी को सेफ रखने के लिए कई हॉर्मोन्स और इंजेक्शन्स दिए जाते हैं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि IVF प्रेग्नेंसी अपने आप में हाई-रिस्क होती है. आमतौर पर IVF से प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं की उम्र ज़्यादा होती है. उस पर उन्हें मेडिकल मदद से प्रेग्नेंसी मिलती है. इसी मेडिकल सपोर्ट के साथ उनकी प्रेग्नेंसी 9 महीने तक जाती है और फिर डिलीवरी होती है.

IVF सिर्फ एक बार ही ट्राई कर सकते हैं?

डॉक्टर मनन गुप्ता के मुताबिक, ये बात सच नहीं है. IVF बार-बार ट्राई किया जा सकता है. कई लोग 10-11 बार तक IVF ट्राई करते हैं. कई मामलों में एक ही व्यक्ति 5–6 बार IVF कराता है. IVF ट्राई करने की कोई लिमिट नहीं है. लेकिन बार-बार IVF कराने से हेल्थ रिस्क बढ़ जाते हैं.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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