पतली कमर के लिए पसलियां निकलवा रहे लोग, ये सेफ़ है या नहीं, डॉक्टर से समझिए
डॉक्टर से जानेंगे कि रिब रिमूवल सर्जरी कैसे की जाती है. इसके क्या रिस्क हैं. ये भी पता करेंगे कि पसलियां शरीर के लिए कितनी ज़रूरी हैं. और, पतली कमर पाने के दूसरे बेहतर तरीके क्या हैं.

वज़न घटाने के लिए इंसान क्या कुछ नहीं करता. घंटों जिम में बिताता है. डाइटिंग करता है. कभी कीटो, कभी वॉटर तो कभी सिर्फ जूस पीता है. कई लोग वज़न घटाने के लिए सर्जरी भी कराते हैं. लेकिन अब एक नया ट्रेंड चल रहा है- पतली कमर पाने के लिए पसलियां तुड़वाना.
ऐसे लोग जिनका वज़न पहले से ही कम है. वो और स्लिम दिखने के लिए रिब रिमूवल सर्जरी करवा रहे हैं. ये शरीर के लिए मेडिकली बिल्कुल भी ठीक नहीं है. इसलिए डॉक्टर से जानेंगे कि रिब रिमूवल सर्जरी कैसे की जाती है. इसके क्या रिस्क हैं. ये भी पता करेंगे कि पसलियां शरीर के लिए कितनी ज़रूरी हैं. और, पतली कमर पाने के दूसरे बेहतर तरीके क्या हैं.
रिब रिमूवल सर्जरी कैसे की जाती है?ये हमें बताया डॉक्टर स्वप्ना अठावले ने.

आजकल रिब रिमूवल सर्जरी का ट्रेंड तेज़ी से बढ़ रहा है. इस सर्जरी के लिए मरीज़ को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है. आमतौर पर ये सर्जरी 1 से 2 घंटे तक चलती है. इसमें शरीर की नीचे वाली पसलियों, यानी 11वीं और 12वीं फ्लोटिंग रिब्स को हटाया जाता है. ये सर्जरी छोटे कट के जरिए की जाती है. रिब रिमूवल सर्जरी प्लास्टिक सर्जन करते हैं.
रिब रिमूवल सर्जरी में रिस्क क्या हैं?रिब रिमूवल सर्जरी एस्थेटिक (कॉस्मेटिक) सर्जरी है, यानी इसे शरीर का लुक बदलने के लिए किया जाता है. इस सर्जरी से पहले ये समझना ज़रूरी है कि इसका सही कारण क्या है. ये सर्जरी आमतौर पर दुबली शरीर वाली लड़कियों में ही की जाती है. ओबीस लोगों में रिब हटाने से कोई खास फर्क नहीं आएगा. दुबली लड़कियों में भी इसे सिर्फ एस्थेटिक वजह से किया जाता है, कोई मेडिकल ज़रूरत नहीं होती.
इसमें एक रिस्क ये है कि 11वीं और 12वीं रिब्स से डायाफ्राम की मांसपेशी जुड़ी होती है. जो छाती (थोरेक्स) और पेट (एब्डॉमेन) को अलग करती है. इन रिब्स को हटाने से इस मांसपेशी पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, ये रिब्स किडनी की सुरक्षा भी करती हैं. इसलिए इन्हें हटाने से किडनी को चोट लगने का रिस्क बढ़ सकता है.

पसलियां फेफड़ों और दिल को सेफ रखने के लिए एक कवच का काम करती हैं. लेकिन नीचे की पसलियां, यानी 11वीं और 12वीं रिब्स, पूरी तरह जुड़ी हुई नहीं होतीं. इसलिए दिल और फेफड़ों की सुरक्षा में इनका ज़्यादा योगदान नहीं होता. इसी वजह से कुछ मामलों में इन्हें एस्थेटिक के लिए हटाया जा सकता है. हालांकि शरीर के पीछे की तरफ ये रिब्स किडनी को सुरक्षा देती हैं.
पतली कमर पाने के दूसरे बेहतर तरीके क्या हैं?पतली कमर पाने के लिए सबसे ज़रूरी है कि आपका ओवरऑल BMI कंट्रोल में हो. अगर शरीर में मोटापा ज़्यादा है, तो सिर्फ कमर पतली करने की कोशिश काम नहीं करेगी. इसलिए सबसे पहले पूरे शरीर का फैट कम करना ज़रूरी है. जब ओवरऑल फैट कम होगा, तभी कमर का सही कर्व (शेप) दिखेगा. शुरुआत हमेशा वेट लॉस ट्रीटमेंट से करनी चाहिए. इसके लिए सर्जिकल और नॉन-सर्जिकल दोनों ऑप्शन मौजूद हैं.
कुछ दवाएं भी होती हैं, लेकिन उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए. पहले वज़न कम करें. उसके बाद अगर कमर के आसपास की चर्बी कम करनी हो, तो लिपोसक्शन एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसमें कमर के आसपास जमा एक्सेस फैट को तकनीक के जरिए निकाला जाता है. इसकी रिकवरी भी जल्दी होती है, और ये रिब रिमूवल सर्जरी से बेहतर है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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