इंदौर में कई मौतों की वजह बना गंदा पानी आपके घर में आए तो क्या करें?
सीवेज के पानी में इंसानों और जानवरों का मल-मूत्र होता है. इसमें घर का गंदा पानी और फैक्ट्रियों से निकला कचरा भी होता है. इस कारण सीवेज के पानी में हानिकारक बैक्टीरिया पाए जाते हैं. जैसे ई. कोलाई, साल्मोनेला, शिगेला और विब्रियो कॉलेरी वगैरा. विब्रियो कॉलेरी से हैजा हो सकता है.
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देश का सबसे साफ शहर इंदौर. यहां के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कथित तौर पर अब तक कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है. बड़ी संख्या में लोग बीमार हैं. 200 के करीब अस्पताल में भर्ती हैं. ऐसा कई मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है. लेकिन मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि दूषित पानी से 4 मौतें हुई हैं. वहीं मेयर और मंत्री आंकड़ा 7 से 9 के बीच बता रहे हैं.
भागीरथपुरा में लोगों के बीमार पड़ने की शुरुआत 29 दिसंबर 2025 से हुई. उल्टियां और दस्त लगने की वजह से लोग अस्पताल में भर्ती होने लगे. धीरे-धीरे बीमारों की संख्या बढ़ने लगी. तब जाकर प्रशासन के लिए मामला गंभीर हुआ. लेकिन इलाके के लोग काफी लंबे वक्त से पानी में बदबू और कड़वाहट की शिकायत प्रशासन से कर रहे थे. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि शिकायतों का सिलसिला पिछले करीब डेढ़ साल से चल रहा था. दिसंबर के आखिरी हफ्तों में इनमें तेज़ी आई थी. लेकिन प्रशासन ने कुछ किया नहीं.
जांच में सामने आया है कि पाइपलाइन में लीकेज की वजह से पीने का पानी दूषित हुआ. जिससे लोग बीमार पड़े.

असल में यहां नर्मदा नदी से आने वाली पानी की मेन पाइपलाइन में लीकेज हो गया. जहां लीकेज हुआ, उसके ऊपर एक शौचालय बना हुआ है. दोनों के बीच में कोई सेफ्टी टैंक भी नहीं है. इस वजह से सीवर का पानी, सीधे पीने के पानी से मिल गया.
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे का कहना है कि अब भागीरथपुरा में पानी की पूरी पाइपलाइन की जांच हो रही है. ताकि पता चल सके कि किसी और जगह पर तो लीकेज नहीं है. साथ ही, एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. ताकि टूटी वॉटर पाइपलाइन्स और कंटैमिनेशन का हल किया जा सके.
इस मामले का संज्ञान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी लिया है. आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर, दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है.
कायदे से तो होना ये चाहिए था कि पहली शिकायत मिलते ही प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए थे. पानी की जांच करनी चाहिए थी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब नतीजा सबके सामने है.

किम्स हॉस्पिटल, ठाणे में इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट डॉक्टर अनिकेत मूले बताते हैं कि सीवेज के पानी में इंसानों और जानवरों का मल-मूत्र होता है. इसमें घर का गंदा पानी और फैक्ट्रियों से निकला कचरा भी होता है. इस कारण सीवेज के पानी में हानिकारक बैक्टीरिया पाए जाते हैं. जैसे ई. कोलाई, साल्मोनेला, शिगेला और विब्रियो कॉलेरी वगैरा. विब्रियो कॉलेरी से हैजा हो सकता है.
सीवेज के पानी में वायरस भी हो सकते हैं. जैसे हेपेटाइटिस A, E, रोटावायरस और नॉरोवायरस. साथ ही, इसमें पैरासाइट्स और कीड़ों के अंडे भी मौजूद हो सकते हैं.
सीवेज के पानी में हानिकारक केमिकल्स भी होते हैं. जैसे अमोनिया, नाइट्रेट्स, डिटर्जेंट, कीटनाशक और सीसा या आर्सेनिक जैसे हेवी मेटल्स. इनमें से कई तो ऐसे हैं, जो स्मेल या टेस्ट से पहचाने नहीं जा सकते.
जब कोई ऐसा दूषित पानी पीता है. तो उसे उल्टी, दस्त, टायफॉइड, हैजा और हेपेटाइटिस A या E इंफेक्शन हो सकता है. अगर ऐसा पानी कई दिनों तक पिया जाए. तो शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है. ज़रूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है. इलेक्ट्रोलाइट्स एक तरह के मिनरल्स होते हैं. इनकी कमी से थकान, सुस्ती और चक्कर आने जैसी समस्याएं होती हैं. साथ ही, लिवर और किडनी जैसे ज़रूरी अंगों को भी नुकसान पहुंचता है.
दूषित पानी लंबे वक्त तक पीने से बच्चों का विकास रुक जाता है. कुपोषण होता है. वहीं एडल्ट्स का इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाता है. यानी शरीर के बीमारियों से लड़ने की क्षमता घट जाती है.

अगर शरीर में बहुत ज़्यादा पानी की कमी हो जाए, या व्यक्ति को हैजा या फिर टायफॉइड हो जाए. और समय पर इलाज न मिले, तो मौत भी हो सकती है. बच्चों, बुज़ुर्गों, प्रेग्नेंट महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को इसका रिस्क ज़्यादा होता है.
वैसे पानी से फैलने वाली बीमारियों के शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं. इसलिए इन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है. और, ऐसा करना बहुत ख़तरनाक हो सकता है. अगर आपको लग रहा है कि पानी गंदा है. अचानक हल्के दस्त लग गए हैं. पेट दर्द या पेट में ऐंठन हो रही है. उबकाई आ रही है. बहुत कमज़ोरी लग रही है. सिरदर्द है. हल्का बुखार आ रहा है. मुंह सूख रहा और खूब प्यास लग रही है. तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं.
अगर किसी ने दूषित पानी पिया है, जिसके बाद दस्त हो रहे हैं. उल्टियां आ रही हैं तो तुरंत Oral Rehydration Solution यानी ORS पिएं. ये शरीर में पानी और ज़रूरी मिनरल्स की कमी पूरी करता है. साथ ही, हल्का और सादा खाना खाएं. लक्षणों पर नज़र रखें. अगर दस्त या उल्टी आना जारी रहे. स्टूल में खून आए. बुखार हो. कमज़ोर लगे, चक्कर आएं. तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.
पानी में ज़रा भी गड़बड़ी लगे. उसका स्वाद, रंग बदला हुआ लगे. बदबू आए. या उसमें कुछ कण दिखाई दें, तो ऐसा पानी इस्तेमाल न करें. पीने, खाना पकाने, दांत साफ करने और फल-सब्ज़ियां को धोने के लिए उबला और साफ पानी ही इस्तेमाल करें. आपके घर में जो पानी की टंकी है. उसे हर कुछ वक्त में ज़रूर साफ़ करें. अगर नल से गंदा पानी आ रहा है, तो तुरंत प्रशासन को बताएं.
हालांकि कई बार साफ दिखने वाला पानी भी दूषित हो सकता है. इसलिए अगर आप ऐसे एरिया में रहते हैं. जहां अक्सर दूषित पानी आता है. तो उसे 10-15 मिनट तक उबालें. फिर ही इस्तेमाल करें. आप RO या UV टेक्नीक वाला वॉटर प्यूरिफायर भी लगवा सकते हैं. अगर प्रशासन से पानी में क्लोरीन टैबलेट डालने की सलाह मिली है. तो वो भी कर सकते हैं. जब पानी साफ हो जाए. तो उसे साफ और ढके हुए बर्तन में ही रखें. ताकि वो दोबारा दूषित न हो पाए.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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