Ozempic जैसी दवाएं आपका वजन तो घटा देंगी, लेकिन शरीर का क्या हाल होगा?
कई लोगों को लगता है कि अगर वो ओज़ेम्पिक या उसके जैसी दूसरी कोई दवा ले रहे हैं तो वो चाहें जितना भी खा लें, वज़न नहीं बढ़ेगा. ऐसा नहीं होता.

ओज़ेम्पिक, वेगोवी, मोन्जारो. ये नाम आजकल आप खूब सुन रहे होंगे. ये हैं डायबिटीज़ और वज़न घटाने की 'जादुई' दवाएं. दुनियाभर में सेलेब्स ने इन दवाओं का इस्तेमाल करके तेज़ी से वज़न घटाया है. जैसे टेस्ला और X के मालिक एलन मस्क. ओपरा विनफ्रे. टेनिस स्टार सेरेना विलियम्स. एक्ट्रेस एमी शुमर वगैरा वगैरा. भारत में भी कई लोगों ने इन दवाओं की मदद से वेट लॉस किया है. बस पब्लिकली कुबूला नहीं है.
ओज़ेम्पिक, वेगोवी और मोन्जारो तीनों ही भारत में लॉन्च हो चुकी हैं. वैसे तो ये डायबिटीज़ की दवाएं हैं. लेकिन ओबेसिटी यानी मोटापा घटाने में भी बहुत कारगर है. ये सभी दवाएं GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाओं के ग्रुप में आती हैं. GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट वो दवाएं हैं, जो टाइप-2 डायबिटीज़ के इलाज में काम आती हैं. ये दवाएं GLP-1 नाम के हॉर्मोन की नकल उतारती हैं. GLP-1 यानी ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 हॉर्मोन. ये हाज़मे से जुड़ा हॉर्मोन है.

इन दवाओं से लोगों का वज़न तो कम हुआ. लेकिन एक बड़ी दिक्कत भी देखी गई है. शरीर में पोषक तत्वों की कमी.
ओबेसिटी पिलर्स नाम का एक जर्नल है. इसमें सितंबर 2025 में एक स्टडी छपी. ये स्टडी साढ़े 4 लाख से ज़्यादा लोगों पर की गई. ये सभी लोग GLP-1 दवाएं ले रहे थे. 2017 से 2021 के बीच इनका डेटा इकट्ठा करके स्टडी की गई. पता चला कि GLP-1 दवाएं लेने वाले करीब 13% मरीज़ों में 6 महीने के अंदर ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी देखी गई. वहीं, लगभग 22.5% लोग ऐसे थे, जिनमें 1 साल के अंदर ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी हो गई. इनमें ज़रूरी विटामिन्स, मिनरल्स, आयरन और प्रोटीन की कमी शामिल है.
जब कोई व्यक्ति GLP-1 दवाएं लेता है. तो उसकी भूख कम हो जाती है. ओबेसिटी पिलर्स जर्नल में छपी एक और स्टडी के मुताबिक, ये दवाएं लेने के बाद लोग रोज़ का खाना 16 से 40% तक कम कर देते हैं.

देखिए, कई लोगों को लगता है कि अगर वो ओज़ेम्पिक या उसके जैसी दूसरी कोई दवा ले रहे हैं तो वो चाहें जितना भी खा लें, वज़न नहीं बढ़ेगा. ऐसा नहीं होता.
हमारे शरीर में एक हॉर्मोन होता है. GLP-1. ये भूख को कंट्रोल करता है. इसके रिलीज़ होने से पेट भरा हुआ महसूस होता है. व्यक्ति कम खाता है और वज़न घटाने में मदद मिलती है. शरीर में नैचुरली बनने वाला GLP-1, खाना खाने के कुछ ही मिनटों बाद तक काम करता है. ज़्यादा से ज़्यादा आधा घंटा. जब इसी GLP-1 की नकल उतारने वाले वाली दवाएं बनती हैं, तो ये लगातार असर करती हैं. इससे शरीर को लगता है, जैसे असली GLP-1 हॉर्मोन रिलीज़ हो रहा है और भूख नहीं लगती.
ऐसा करके ये दवाएं डायबिटीज़ के मरीज़ों में दिनभर ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रखती हैं. खासकर खाने के बाद. वहीं, जो मोटापे से परेशान हैं. उनमें ये दिमाग को भूख न लगने का सिग्नल भेजती हैं. इससे व्यक्ति अपने खाने पर कंट्रोल रखता है. ज़्यादा नहीं खाता. उसके लिए डाइट करना आसान हो जाता है.

अब खाना भले ही कम हो जाए. लेकिन शरीर को तो ज़रूरत भर प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स चाहिए ही, ताकि सेल्स, मांसपेशियां और अंग सही से काम कर पाएं. अगर खाने में ये ज़रूरी पोषक तत्व नहीं होंगे, तो शरीर में पोषण की कमी हो सकती है.
अगर ऐसा लंबे वक्त तक रहे, तो मांसपेशियां और हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं. इम्यूनिटी कमज़ोर हो जाती है. खून की कमी हो जाती है. दिमाग और नसों से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं.
कई रिसर्च बताती हैं कि जब लोग GLP-1 दवाएं लेना बंद करते हैं. तब उनका वज़न फिर बढ़ने लगता है. यानी इन दवाओं का इस्तेमाल लंबे वक्त तक करना पड़ सकता है. इससे शरीर में ज़रूरी पोषक तत्वों की लगातार कमी बनी रहती है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह है.
इसलिए हमने मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली में एंडोक्रिनोलॉजी डिपार्टमेंट की कंसल्टेंट, डॉक्टर प्रियंवदा त्यागी से पूछा कि ओबेसिटी और डायबिटीज़ के जिन मरीज़ों को GLP-1 दवाएं दी जा रही हैं. उनमें ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी न हो. उसके लिए क्या कर सकते हैं?

डॉक्टर प्रियंवदा बताती हैं कि जब GLP-1 दवाएं दी जाती हैं, तब मरीज़ की डाइट का भी बहुत ध्यान रखा जाता है. सिर्फ दवा देना काफी नहीं है. मरीज़ को प्रोटीन से भरपूर चीज़ें खाने को कहा जाता है. इससे वज़न घटने के दौरान मांसपेशियां कमज़ोर नहीं होतीं. शरीर की ताकत बनी रहती है. साथ ही, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने को भी कहा जाता है. ताकि मसल लॉस न हो.
मरीज़ की डाइट में रंग-बिरंगी सब्ज़ियां और फल ज़्यादा होने चाहिए. ये पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. पालक, मेथी और बथुआ जैसी हरी सब्ज़ियां खासतौर पर फायदेमंद हैं. इनमें विटामिन A और आयरन अच्छी मात्रा में होता है. वहीं कैल्शियम के लिए दूध, दूध से बनी चीज़ें, रागी और मखाने खाने को कहा जाता है.
भारत में विटामिन D की कमी बहुत आम है. इसलिए डॉक्टर अक्सर मरीज़ों को विटामिन D के सप्लीमेंट भी देते हैं.

GLP-1 दवा लेने के बाद किसी मरीज़ का खाना कितना कम होगा. ये दवा की डोज़ पर निर्भर करता है. कम डोज़ से कैलोरीज़ बहुत ज़्यादा नहीं घटती. लेकिन जैसे-जैसे डोज़ बढ़ती है. कुछ मरीज़ों में खाना काफी कम हो जाता है. ऐसे में उन्हें मल्टीविटामिंस दिए जा सकते हैं.
इन दवाओं की वजह से पेट धीरे-धीरे हज़म होता है, इसलिए कुछ चीज़ों से परहेज़ करने को कहा जाता है. जैसे बहुत ज़्यादा फाइबर वाला खाना. इससे पेट ज़्यादा भरा रहता है. जिन चीज़ों से गैस बनती है, उन्हें भी अवॉयड करना चाहिए. जैसे कोल्ड ड्रिंक, फिज़ी ड्रिंक्स, तला-भुना और बहुत ज़्यादा मिर्च-मसाले वाला खाना.
मरीज़ों को खूब पानी पीना है. रोज़ 3 से 3.5 लीटर. साथ में, हर 2-3 घंटे में छोटे-छोटे मील लेने हैं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: सेहत: डायबिटीज़ वाले कौन-सी मिठाइयां खा सकते हैं?

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