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हरियाणा के छांयसा गांव में फैले हेपेटाइटिस और पीलिया से बचना कैसे है?

छांयसा गांव में 1 फरवरी से अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है. अब तक कम से कम 32 लोग संक्रमित मिले हैं. इनमें से 3 हेपेटाइटिस बी से इंफेक्टेड हैं. बाकी हेपेटाइटिस सी से.

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Hepatitis and jaundice outbreak claims lives in Palwal village Chhainsa
स्वास्थ्य विभाग ने गांव में कैंप लगाया हुआ है
19 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 04:41 PM IST)
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हरियाणा का पलवल ज़िला. यहां के छांयसा गांव में 1 फरवरी से अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 4 मौतें हेपेटाइटिस से हुई हैं. वहीं 3 पीलिया से. हालांकि गांव के लोगों का कहना है कि अब तक 20 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है. मरने वालों में कई नाबालिग हैं.

ज़िले के डिप्टी कमिश्नर हरीश कुमार वशिष्ठ ने द हिंदू से बातचीत की. बताया कि 11 फरवरी के बाद से किसी नई मौत की जानकारी नहीं मिली है. न ही किसी नए मरीज़ को अस्पताल में भर्ती किया गया है. जांच में पाया गया है कि सभी मरीज़ों की हालत एक जैसी थी. पहले उन्हें एक्यूट लिवर फेलियर हुआ. फिर मल्टी-ऑर्गन फेलियर. यानी पहले लिवर ने अचानक काम करना बंद किया. इसके बाद दूसरे अंग भी फेल हो गए.

इन लोगों को अचानक हेपेटाइटिस बी, सी या पीलिया क्यों हुआ. ये अब तक पता नहीं चला है. लेकिन प्रशासन को 3-4 कारणों पर शक है. जैसे दूषित पानी. अनसेफ सेक्स. नशे के लिए संक्रमित सिरिंज का इस्तेमाल और स्टेरॉयड इंजेक्शन वगैरा. इसलिए लगातार टेस्ट किए जा रहे हैं, ताकि बीमारी और मौतों की असल वजह पता चल सके.

17 फरवरी को NCDC की टीम ने छांयसा गांव का दौरा किया. NCDC यानी National Centre for Disease Control. यहां टीम ने मृतकों के परिवारवालों से बात की. जाना कि इलाज कहां-कैसे हुआ. लक्षण क्या थे. मृतकों की मेडिकल हिस्ट्री और दूषित पानी की रिपोर्ट भी ली गई. टीम का कहना है कि वो रिपोर्ट तैयार करने के बाद कार्रवाई करेंगे, ताकि आगे कभी इस तरह की स्थिति न बने.

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छांयसा गांव में अब तक 1800 से ज़्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है

पीने के पानी का केमिकल एनालिसिस और हेवी मेटल्स की जांच कराने के निर्देश भी दिए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने गांव में कैंप लगाया हुआ है. पीलिया, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी से जुड़े टेस्ट हो रहे हैं. जिन लोगों का टेस्ट रिज़ल्ट पॉज़िटिव आ रहा है, उन्हें इलाज के लिए अस्पताल रिफर किया जा रहा है. साथ ही, दवाइयां भी दी जा रही हैं. 

अब तक 1800 से ज़्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है. 1600 से ज़्यादा ब्लड सैंपल्स लिए जा चुके हैं. 118 लोगों को हेपेटाइटिस की वैक्सीन भी लगी है. अब तक कम से कम 32 लोग संक्रमित मिले हैं. इनमें से 3 हेपेटाइटिस बी से इंफेक्टेड हैं. बाकी हेपेटाइटिस सी से. स्वास्थ्य विभाग के एक सीनियर डॉक्टर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि फिलहाल किसी भी मरीज़ में लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं.

हालांकि इंफेक्शन फैलने के बाद, गांव के कई लोगों ने बुखार, उल्टी, शरीर में दर्द और खांसी की शिकायत की है.

छांयसा गांव के ज़्यादातर घरों में पानी गांव के बाहर से टैंकरों के ज़रिए आता है. कुछ लोगों के घरों में RO भी लगा है. गांव के लोग रोज़मर्रा के पीने का पानी कुंडियों में स्टोर करते हैं. जिसकी रेगुलर साफ-सफाई ज़रूरी है. घरों में स्टोर किए गए पानी के 31 सैंपल्स में ई.कोलाई बैक्टीरिया मिला है. ये वही बैक्टीरिया है, जो अक्सर पेट से जुड़े इंफेक्शन पैदा करता है. माना जा रहा है कि साफ-सफाई न होने की वजह से ये बैक्टीरिया पनपा. इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने 15 हज़ार से ज़्यादा क्लोरीन की गोलियां भी बांटी हैं. साथ ही, डोर टू डोर स्क्रीनिंग भी की जा रही है. विभाग ने लोगों को साफ-सफाई रखने और उबला पानी पीने की सलाह दी है.

पीलिया, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी क्यों फैलते हैं. ये हमने जाना मेदांता गुरुग्राम में हेपेटोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट, डॉक्टर स्वप्निल धमपलवार से. साथ ही जाने लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके.

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डॉ. स्वप्निल धमपलवार, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी, मेदांता, गुरुग्राम
पीलिया

डॉक्टर स्वप्निल कहते हैं कि पीलिया खुद में कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है. इसमें आंखें और स्किन पीली पड़ जाती है. ऐसा शरीर में बिलीरुबिन बढ़ने से होता है. बिलीरुबिन पीले रंग का पिगमेंट है. ये लिवर में मौजूद पित्त में पाया जाता है. पित्त, लिवर द्वारा बनाया जाता है. जब लिवर हेल्दी होता है, तो वो लगभग सारा बिलीरुबिन शरीर से बाहर निकाल देता है. पीलिया आमतौर पर लिवर की बीमारी जैसे हेपेटाइटिस, पित्त नली में रुकावट और दूषित खाना खाने या पानी पीने से होता है.

पीलिया में आंखें और स्किन पीली पड़ जाती हैं. पेशाब का रंग गहरा हो जाता है. कमज़ोरी लगती है. भूख कम हो जाती है. उल्टी और पेट दर्द भी हो सकता है. अगर वायरल हेपेटाइटिस से होने वाले पीलिया से बचना है. जो दूषित खाने या पानी से फैलता है. तो साफ पानी पिएं. खाना खाने से पहले हाथ धोएं. बाहर का दूषित खाना न खाएं. ज़रूरत पड़ने पर वैक्सीन लगवाएं. जहां तक बात इलाज की है, तो वो कारण पर निर्भर करता है. अगर इंफेक्शन है तो डॉक्टर आराम, साफ खाना और सुरक्षित पानी पीने की सलाह देते हैं. साथ में दवाइयां भी दी जाती हैं.

हेपेटाइटिस

अब बात हेपेटाइटिस की. हेपेटाइटिस यानी लिवर में सूजन. जो कई वजहों से हो सकती है. जब लिवर की सूजन किसी खास वायरस की वजह से होती है, तो इसे वायरल हेपेटाइटिस कहते हैं. हेपेटाइटिस ए, बी, सी और ई वायरल हेपेटाइटिस के ही प्रकार हैं.

हेपेटाइटिस बी और सी आमतौर पर लंबे समय तक रहने वाले इंफेक्शन पैदा करते हैं. ये अनसेफ सेक्स, संक्रमित खून चढ़ाने और संक्रमित सिरिंज के इस्तेमाल से फैल सकते है. अगर मां संक्रमित है. तो वायरस गर्भ में बच्चे तक भी पहुंच सकता है. अगर साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो बार-बार इस्तेमाल किए गए ब्लेड या रेज़र से भी हेपेटाइटिस बी और सी फैल सकता है.

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हेपेटाइटिस यानी लिवर में सूजन आना
हेपेटाइटिस के लक्षण

अक्सर हेपेटाइटिस बी और सी के शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते. लेकिन इन्फेक्शन बढ़ने पर कुछ लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे लगातार थकान. भूख न लगना. उबकाई और उल्टी. पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना. गहरे रंग का पेशाब होना. और स्किन और आंखें पीली पड़ना.  

कभी-कभी हेपेटाइटिस बी में अचानक और गंभीर लक्षण दिख सकते हैं. लेकिन हेपेटाइटिस सी धीरे-धीरे कई सालों तक लिवर को नुकसान पहुंचाता रहता है. हेपेटाइटिस बी और सी जानलेवा हो सकते हैं. इसलिए इनसे बचना बहुत ज़रूरी है.

हेपेटाइटिस से बचाव

हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए वैक्सीन आती है. इसे लगवाएं. पर हेपेटाइटिस सी से बचने के लिए कोई वैक्सीन नहीं है. इसलिए सतर्कता ज़रूरी है. साफ-सफाई का ध्यान रखें. सेफ सेक्स करें. केवल भरोसेमंद ब्लड बैंक से ही खून लें. इंजेक्शन या ब्लड टेस्ट करवाते समय ध्यान रखें कि सिरिंज एकदम नई हो. किसी और का इस्तेमाल किया हुआ ब्लेड या रेज़र दोबारा न इस्तेमाल न करें.

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हेपेटाइटिस के इलाज के दौरान एंटीवायरल दवाइयां दी जा सकती हैं (फोटो: Freepik)
हेपेटाइटिस का इलाज

इलाज की बात करें तो हेपेटाइटिस बी को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता. लेकिन खास एंटीवायरल दवाइयां दी जाती हैं. जो वायरस को दबाती हैं और लिवर को आगे होने वाले नुकसान से बचाती हैं. अगर हेपेटाइटिस बी की वजह से लिवर कैंसर हो जाता है तो सर्जरी के जरिए लिवर का कुछ हिस्सा या पूरा लिवर हटाना पड़ सकता है.

वहीं हेपेटाइटिस सी का इलाज एंटीवायरल दवाइयों से किया जाता है. ज्यादातर मामलों में मरीज़ पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. लेकिन अगर लिवर को बहुत ज़्यादा नुकसान हो चुका है. तो लिवर ट्रांसप्लांट की ज़रूरत पड़ सकती है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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