ओज़ेम्पिक जैसी GLP-1 दवाओं के साइड इफेक्ट्स हैं भयानक, बिना डॉक्टरी राय के न लें
पिछले कुछ वक्त में GLP-1 दवाओं का इस्तेमाल हमारे देश में तेज़ी से बढ़ा है. इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 को एक एडवाइज़री जारी की है.

तेज़ी से वज़न घटाने वाली कुछ दवाएं दुनियाभर में खूब पॉपुलर हैं. जैसे ओज़ेम्पिक, वेगोवी और मोन्जारो. ये दवाएं भारत में भी मिलती हैं. वैसे तो इनका मेन काम टाइप-2 डायबिटीज़ कंट्रोल करना है. पर ये वेट लॉस में भी काफी असरदार हैं. इन दवाओं में सेमाग्लूटाइड, टिरज़ेपटाइड या लिराग्लूटाइड जैसे एक्टिव कॉम्पोनेंट होते हैं. ये कॉम्पोनेंट शरीर में GLP-1 नाम के हॉर्मोन की नकल उतारते हैं. GLP-1 यानी ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-वन. इसी वजह से इन्हें GLP-1 दवाएं भी कहा जाता है.
पिछले कुछ वक्त में इन दवाओं का इस्तेमाल हमारे देश में तेज़ी से बढ़ा है. इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 को एक एडवाइज़री जारी की है. इसमें इन दवाओं के इस्तेमाल, साइड इफेक्ट्स और नियमों से जुड़ी ज़रूरी जानकारी दी गई है. एडवाइज़री में क्या है, एक-एक करके आपको बताते हैं.

GLP-1 ऐसी दवाएं हैं. जो टाइप-2 डायबिटीज़ और ओबेसिटी के इलाज के लिए बनाई गई हैं. ये शरीर में हॉर्मोन्स का बैलेंस सुधारती हैं. इंसुलिन हॉर्मोन बढ़ाती हैं और ग्लूकागन हॉर्मोन घटाती हैं. इससे ब्लड शुगर कंट्रोल में आता है.
ये दवाएं भूख को कंट्रोल करती हैं और पेट खाली होने की प्रक्रिया धीमी कर देती हैं. इससे पेट देर तक भरा हुआ महसूस होता है. आपको भूख कम लगती है और वज़न घटाने में भी मदद मिलती है.
कई तरह की GLP-1 दवाएं अब भारत में बड़ी आसानी से मिलने लगी हैं. इनकी कीमत भी कम हो गई है. इसलिए एक्सपर्ट्स को चिंता है कि कहीं लोग बिना डॉक्टर से पूछे इन्हें लेना शुरू न कर दें. ऐसा करना ख़तरनाक हो सकता है, क्योंकि इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी बहुत हैं.

GLP-1 दवाओं के सबसे आम साइड इफेक्ट्स हैं- भूख न लगना. उबकाई, उल्टी आना. कब्ज़ होना. दस्त लग जाना. कुछ और साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिल सकते हैं. जैसे चक्कर आना. दिल की धड़कन बढ़ना. इंफेक्शन होना. सिरदर्द होना. अपच हो जाना.
इन दवाओं का अनकंट्रोल्ड इस्तेमाल कई रेयर, लेकिन गंभीर साइड इफेक्ट्स भी कर सकता है. जैसे पैनक्रियाज़ में सूजन आना. मेडुलरी थायरॉइड कैंसर होना. अचानक किडनी को नुकसान पहुंचना. डायबिटीज़ की वजह से आंखों में होने वाली दिक्कत यानी डायबिटिक रेटिनोपैथी गंभीर हो जाना. पेट बहुत धीरे-धीरे खाली होना. पित्त की थैली में पथरी की वजह से दर्द या पित्त का रास्ता बंद होना. या फिर आंत में रुकावट आना. ऐसी स्थितियों में तुरंत मेडिकल अटेंशन की ज़रूरत होती है.
कई बार GLP-1 दवाएं लेने के बाद चेहरे पर जमा फैट तेज़ी से कम होता है. इससे चेहरा अंदर धंसा हुआ लगने लगता है. झुर्रियां दिखने लगती हैं. आंखें धंसी हुई लगती हैं. होंठ, गाल और ठुड्डी का आकार बदल जाता है. जबड़े के आसपास की स्किन ढीली होकर लटकने लगती है.
लोगों को कई और दिक्कतें भी हो सकती हैं. जैसे सांस लेने में परेशानी होना. स्किन पर लाल चक्कते या खुजली वाले दाने पड़ना. पेट दर्द होना. निगलने में दिक्कत होना. सीने में जकड़न. ज़्यादा पसीना आना. घबराहट या डर महसूस होना. कई बार ब्लड शुगर लेवल बहुत तेज़ी से कम होता है. जो अपने आप में बड़ी परेशानियां कर सकता है. इसलिए कभी भी खुद से गणित लगाकर GLP-1 दवाएं न खरीदें. भारत में ये दवाएं सिर्फ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट ही लिख सकते हैं. इन्हें बिना पर्चे के नहीं खरीदा जा सकता.

GLP-1 दवाओं की गलत बिक्री और प्रचार रोकने के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने सख्त निगरानी शुरू कर दी है. इसी के तहत, 10 मार्च को दवा बनाने वाली सभी कंपनियों से कहा गया था कि वो ऐसे मिसलीडिंग प्रचार और प्रमोशन बंद कर दें, जो लोगों को बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा लेने के लिए बढ़ावा देते हैं.
हाल के हफ्तों में देशभर में 49 जगहों पर जांच भी हुई. इसमें ऑनलाइन फार्मेसी, गोदाम, थोक विक्रेता, रिटेलर और वेट लॉस क्लीनिक शामिल थे. इस जांच में बिना परमिशन GLP-1 दवाएं बेचने, गलत प्रिस्क्रिप्शन देने और भ्रामक प्रचार करने वालों को नोटिस जारी किए गए थे. आने वाले समय में जांच और सख्ती और बढ़ेगी. जो लोग नियमों को नहीं मानेंगे, उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं. जुर्माना लग सकता है. कड़ी कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. साथ ही, आम लोगों को ये सलाह है कि वो क्वालिफाइड मेडिकल एक्सपर्ट के कहने के बाद ही ये दवाएं का इस्तेमाल करें.
वीडियो: सेहत: भूख बढ़ाने का बेस्ट तरीका!

.webp?width=60)
