पहले गुस्सा, फिर उस गुस्से से इंकार...कहीं पार्टनर आपको गैसलाइट तो नहीं कर रहा?
गैसलाइटिंग में एक इंसान दूसरे इंसान को हमेशा अपने लपेटे में लिए रहता है. उसको इतना कंफ्यूज़ कर देता है कि उसे सच-झूठ में फर्क ही समझ नहीं आता. वो खुद पर डाउट करने लगता है. हर चीज़ के लिए खुद को कसूरवार मानने लगता है. उसके लिए उसका कोई अस्तित्व ही नहीं रहता.
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अच्छी मेंटल हेल्थ के लिए गैसलाइटिंग को पहचानना ज़रूरी है (फोटो: Freepik)
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