नाखूनों में फंगस लगे तो पहले ही लगा लें ये तेल, इंफेक्शन बढ़ना बंद हो जाएगा
नाखूनों पर फंगस क्यों लगता है. इसे घर पर ही कैसे ठीक कर सकते हैं, ये जानेंगे आज. साथ ही समझेंगे कि फंगल नेल इंफेक्शन क्या है. ये क्यों होता है. फंगल नेल इंफेक्शन होने पर नाखून कैसे दिखते हैं. इसका रिस्क किन्हें ज़्यादा है. और फंगल नेल इंफेक्शन से बचाव और इलाज कैसे किया जाए.

आपने ब्रेड और रोटी पर फंगस लगते देखा होगा. कई बार दीवार पर भी फंगस लगा देखा होगा. पर क्या आपको पता है, ये फंगस कई बार आपके नाखूनों पर भी लग जाता है. खासकर पैर के नाखूनों पर. फिर ये धीरे-धीरे नाखूनों में इंफेक्शन कर देता है. इसे फंगल नेल इंफेक्शन या टो-नेल फंगस कहते हैं.
नाखूनों पर फंगस क्यों लगता है. इसे घर पर ही कैसे ठीक कर सकते हैं, ये जानेंगे आज. साथ ही समझेंगे कि फंगल नेल इंफेक्शन क्या है. ये क्यों होता है. फंगल नेल इंफेक्शन होने पर नाखून कैसे दिखते हैं. इसका रिस्क किन्हें ज़्यादा है. और फंगल नेल इंफेक्शन से बचाव और इलाज कैसे किया जाए.
फंगल नेल इंफेक्शन क्या है?ये हमें बताया डॉक्टर प्रिया पूजा ने.

फंगल नेल इंफेक्शन यानी नाखून में फंगस का बढ़ना. ये एक ऐसी समस्या है, जिसमें नाखूनों में फंगस का इंफेक्शन हो जाता है. आमतौर पर ये इंफेक्शन पैरों के नाखूनों में होता है. लेकिन कभी-कभी ये हाथों के नाखूनों में भी हो सकता है.
फंगल नेल इंफेक्शन क्यों होता है?- गीले या पसीने वाले जूते पहनना.
- लंबे समय तक नाखून गीला रखना.
- स्वीमिंग पूल या जिम जैसी सार्वजनिक जगहों पर नंगे पैर चलना.
- साफ-सफाई की कमी.
फंगल नेल इंफेक्शन का रिस्क किन्हें ज़्यादा?- डायबिटीज़ के मरीज़ों में फंगल नेल इंफेक्शन ज़्यादा देखा जाता है.
- कमज़ोर इम्यूनिटी वालों में भी ये ज़्यादा होता है.
- बुज़ुर्गों में भी ये फंगल नेल इंफेक्शन हो सकता है.
- जो लोग जूतों को लंबे समय तक बहुत कसकर पहनते हैं, उनमें भी रिस्क बढ़ जाता है.
- अगर नाखूनों में पहले से चोट या कट है, तो भी फंगस तेज़ी से बढ़ सकता है.

- नाखूनों का रंग बदलकर पीला, भूरा या सफेद हो सकता है.
- कभी-कभी पीले, भूरे या सफेद रंग के धब्बे भी नाखून पर दिख सकते हैं.
- नाखून कठोर और मोटे लगने लगते हैं.
- कभी-कभार नाखून बहुत जल्दी टूटने लगते हैं.
- कई बार नाखून का आकार बदल जाता है.
- नाखून के नीचे गंदगी जमा होने लगती है.
- लंबे समय तक इंफेक्शन रहने पर नाखूनों में दर्द या बदबू भी आ सकती है.
फंगल नेल इंफेक्शन का इलाज और बचावअगर आप लंबे समय तक जूते पहनते हैं और आपको खूब पसीना आता है, तो जूते पहनने से पहले पैरों में पाउडर छिड़कें. पैरों को देर तक पानी में भिगोकर न रखें. अगर नाखूनों में फंगल इंफेक्शन शुरू ही हुआ है, तो दिन में एक-दो बार टी ट्री ऑयल लगा सकते हैं. नारियल के तेल में एंटीफंगल गुण होते हैं, इसे लगाने से भी फायदा मिल सकता है.
अगर फंगल नेल इंफेक्शन काफी दिनों से हैं, तो शायद घरेलू नुस्खों से काम न बने. ऐसे में आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा. आधुनिक लेज़र तकनीक भी उपलब्ध है, जो 1064 नैनोमीटर Nd:YAG और 650 माइक्रोसेकंड पल्स पर काम करती है. इसमें लेज़र की किरणें गहराई तक जाकर फंगस पर कंट्रोल्ड हीट डालती हैं. इससे फंगस के सेल्स और उसकी मेम्ब्रेन डैमेज हो जाते हैं. लेज़र आसपास के ग्रोथ एनवायरनमेंट को भी खत्म कर देता है. इससे फंगस दोबारा बढ़ नहीं पाता और आपकी नॉर्मल स्किन सुरक्षित रहती है.
अगर आपके पैर में भी फंगल नेल इंफेक्शन है, और काफी टाइम से है. तो अब इसे नज़रअंदाज़ न करें. तुरंत डॉक्टर से मिलकर इलाज कराएं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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