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ये 4 लक्षण जान लिए तो हाई बीपी से बच जाएंगे, वर्ना गंभीर हो सकती है बीमारी

आजकल कम उम्र में ही लोगों का ब्लड प्रेशर हाई हो रहा है. इसके पीछे कई सारी वजहें हैं, जैसे लाइफस्टाइल. अगर लाइफस्टाइल ख़राब है, तो ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है.

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2 जून 2026 (पब्लिश्ड: 03:52 PM IST)
four silent symptoms of hypertension you should know
देश में 22 करोड़ से ज़्यादा लोगों को हाई बीपी है
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हाई ब्लड प्रेशर. इसे अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है. क्यों? क्योंकि कई लोगों में लंबे समय तक कोई साफ लक्षण नहीं दिखते. पर ये बात पूरी तरह सच नहीं है. शरीर अक्सर कई छोटे-छोटे संकेत देता है. जिसे लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं. 

आज पता करेंगे हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर के साइलेंट लक्षण. डॉक्टर साहब से ये भी जानेंगे कि आजकल कम उम्र में ही बीपी हाई क्यों हो रहा. कब डॉक्टर से मिलना चाहिए. हर कितने वक्त में बीपी चेक कराना चाहिए, और हाइपरटेंशन का रिस्क घटाने के आसान तरीके क्या हैं. 

कम उम्र में ही बीपी हाई क्यों?

ये हमें बताया डॉक्टर प्रभात रंजन सिन्हा ने. 

dr prabhat ranjan sinha
डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा, डायरेक्टर एंड यूनिट हेड, इंटरनल मेडिसिन, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, द्वारका

आजकल कम उम्र में ही लोगों का ब्लड प्रेशर हाई हो रहा है. इसके पीछे कई सारी वजहें हैं, जैसे लाइफस्टाइल. अगर लाइफस्टाइल ख़राब है, तो ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. अगर लाइफस्टाइल बहुत सुस्त है. आप बिल्कुल फिज़िकल एक्टिविटी नहीं करते, तब ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. 

ओबेसिटी यानी मोटापा देश में महामारी की तरह बढ़ रहा है. ये एक बहुत बड़ी समस्या है. अगर खाने में घी, तेल, वसा और नमक बहुत ज़्यादा है. तब कम उम्र में ही बीपी हाई हो सकता है. 

कुछ जेनेटिक कारण भी होते हैं. अगर कम उम्र में ही किडनी, थायरॉइड या दिल की बीमारियां हैं, तब व्यक्ति को कम उम्र में ही हाई बीपी या हाइपरटेंशन हो सकता है.

हाई बीपी के 7 साइलेंट लक्षण

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण पता होना ज़रूरी हैं. बीपी बढ़ने पर सिरदर्द होता है. चक्कर आते हैं. थकान जल्दी लगती है. नींद से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं. अगर ब्लड प्रेशर काफी ज़्यादा बढ़ जाए. तब चलते वक्त सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. कभी-कभी दिल पर असर पड़ने से पैरों में सूजन होने लगती है.

अगर ब्लड प्रेशर 200 के ऊपर पहुंच जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है. ऐसे में ब्रेन के अंदर ब्लीडिंग यानी ब्रेन हेमरेज का ख़तरा बढ़ जाता है. ये हाई ब्लड प्रेशर के कॉम्प्लिकेशंस हैं. लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से दिल पर लगातार दबाव पड़ता है. इसकी वजह से दिल की रिदम में गड़बड़ी हो सकती है. इसलिए शरीर में दिखने वाले लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. ये समझना ज़रूरी है कि कहीं इसकी वजह हाई बीपी तो नहीं. इसके लिए ब्लड प्रेशर की नियमित जांच ज़रूरी है.

resting blood pressure
 सुबह अच्छी नींद के बाद उठने पर बीपी चेक करना सबसे सही माना जाता है
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

अगर डॉक्टर को लगता है कि उम्र और लिंग के हिसाब से आपका ब्लड प्रेशर ज़्यादा है. तब वो आपको डाइट सुधारने की सलाह दे सकते हैं. खाने में नमक कम करने को कहा जाएगा. रेगुलरली ब्लड प्रेशर की जांच भी करानी होगी. ये जानना ज़रूरी है कि हर कितने वक्त में बीपी चेक कराना चाहिए. हमेशा रेस्टिंग ब्लड प्रेशर ही मापना चाहिए. जैसे सुबह अच्छी नींद के बाद उठने पर बीपी चेक करना सबसे सही माना जाता है. उस समय ली गई रीडिंग शरीर का असली रेस्टिंग ब्लड प्रेशर बताता है. कुछ लोगों को बार-बार ब्लड प्रेशर जांचने की ज़रूरत पड़ सकती है. ये इस बात पर निर्भर करता है कि उनका बीपी कितना ऊपर-नीचे हो रहा है.

हाई बीपी का रिस्क घटाने के आसान तरीके

हाई बीपी घटाने के लिए लाइफस्टाइल में कई बदलाव करने होंगे. जैसे अपने खाने में नमक कम कर दें. घी, तेल या वसा वाली चीज़ें ज़्यादा न खाएं. रेगुलरली हेल्थ चेकअप करवाएं. अगर किसी और वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है. जैसे किडनी, थायरॉइड या कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत के चलते. तब ये दिक्कतें दूर करने की दवाइयां लेनी होंगी, ताकि बीपी भी कम हो सके. अपनी लाइफस्टाइल में एक्सरसाइज़ और अच्छी डाइट ज़रूर शामिल करें. कोशिश करें कि स्ट्रेस कम लें, इससे बीपी कंट्रोल करने में मदद मिलती है.

एक हेल्दी एडल्ट का ब्लड प्रेशर 120/80 mm Hg से कम होना चाहिए. लेकिन अगर ब्लड प्रेशर इससे ज़्यादा आ रहा है और कई बार ऐसा हो चुका है, तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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