एक के खर्राटों से सब परेशान, नेजल स्ट्रिप सही से लगाई तो पूरा परिवार चैन की नींद सोएगा
हमारी नाक में एक पतला हिस्सा होता है, जिसे नेज़ल वॉल्व एरिया कहा जाता है. नेज़ल स्ट्रिप लगाने से ये हिस्सा थोड़ा खुल जाता है. इससे नाक से हवा का आना-जाना बेहतर हो जाता है.

खर्राटे. ये लगभग हर घर की समस्या है. या तो हम खुद खर्राटे लेते हैं. या फिर हमारे परिवार का कोई सदस्य. और खर्राटे भले एक व्यक्ति ले, नींद सबकी ख़राब होती है. अब कई लोग खर्राटे कम करने के लिए सहारा लेते हैं नेज़ल स्ट्रिप का. ये एक चिपकने वाली पट्टी होती है. जिसे नाक पर लगाया जाता है. कहते हैं कि इससे नाक से सांस लेना आसान हो जाता है. खर्राटे भी काफी कम हो जाते हैं.
लेकिन क्या ये नेज़ल स्ट्रिप सबके लिए हैं? क्या इन्हें नाक से जुड़ी हर दिक्कत को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है? यही सब जानेंगे आज. डॉक्टर से समझेंगे कि नेज़ल स्ट्रिप के क्या फायदे हैं. इसे लगाने से क्या खर्राटे सच में बंद हो जाते हैं. नेज़ल स्ट्रिप लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. और क्या इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं.
नेज़ल स्ट्रिप के क्या-क्या फायदे हैं?हमने पूछा डॉक्टर शिल्पी बुद्धिराजा से.

सबसे पहले ये समझना ज़रूरी है कि नेज़ल स्ट्रिप क्या करती है. हमारी नाक में एक पतला हिस्सा होता है, जिसे नेज़ल वॉल्व एरिया कहा जाता है. नाक पर नेज़ल स्ट्रिप लगाने से ये हिस्सा थोड़ा खुल जाता है. इससे नाक से हवा का आना-जाना बेहतर हो जाता है. लेकिन नेज़ल स्ट्रिप सिर्फ अस्थायी राहत देती है.
जिन लोगों को एलर्जिक राइनाइटिस, अस्थायी नेज़ल कंजेशन या एक्यूट राइनाइटिस की समस्या है. जो एथलीट्स हैं, बहुत हैवी एक्सरसाइज़ करते हैं या मुंह से सांस लेते हैं. उनके लिए नेज़ल स्ट्रिप काफी फ़ायदेमंद साबित हो सकती है.
नेज़ल स्ट्रिप्स से खर्राटे आने बंद हो जाते हैं?जब नाक बंद होती है या एयरवे में रुकावट होती है, तब हम मुंह खोलकर सांस लेने लगते हैं. ऐसे में गले के पीछे मौजूद तालू वाइब्रेट करता है, जिससे खर्राटों की आवाज़ आती है. नेज़ल स्ट्रिप लगाने से नाक से सांस लेना थोड़ा आसान हो जाता है. स्टडीज़ में देखा गया है कि इससे खर्राटों की तीव्रता 15-20% तक कम हो सकती है. कई मामलों में पार्टनर को भी इसका फ़र्क महसूस होता है. लेकिन खर्राटों के साथ होने वाली स्लीप एपनिया की समस्या में नेज़ल स्ट्रिप ज़्यादा मददगार नहीं होती. रात में ऑक्सीज़न लेवल गिरने पर इसका खास फ़ायदा नहीं देखा गया है. इसलिए अगर आपको ऑक्सीज़न की दिक्कत हो, सांस न आए. रात में चोकिंग महसूस हो तो नेज़ल स्ट्रिप काम नहीं आएंगी. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी है.

मार्केट में नेज़ल स्ट्रिप तीन साइज़ में मिलती हैं- स्मॉल, मीडियम और लार्ज. स्मॉल साइज़ आमतौर पर बच्चों के लिए होता है. मीडियम और लार्ज एडल्ट्स के लिए होता है. ज़्यादातर एडल्ट्स मीडियम साइज़ की नेज़ल स्ट्रिप इस्तेमाल करते हैं. लेकिन जिन लोगों की नाक 5.5 सेमी. से ज़्यादा चौड़ी होती है, उन्हें लार्ज साइज़ की ज़रूरत पड़ सकती है.
नेज़ल स्ट्रिप लगाने से पहले नाक को अच्छी तरह साफ और सुखा लें. इसे नाक के बीच वाले हिस्से पर, जहां नाक का निचला हिस्सा गालों से मिलता है, वहां लगाना चाहिए. स्ट्रिप को हल्का स्ट्रेच करके सही जगह पर चिपकाएं. इसमें एक चिपकने वाला पैच होता है, इसलिए इसे काटना नहीं चाहिए. स्ट्रिप काटने से इसकी पकड़ और असर कम हो सकता है. सही तरीके से लगाने पर नेज़ल पैसेज थोड़ा खुल जाता है और सांस लेना आसान हो सकता है.
नेज़ल स्ट्रिप के साइड इफेक्ट्स भी हैं?अगर नेज़ल स्ट्रिप रात में लगाई है, तो सुबह उसे गुनगुने पानी से हल्की मसाज करते हुए हटाएं. स्ट्रिप को तेज़ी से खींचकर निकालने पर स्किन में जलन या दूसरी दिक्कतें हो सकती हैं. आमतौर पर नेज़ल स्ट्रिप से कोई बड़े साइड इफेक्ट नहीं होते. लेकिन कुछ लोगों को इसके चिपकने वाले हिस्से से एलर्जी हो सकती है. लंबे समय तक इस्तेमाल करने से स्किन में बदलाव या हल्का इंफेक्शन हो सकता है.
स्टडीज़ में नाक बंद रहने की समस्या वाले मामलों में इसका इस्तेमाल करीब 6 महीने तक देखा गया है. अगर आपको लंबे समय तक इसकी ज़रूरत पड़ रही है. तब इसका मतलब नाक में कोई स्थायी रुकावट हो सकती है. जैसे नाक की हड्डी टेढ़ी होना या नाक में पॉलिप्स (मांस जैसी गांठें) होना. ऐसे मामलों में सिर्फ नेज़ल स्ट्रिप ज़्यादा फ़ायदा नहीं करती. आपको डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करवानी चाहिए. ये पता करना ज़रूरी है कि नाक में रुकावट की असली वजह क्या है. नेज़ल स्ट्रिप अस्थायी राहत दे सकती है. लेकिन लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल करना सही नहीं माना जाता. अगर आपको लगे कि नेज़ल स्ट्रिप अब असर नहीं कर रही. तब डॉक्टर से मिलकर सही जांच और इलाज करवाएं.
स्लीप एपनिया एक गंभीर स्थिति है. इसमें सोते वक्त बार-बार कुछ सेकंड्स के लिए सांस रुक जाती है. ऐसा एक रात में कई बार हो सकता है. इसलिए अगर स्लीप एपनिया हो, तो नेज़ल स्ट्रिप के भरोसे न रहें. डॉक्टर से मिलें. वो आपको सी-पैप मशीन लगाने को कह सकते हैं.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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