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एक जैसा नहीं होता हर सिरदर्द, इससे परेशान लोगों के लिए ये जानकारी बहुत काम आएगी

सिरदर्द को दो कैटेगरी में बांटा जाता है. प्राइमरी हेडेक और सेकेंड्री हेडेक. प्राइमरी हेडेक यानी जब सिरदर्द खुद में ही एक बीमारी हो. इसके पीछे कोई और बीमारी न हो. वहीं, सेकेंड्री हेडेक यानी जब सिरदर्द किसी दूसरी वजह या बीमारी के चलते हो.

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different types of headaches causes prevention and treatment
आपको किस तरह का सिरदर्द होता है?
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अदिति अग्निहोत्री
30 मई 2025 (पब्लिश्ड: 10:25 PM IST)
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जब हम देर तक फोन चलाते हैं. टाइम से खाना नहीं खाते हैं. ठीक से सो नहीं पाते हैं. बहुत स्ट्रेस लेते हैं, तो सिरदर्द शुरू हो जाता है. ये एक बहुत ही आम परेशानी है. इस सिरदर्द से निपटने के लिए लोग कभी चाय पीते हैं, तो कभी दवाई खाते हैं. यानी हर बार सिरदर्द का एक ही इलाज. लेकिन हर सिरदर्द एक जैसा नहीं होता. इसलिए उसे ठीक करने का तरीका भी अलग होना चाहिए.

कितने तरीके का होता है सिरदर्द, और इसे ठीक कैसे किया जाए? ये हमने पूछा आर्टेमिस हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट डॉक्टर विवेक बरुन से.

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डॉ. विवेक बरुन, कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, आर्टेमिस हॉस्‍पिटल्‍स

डॉक्टर विवेक कहते हैं कि सिरदर्द कई तरह का होता है. इसे दो कैटेगरी में बांटा जाता है. प्राइमरी हेडेक और सेकेंड्री हेडेक. प्राइमरी हेडेक यानी जब सिरदर्द खुद में ही एक बीमारी हो. इसके पीछे कोई और बीमारी न हो. वहीं, सेकेंड्री हेडेक यानी जब सिरदर्द किसी दूसरी वजह या बीमारी के चलते हो.

पहले बात प्राइमरी हेडेक की. इसमें कई तरह के सिरदर्द आते हैं. जैसे टेंशन हेडेक. ये सबसे आम तरह का सिरदर्द है और किसी को भी हो सकता है. ये ज़्यादा टेंशन लेने, थकान, नींद की कमी और स्क्रीन पर ज़्यादा समय बिताने की वजह से होता है. टेंशन हेडेक सिर के सामने या दोनों तरफ होता है. कभी-कभी सिर के पिछले हिस्से, गर्दन और कंधों में भी दर्द हो सकता है. इसे ठीक करने के लिए लाइफस्टाइल सुधारें. फोन कम चलाएं. टेंशन कम लें. 7 से 8 घंटे सोएं और अच्छे से खाएं-पिएं.

दूसरा है, माइग्रेन. इसमें तेज़ सिरदर्द होता है, जो कंट्रोल नहीं हो पाता. ये दर्द कई बार कुछ घंटों में खत्म हो जाता है, तो कभी कई दिनों तक जारी रहता है. माइग्रेन का दर्द ज़्यादातर सिर के एक हिस्से में होता है. पर ज़रूरी नहीं है कि हर बार ऐसा हो. कई बार ये केवल आंखों के चारों तरफ़ हो सकता है. कई बार कान की तरफ़ हो सकता है. सिर के ऊपरी हिस्से में भी हो सकता है. दर्द में ऐसा महसूस होता है जैसे पल्स चल रही है. नसें तेज़ी से फड़क रही हैं. कई बार आंखों के आगे धुंधलापन छा जाता है. उबकाई, उल्टियां होती हैं. कान में सेंसिटिविटी बढ़ जाती है. बेचैनी और घबराहट होने लगती है. हॉर्मोनल बदलावों, फैमिली हिस्ट्री की वजह से ये हो सकता है. तेज़ आवाज़, तेज़ रोशनी, परफ्यूम की महक, भूख और टाइम पर खाना न खाने की वजह से ये ट्रिगर हो सकता है. माइग्रेन के इलाज में दवाइयां दी जाती हैं. साथ ही, लाइफस्टाइल सुधारने को भी कहा जाता है.

तीसरा है, क्लस्टर हेडेक. इसमें बहुत ही तेज़ और भयंकर दर्द होता है. ये दर्द सिर के एक तरफ होता है और इसका एक पैटर्न होता है. ये रोज़ एक ही टाइम पर एक ही जगह होता है. ऐसा सिरदर्द हर दिन थोड़ी देर होता है और कई महीनों तक रह सकता है. क्लस्टर हेडेक होने का सटीक कारण अभी पता नहीं चल सका है. लेकिन, इसे दिमाग के हाइपोथैलेमस हिस्से से जुड़ा हुआ माना जाता है. अगर परिवार में किसी को क्लस्टर हेडेक है, तो ये आपको भी हो सकता है. ये सिगरेट या शराब पीने, तेज़ रोशनी, गर्मी और कुछ खास दवाओं से ट्रिगर हो सकता है. क्लस्टर हेडेक से बचने के लिए ज़रूरी है- इसके ट्रिगर्स से बचना.

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साइनस हेडेक साइनस में सूजन या इंफेक्शन की वजह से होता है (फोटो: Getty Images)

अब बात सेकेंड्री हेडेक की. इसमें पहला है, साइनस हेडेक. ये साइनस में सूजन या इंफेक्शन की वजह से होता है. साइनस हमारी नाक के दोनों तरफ हड्डी के अंदर खाली जगह होती है. साइनस हेडेक में सिर, आंखों के नीचे या गालों में भारीपन लगता है और दर्द होता है. साथ ही, नाक बंद हो जाती है या बहने लगती है. साइनस हेडेक के इलाज के लिए साइनस में हुए इंफेक्शन को ठीक किया जाता है. इसके लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक्स और भाप लेने की सलाह दे सकते हैं.

दूसरा है, हाइपरटेंशन हेडेक. जब ब्लड प्रेशर बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, तो दिमाग में जो खून की नलियां हैं, उन पर ज़रूरत से ज़्यादा दबाव पड़ने लगता है. इससे सिर में दर्द शुरू हो जाता है और ये दर्द बढ़ता ही जाता है. ज़्यादातर मामलों में ये सिरदर्द दिमाग के पिछले हिस्से पर असर डालता है. साथ ही, कुछ और लक्षण देखने को भी मिल सकते हैं. जैसे उबकाई या उल्टी आना, सांस फूलना, घबराहट होना, डबल विज़न या धुंधला दिखना. हाइपरटेंशन हेडेक से राहत पाने के लिए ज़रूरी है कि बीपी को कंट्रोल में रखा जाए.

तीसरा है, कैफीन हेडेक. जब कोई व्यक्ति बहुत ज़्यादा कैफीन लेता है. या अचानक कैफीन लेना बंद कर देता है. तब कैफीन की नियमित डोज़ न मिलने से सिरदर्द शुरू हो जाता है. कैफीन खाने-पीने की कई चीज़ों में होती है. जैसे चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक और चॉकलेट वगैरह. कैफीन हेडेक में सिर में भारीपन लगता है. सिर के दोनों ओर दर्द होता है. टेंशन हेडेक जैसा. साथ ही, चिड़चिड़ापन, थकावट लगती है और काम में नहीं लगता. इससे राहत पाने के लिए कैफीन की मात्रा कंट्रोल में रखें. अगर ज़्यादा कैफीन ले ली है, तो उसे कम करें. अगर कैफीन से जुड़ी चीज़ें छोड़ रहे हैं. जैसे चाय, कॉफी वगैरह. तो अचानक ऐसा न करें. धीरे-धीरे कैफीन की मात्रा घटाएं. ऐसा करके आप कैफीन हेडेक से राहत पा सकते हैं.

अगर आपको काफी समय से सिरदर्द हो रहा है. ये सिरदर्द जाने का नाम नहीं ले रहा, तो इसे हल्के में न लें. एक बार डॉक्टर से ज़रूर मिलें, ताकि सिरदर्द की सही वजह पता चल सके.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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