कोरोनावायरस के 'सिकाडा' सबवेरिएंट ने ध्यान खींचा, जानें कितना खतरनाक है
कोरोनावायरस के मामले अमेरिका में बढ़ रहे हैं. वजह है वायरस का नया सब-वेरिएंट ‘BA.3.2’. ये कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट का एक नया रूप है. इसे सिकाडा सबवेरिएंट भी कहा जा रहा है.

कोरोनावायरस. जब से आया है, तब से जाने का नाम ही नहीं ले रहा. जब-जब लगता है कि अब कोरोनावायरस के मामले नहीं बढ़ेंगे. तब-तब इसका कोई नया रूप सामने आ जाता है, और केसेज़ बढ़ने लगते हैं. जैसा अभी हो रहा है. कोरोनावायरस के मामले अमेरिका में बढ़ रहे हैं. वजह है वायरस का नया सब-वेरिएंट ‘BA.3.2’.
ये कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट का एक नया रूप है. इसे सिकाडा सबवेरिएंट भी कहा जा रहा है. सिकाडा एक तरह का कीड़ा होता है. ये सालों तक ज़मीन के नीचे रहने के बाद अचानक बाहर निकलता है. बिल्कुल वैसे ही, जैसे ये सबवेरिएंट अचानक उभरा है.
US Centers for Disease Control and Prevention के मुताबिक, BA.3.2 पहली बार 22 नवंबर 2024 को दक्षिण अफ्रीका में मिला था. इसके बाद 11 फरवरी 2026 तक ये कम से कम 23 देशों में पाया जा चुका है. इसमें डेनमार्क, जर्मनी और नीदरलैंड जैसे देश शामिल हैं. अगर अमेरिका की बात करें, तो यहां ये सबवेरिएंट पहली बार 27 जून 2025 को मिला था. एक ऐसे यात्री में, जो नीदरलैंड से सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट आया था. बाद में ये सबवेरिएंट वेस्ट वॉटर यानी गंदे पानी की जांच में भी मिला.

अमेरिका में इस सबवेरिएंट के पहले 3 मरीज़ दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच मिले थे. अच्छी बात ये है कि तीनों ही मरीज़ ठीक हो गए थे. पर अभी हाल ये है कि अमेरिका के लगभग 25 राज्यों में BA.3.2 मिल चुका है. इस सबवेरिएंट में 70-75 जेनेटिक म्यूटेशन पाए गए हैं. यानी ये पहले वाले वेरिएंट्स और सबवेरिएंट्स से काफी अलग है. ये बदलाव इसे शरीर की इम्यूनिटी से बचाने में मदद कर सकते हैं. जिससे व्यक्ति को कोरोनावायरस इंफेक्शन दोबारा या आसानी से हो सकता है.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO ने BA.3.2 को Variant Under Monitoring घोषित किया हुआ है. माने इस पर नज़र तो रखी जा रही है. लेकिन अभी ये Variant Of Concern नहीं है. यानी फिलहाल ये ज़्यादा खतरनाक नहीं माना जा रहा.
कोरोनावायरस के इस नए सबवेरिएंट BA.3.2 के लक्षण क्या हैं? ये कितना गंभीर है? मौजूदा वैक्सीन इस पर कितनी असरदार है? और क्या भारत को डरने की ज़रूरत है? ये सारे सवाल हमने पूछे यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद में इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर, डॉक्टर संतोष कुमार अग्रवाल से.

डॉक्टर संतोष कहते हैं कि BA.3.2 सबवेरिएंट के लक्षण पुराने वेरिएंट जैसे ही हैं. लेकिन एक अहम लक्षण है गले में तेज़ खराश. इसके अलावा गले में तेज़ दर्द और चुभन होना. नाक बंद होना या लगातार पानी निकलना. तेज़ और सूखी खांसी. बुखार आना और साथ में कंपकंपी लगना. बहुत ज़्यादा थकान होना और शरीर दर्द करना. स्वाद या गंध चली जाना. और सांस लेने में थोड़ी परेशानी होना भी इसके लक्षण हैं.
BA.3.2 को बहुत ज़्यादा ख़तरनाक नहीं माना गया है. ज़्यादातर मामलों में लक्षण हल्के या मीडियम है. हालांकि बुज़ुर्ग, प्रेग्नेंट महिलाएं और कमज़ोर इम्यूनिटी वाले सावधानी बरतें, क्योंकि उनमें बीमारी थोड़ी गंभीर हो सकती है.
कोरोनावायरस की अभी जो वैक्सीन मौजूद है, वो इस सबवेरिएंट पर पूरी तरह रोक नहीं लगाती. लेकिन बीमारी को गंभीर होने से रोकती है. ये अस्पताल में भर्ती होने और मौत के रिस्क को भी घटाती है. इसलिए वैक्सीनेशन और बूस्टर डोज़ लेना अभी भी ज़रूरी और फायदेमंद है.

इस सबवेरिएंट का कोई भी मामला भारत में नहीं मिला है. इसलिए हमारे यहां लोगों को डरने की ज़रूरत नहीं है. पर सावधानी बरतते रहें, क्योंकि कोरोना के मामले में दूरी मायने नहीं रखती.
इस सबवेरिएंट से बचने के लिए शारीरिक दूरी बनाएं. भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क लगाएं और सैनिटाइज़र से अपने हाथ साफ करते रहें.
अगर कोरोनावायरस का कोई लक्षण दिखे, तो तुरंत दूसरों से दूरी बना लें. मास्क लगाएं और RT-PCR टेस्ट कराएं. अगर टेस्ट पॉजिटिव आता है तो इलाज लें.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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