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Amul, Country Delight, Mother Dairy के दूध पर उठे सवाल, डॉक्टर ने क्या सलाह दी?

Trustified नाम का एक यूट्यूब चैनल है. इस पर 8 फरवरी 2026 को एक वीडियो अपलोड हुआ. इस वीडियो में बताया गया कि चैनल ने अलग-अलग ब्रांड्स के दूध की माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्टिंग कराई है. इस टेस्टिंग से पता चलता है कि दूध पीने के लिए सेफ़ है या नहीं.

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Coliform bacteria in Amul Milk, Mother Dairy & Country Delight Milk fail test
आप किस ब्रांड का दूध पीते हैं?
11 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 03:57 PM IST)
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ज़िंदगी स्क्विड गेम्स के किसी एपिसोड जैसी हो गई है. हर कदम पर ख़तरा. देखते हैं, अंत तक कौन बचता है. सांस लो तो हवा में ज़हर. पानी में आर्सेनिक जैसे हेवी मेटल्स और गंदगी. फल, सब्ज़ियों में पेस्टीसाइड. अंडों में कार्सिनोजेन. मसालों में मिलावट. यहां खत्म नहीं हुआ. और भी है. इस लिस्ट में जोड़ लीजिए दूध. मम्मी बचपन से दूध पीने के लिए डांटती थीं. लेकिन ये ख़बर सुनने के बाद मम्मी डाटेंगी कि दूध क्यों पिया! अमूल. मदर डेयरी. कंट्री डिलाइट. अगर आप इन ब्रांड्स पर भरोसा करके इनका दूध ख़रीद रहे थे, तो आपका भरोसा चकनाचूर होने वाला है.

Trustified नाम का एक यूट्यूब चैनल है. इस पर 8 फरवरी 2026 को एक वीडियो अपलोड हुआ. इस वीडियो में बताया गया कि चैनल ने अलग-अलग ब्रांड्स के दूध की माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्टिंग कराई है. इस टेस्टिंग से पता चलता है कि दूध पीने के लिए सेफ़ है या नहीं. उसे प्रोसेस करते वक्त साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखा गया है या नहीं. पैकेट में मिलने वाले अमूल ताज़ा और गोल्ड मिल्क की टेस्टिंग की गई. साथ ही, अमूल का टेट्रा मिल्क पैक भी टेस्ट किया गया. इनके अलावा, मदर डेयरी और कंट्री डिलाइट के पैकेट वाले दूध की भी टेस्टिंग हुई.

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Trustified ने 8 फरवरी 2026 को दूध की टेस्टिंग से जुड़ा वीडियो अपलोड किया

जानते हैं क्या पता चला? अमूल ताज़ा और अमूल गोल्ड मिल्क में कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया का लेवल बहुत ज़्यादा निकला. FSSAI यानी Food Safety Standards Authority Of India की सेफ़ लिमिट से कहीं ज़्यादा. FSSAI के मुताबिक, प्रोडक्ट में 10 Colony-Forming Units Per Milliliter से ज़्यादा कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया नहीं होना चाहिए. लेकिन अमूल ताज़ा में निकले 980 CFU Per ml. वहीं अमूल गोल्ड में कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया का लेवल था- 25 CFU Per ml.

अब बात मदर डेयरी काउ मिल्क की. इसमें टोटल प्लेट काउंट यानी TPC बहुत ज़्यादा मिला. TPC यानी दूध में मौजूद कुल बैक्टीरिया की संख्या. अगर TPC ज़्यादा है, तो इसका मतलब दूध में बैक्टीरिया बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं. ये खराब प्रोसेसिंग, गलत तापमान पर स्टोरेज या दूध के पुराने होने का इशारा है. ऐसा दूध जल्दी खराब होता है और पीने के लिए सेफ नहीं माना जाता. मदर डेयरी काउ मिल्क में TPC मिला 2 लाख 40,000 CFU Per ml. जबकि सेफ़ लिमिट है 30 हज़ार CFU per ml. कंट्री डिलाइट के काउ मिल्क में भी टोटल प्लेट काउंट ज़्यादा मिला. 60, 000CFU Per ml. यानी सेफ़ लिमिट से दोगुना.

बस अमूल का टेट्रा मिल्क पैक सारे मानकों पर खरा उतरा.

अमूल के दूध में कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया ज़्यादा मात्रा में मिलने का क्या मतलब है? इससे शरीर को क्या नुकसान पहुंचता है? ये सवाल हमने पूछा पारस हेल्थ, गुरुग्राम में गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, डॉक्टर प्रकृति शाह से. ये भी जाना कि जब पैकेट वाला दूध पीने के लिए सेफ नहीं है, तो आम लोग क्या करें? पैकेट वाले दूध को पीने के लिए सेफ़ कैसे बनाया जा सकता है.

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डॉ. प्रकृति शाह, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, पारस हेल्थ, गुरुग्राम

डॉक्टर प्रकृति कहती हैं कि कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया आमतौर पर इंसानों और जानवरों की आंतों में पाए जाते हैं. ये गंदे पानी, मल, मिट्टी और गंदी जगहों पर भी मिल जाते हैं. ये अपने आप में हमेशा खतरनाक नहीं होते. लेकिन इस बात का इशारा ज़रूर करते हैं कि कहीं न कहीं प्रोडक्ट का गंदगी या दूषित पानी से संपर्क हुआ है. अगर दूध में बहुत ज़्यादा कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया मिले हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि दूध निकालने, प्रोसेस करने, पैक करने या स्टोरेज के दौरान साफ़-सफ़ाई का ध्यान नहीं रखा गया. यानी दूध किसी न किसी लेवल पर गंदगी या दूषित पानी के संपर्क में आया.

ज़्यादा कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया वाला दूध पीने से पेट से जुड़ी कई दिक्कतें हो सकती हैं. जैसे दस्त, उल्टी, पेट में दर्द, गैस और बुखार. छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों और कमज़ोर इम्यूनिटी वालों में इंफेक्शन ज़्यादा गंभीर हो सकता है. डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है.

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टेट्रा पैक वाला दूध खरीदें, वो ज़्यादा सेफ़ हैं 

अब बात टोटल प्लेट काउंट की. अगर दूध में TPC ज़्यादा है. तो इसका मतलब है दूध निकालने से लेकर आप तक पहुंचाने तक, कहीं न कहीं साफ़-सफ़ाई को ताक पर रखा गया है.

अगर आप दुकान से दूध ख़रीदते हैं. तो टेट्रा पैक वाला दूध इस्तेमाल करें. वो पूरी तरह सील्ड होता है और हाई टेम्परेचर पर प्रोसेस किया जाता है. जब भी दूध खरीदें. उसकी स्मेल, टेस्ट और एक्सपायरी डेट ज़रूर देखें.

जहां तक बात पैकेट वाले दूध को सेफ़ बनाने की है, तो वैसे इसे उबालने की ज़रूरत नहीं होती. इसे पहले ही तेज़ आंच पर उबाल दिया जाता है. लेकिन अगर दूध की क्वालिटी पर शक हो, तो इसे अच्छे से उबालने के बाद ही इस्तेमाल करें. उबालने से ज़्यादातर हानिकारक बैक्टीरिया मर जाते हैं.

FSSAI, जिसका काम देश में मिलने वाले खाने-पीने के प्रोडक्ट्स की क्वालिटी जांचना है. उसे इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए. ये बेहद ज़रूरी है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: क्यों बढ़ रहे मीज़ल्स के मामले?

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