भारत में हर साल हजारों महिलाओं की जान ले रहे सर्विकल कैंसर के बारे में एक-एक बात जानें
सर्विकल कैंसर इकलौता ऐसा कैंसर है, जिसका पता कैंसर होने से पहले चल जाता है. वो भी बहुत ही सिंपल से टेस्ट की मदद से. अगर इस दौरान सर्विकल कैंसर का पता चल जाए, तो इसे जड़ से ठीक किया जा सकता है. यानी कैंसर का नो ख़तरा.

सर्विकल कैंसर. औरतों को होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है. आपको पता है, NCBI यानी नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के मुताबिक, हिंदुस्तान में हर साल करीब 1 लाख 22 हजार 844 से ज़्यादा औरतों को सर्विकल कैंसर होता है. वहीं 68,477 से ज़्यादा औरतों की इससे मौत हो जाती है. दुःख की बात ये है कि इतने भारी आकड़ों के बावजूद, सर्विकल कैंसर को लेकर हमारे देश में बहुत ही कम जागरूकता है.
सर्विकल कैंसर इकलौता ऐसा कैंसर है, जिसका पता कैंसर होने से पहले चल जाता है. वो भी बहुत ही सिंपल से टेस्ट की मदद से. अगर इस दौरान सर्विकल कैंसर का पता चल जाए, तो इसे जड़ से ठीक किया जा सकता है. यानी कैंसर का नो ख़तरा.
यही नहीं, सर्विकल कैंसर अकेला ऐसा कैंसर है जिसकी वैक्सीन भी उपलब्ध है. HPV वैक्सीन सर्विकल कैंसर से बचा सकती है.
आज डॉक्टर से जानिए कि सर्विकल कैंसर क्या है. भारत में सर्विकल कैंसर की फिलहाल क्या स्थिति है. सर्विकल कैंसर क्यों होता है. सर्विकल कैंसर के क्या लक्षण हैं. सर्विकल कैंसर के कौन-से टेस्ट करवाने चाहिए. कौन-सी वैक्सीन सर्विकल कैंसर से बचा सकती है और इसे कब लगवाना चाहिए.
सर्विकल कैंसर क्या होता है?ये हमें बताया डॉक्टर सतिंदर कौर ने.

सर्विकल कैंसर यानी सर्विक्स का कैंसर. सर्विक्स यानी बच्चेदानी का मुंह. ग्रीवा का मतलब होता है नेक. आमतौर पर जब हम सर्विकल की बात करते हैं तो ध्यान नेक पर जाता है. सर्विकल कैंसर गर्भाशय के नेक पर होता है. जब शरीर के सेल्स नियंत्रण से ज़्यादा हो जाते हैं, बढ़ने लगते हैं तो कैंसर होता है. जब बच्चेदानी के मुंह के सेल्स नियंत्रण से ज़्यादा बढ़ने लगते हैं, तो वहां पर कैंसर बन जाता है. इसको ही सर्विकल कैंसर कहते हैं.
भारत में सर्विकल कैंसर की क्या स्थिति है?भारत में 15 साल से ज़्यादा उम्र की 50 करोड़ लड़कियां और महिलाएं सर्विकल कैंसर के रिस्क पर हैं. हर साल एक लाख 30 हज़ार महिलाएं इस कैंसर का शिकार होती हैं. वहीं 80 हज़ार महिलाओं की सर्विकल कैंसर से मौत हो जाती है.

सर्विकल कैंसर होने के कई रिस्क फैक्टर हैं. जैसे कम उम्र में शादी होना. कम उम्र में यौन संबंध बनाना. कई सेक्शुअल पार्टनर होना. प्राइवेट पार्ट्स की साफ़-सफ़ाई का ध्यान न रखना. सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन होना. हेपेटाइटिस बी या HIV होना. कई बार प्रेग्नेंसी से भी इसका रिस्क बढ़ता है. इन सभी कारणों से HPV इन्फेक्शन अपने आप ठीक नहीं हो पाता है. जिन केसों में HPV इन्फेक्शन ठीक नहीं होता. उनमें आगे जाकर सर्विकल कैंसर का रिस्क होता है.
सर्विकल कैंसर के लक्षण-जैसे वजाइना से डिस्चार्ज होना.
-ब्लीडिंग होना.
-दो पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना.
-सेक्स के बाद ब्लीडिंग होना.
-डिस्चार्ज से बदबू आना.
-कमर में ज़्यादा दर्द रहना.
-पेशाब और मोशन लीक करना.

सर्विकल कैंसर से बचने के दो तरीके हैं. पहला है स्क्रीनिंग और दूसरा है वैक्सीन. 21 से 65 साल की हर महिला को सर्विकल कैंसर की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. इसका बहुत ही सिंपल-सा टेस्ट होता है. जिसे पैप स्मीयर टेस्ट कहा जाता है. आप HPV टेस्टिंग भी करा सकते हैं. इसमें सीधे वायरस की टेस्टिंग होती है. 21 से 65 साल की हर महिला पांच साल में एक बार HPV टेस्ट करवा सकती है. पैप स्मीयर टेस्ट हर तीन साल में एक बार करवाना चाहिए. ये टेस्ट बहुत ही सिंपल हैं और इनमें दर्द भी नहीं होता. इन टेस्ट से कैंसर से बहुत पहले की स्टेज में चीज़ों का पता लग जाता है.
ज़्यादातर HPV इन्फेक्शन अपने आप ठीक हो जाते हैं. लेकिन कुछ केसों में ये इन्फेक्शन बना रहता है. अगर इस इन्फेक्शन का समय रहते इलाज नहीं किया गया, तो ये पहले प्री-कैंसर बनता है और फिर कैंसर. प्री-कैंसर को कैंसर बनने में 10-15 साल लगते हैं. इस दौरान स्क्रीनिंग करके इन्फेक्शन का पहले ही पता लगाया जा सकता है. आसानी से इलाज किया जा सकता है. गर्भाशय निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ती. रेडिएशन या कीमोथेरेपी की ज़रूरत नहीं पड़ती.

HPV की वैक्सीन 10-26 साल की उम्र में लगवानी चाहिए. लेकिन 45 साल तक ये वैक्सीन लगवाई जा सकती है. सबसे सटीक उम्र 10-15 साल है. HPV वैक्सीन सिर्फ़ सर्विकल कैंसर से ही नहीं बचाती. ये सर्विक्स, वजाइनल, वुल्वर, एनल और रेक्टल कैंसर से भी बचाती है.
HPV वैक्सीन पुरुषों में भी कैंसर से बचाव करती है. पुरुषों को एनल, पेनाइल, रेक्टल कैंसर से बचाती है.
कुछ मुंह के कैंसर HPV के कारण होते हैं. उनसे भी HPV वैक्सीन बचाती है. इसलिए, ये वैक्सीन 10-26 साल के लड़के और लड़कियों, दोनों को लगवानी चाहिए. इस वैक्सीन की आमतौर पर दो डोज़ लगती हैं. हालांकि, अब WHO का कहना है कि सिंगल डोज़ भी कम उम्र के लोगों में असरदार है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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