सेक्शुअली एक्टिव होने पर ही होता है सर्विकल कैंसर? डॉक्टर ने सारे भ्रम मिटाए
35 साल के बाद, महिलाओं को पैप स्मीयर टेस्ट ज़रूर कराना चाहिए. इसमें वजाइना से कुछ फ्लूड निकालकर उनकी जांच की जाती है. इस टेस्ट से सर्विकल कैंसर का शुरुआत में ही पता लगाया जा सकता है.
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बच्चेदानी के मुंह का कैंसर. इसे इंग्लिश में सर्विकल कैंसर (Cervical Cancer) कहते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के मुताबिक, साल 2022 में दुनियाभर में सर्विकल कैंसर के 6 लाख 60 हज़ार नए मामले सामने आए थे. इनमें से 1 लाख 27 हज़ार से ज़्यादा मामले भारत में मिले थे. वहीं 2022 में ही, सर्विकल कैंसर से साढ़े 3 लाख लोगों की मौत हुई थी. इनमें से करीब 80 हज़ार मौतें भारत में हुई थीं.
सर्विकल कैंसर मुख्य रूप से HPV यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस की वजह से होता है. ये वायरस अनप्रोटेक्टेड सेक्स की वजह से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है. सेक्शुअली एक्टिव किसी भी व्यक्ति को इस वायरस से संक्रमण हो सकता है. आमतौर पर, इसका इंफेक्शन होने पर कोई लक्षण नहीं दिखता. ज़्यादातर मामलों में शरीर का इम्यून सिस्टम इसे खुद ही ठीक कर देता है. लेकिन, अगर HPV का इंफेक्शन लंबे वक्त तक रहे. तब सेल्स असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं और, कैंसर हो सकता है.
लेकिन, आप घबराएं नहीं. इस कैंसर को होने से बचाने के लिए वैक्सीन मौजूद है. अगर फिर भी ये कैंसर हो जाए. और, शुरुआत में ही इसके लक्षणों को पहचानकर इलाज करा लिया जाए. तो, सर्विकल कैंसर से ठीक होने का चांस बढ़ जाता है.
देखिए, जनवरी को सर्विकल कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है. लिहाज़ा, डॉक्टर से जानिए कि सर्विकल कैंसर क्या होता है. इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं. सर्विकल कैंसर के लिए मौजूद वैक्सीन कब लगवानी चाहिए. और, अगर सर्विकल कैंसर हो जाए तो इसका इलाज क्या है.
सर्विकल कैंसर क्या है?ये हमें बताया डॉक्टर विनीता गोयल ने.
सर्विकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है. महिलाओं में सबसे ज़्यादा ब्रेस्ट कैंसर होता है. इसके बाद सर्विकल कैंसर के मामले आते हैं. अक्सर इस कैंसर का ज़िक्र बहुत कम किया जाता है. दरअसल, सर्विकल कैंसर को टैबू माना जाता है. कई लोग मानते हैं कि जिन महिलाओं के कई सेक्शुअल पार्टनर होते हैं, उन्हें ही सर्विकल कैंसर होता है. लेकिन, ये बिल्कुल भी सच नहीं है.
सर्विकल कैंसर किसी को भी हो सकता है. इसके लिए 'सर्विक्स' को समझना ज़रूरी है. यूटेरस (बच्चेदानी) और बर्थ कैनाल के बीच के हिस्से को सर्विक्स कहते हैं. जब कैंसर इस हिस्से में होता है, तो इसे सर्विकल कैंसर कहा जाता है.
सर्विकल कैंसर के शुरुआती लक्षणपहला लक्षण, बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होना. जैसे, पीरियड्स के समय बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होना.
जिन महिलाओं का मेनोपॉज़ हो चुका है, उन्हें मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग होना.
पार्टनर के साथ संबंध बनाने पर ब्लीडिंग होना.
दूसरा लक्षण, वजाइना से बहुत ज़्यादा डिस्चार्ज निकलना, खासकर बदबूदार डिस्चार्ज.
किसी भी महिला को ऐसे लक्षण दिखें तो उन्हें नज़रअंदाज़ न करें और डॉक्टर से मिलकर जांच कराएं.
सर्विकल कैंसर से बचने के लिए वैक्सीन उपलब्ध है. 9 से 15 साल की उम्र में लड़कियों को ये वैक्सीन लगवानी चाहिए. अगर इस उम्र में वैक्सीन लग जाए तो इसकी दो डोज़ पर्याप्त होती हैं. पहली डोज़ आज और दूसरी डोज़ 6 महीने बाद.
अगर 15 से 25 साल की उम्र में वैक्सीन दी जाती है. तब इसकी 3 डोज़ दी जाती हैं – 0, 1, और 6 महीने में. इस वैक्सीन को 45 साल की उम्र तक लगवाया जा सकता है. लेकिन, जब महिला 25 साल से ज़्यादा की हो, या उसकी शादी हो चुकी हो. तब इस वैक्सीन का असर थोड़ा कम हो सकता है. हालांकि, फिर भी ये वैक्सीन कैंसर से बचाव में मदद करती है .
अगर सर्विकल कैंसर हो जाए तो इलाज क्या है?सर्विकल कैंसर होने के बाद वैक्सीन लगवाने का फायदा नहीं होता. वैक्सीन सिर्फ बचाव के लिए काम करती है. अगर सर्विकल कैंसर हो जाए, तब रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और शुरुआती स्टेज में सर्जरी भी की जा सकती है. अच्छी बात ये है कि सर्विकल कैंसर से ठीक होने की दर बहुत ज़्यादा है.
हालांकि, बेहतर यही है कि सर्विकल कैंसर से बचाव किया जाए. अगर बचाव न हो सके, तो इसका शुरुआती स्टेज में पता लगाया जाए. 35 साल के बाद, महिलाओं को पैप स्मीयर टेस्ट ज़रूर कराना चाहिए. इसमें वजाइना से कुछ फ्लूड निकालकर उनकी जांच की जाती है. इस टेस्ट से कैंसर का शुरुआत में ही पता लगाया जा सकता है.
जैसा डॉक्टर साहब ने कहा, सर्विकल कैंसर से बचने की दर बहुत ज़्यादा है. इसलिए, घबराने की ज़रूरत नहीं है. बस सर्विकल कैंसर से बचने के लिए इसकी वैक्सीन, जिसे HPV वैक्सीन कहते हैं, उसे लगवा लें. ताकि कैंसर होने का रिस्क न के बराबर हो जाए. आपको समय-समय पर पैप स्मीयर टेस्ट भी कराना चाहिए.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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