आशा भोसले को चेस्ट इंफेक्शन के बाद आया था कार्डियक अरेस्ट, इंफेक्शन जानलेवा कब बनता है?
मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि उनकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट के बाद हुआ मल्टीपल ऑर्गन फेलियर था. यानी पहले आशा ताई को सीने में इंफेक्शन हुआ. फिर उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया. इसके बाद उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया. लेकिन, सीने में इंफेक्शन, कार्डियक अरेस्ट कैसे कर सकता है? और फिर उससे मल्टी-ऑर्गन फेलियर क्यों हो जाता है?

लेजेंड्री सिंगर आशा भोसले का निधन हो गया है. रविवार, 12 अप्रैल को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली. वो 92 साल की थीं. अपने 8 दशक से भी लंबे करियर में उन्होंने कई मशहूर गाने गाए. निधन से एक दिन पहले यानी 11 अप्रैल को, उन्हें सीने में इंफेक्शन और बहुत ज़्यादा थकान जैसे लक्षणों के साथ ICU में भर्ती कराया गया था. अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि उनकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट के बाद हुआ मल्टीपल ऑर्गन फेलियर था. यानी पहले आशा ताई को सीने में इंफेक्शन हुआ. फिर उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया. इसके बाद उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया.
लेकिन, सीने में इंफेक्शन, कार्डियक अरेस्ट कैसे कर सकता है? और फिर उससे मल्टी-ऑर्गन फेलियर क्यों हो जाता है? ये हमने पूछा धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. नितिन राठी से. ये भी जाना कि बुज़ुर्गों को सीने में इंफेक्शन होने का ज़्यादा खतरा क्यों है, और किन वॉर्निंग साइन्स को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.

डॉक्टर नितिन कहते हैं कि जब सीने में इंफेक्शन होता है. तब फेफड़े ठीक से काम नहीं कर पाते. इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीज़न नहीं मिलती. जिसकी वजह से शरीर के अंदर परेशानी शुरू हो जाती है. अगर इंफेक्शन ज़्यादा बढ़ जाए, तो ये खून में फैल सकता है. जिसे सेप्सिस कहते हैं. इस हालत में ब्लड प्रेशर गिरता है और दिल पर दबाव बढ़ता है. जिससे कार्डियक अरेस्ट का ख़तरा बढ़ जाता है.
जब दिल अचानक काम करना बंद कर देता है. तब शरीर के बाकी अंगों को खून नहीं मिल पाता. धीरे-धीरे किडनी, लिवर और दिमाग जैसे अंग फेल होने लगते हैं. जिसे मल्टीपल ऑर्गन फेलियर कहते हैं. यानी सिंपल-सा दिखने वाला चेस्ट इंफेक्शन भी बहुत गंभीर हो सकता है.
बुज़ुर्गों की इम्यूनिटी कमज़ोर होती है. इस वजह से उन्हें सीने में इंफेक्शन होने का रिस्क ज़्यादा होता है. मौसम बदलने, प्रदूषण, स्मोकिंग, डायबिटीज़, दिल की बीमारी या फेफड़ों की किसी पुरानी बीमारी से भी सीने में इंफेक्शन हो सकता है. इसके अलावा, लंबे समय तक बिस्तर पर रहने या निगलने में दिक्कत होने से भी इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है.

सीने में इंफेक्शन के लक्षण हैं- लगातार खांसी, बलगम, सांस लेने में दिक्कत, बुखार, सीने में दर्द और बहुत ज़्यादा कमज़ोरी. कई बार बुज़ुर्गों को बुखार नहीं आता. बल्कि अचानक सुस्ती और कन्फ्यूज़न जैसे लक्षण दिखते हैं. जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.
साथ ही ज़रूरी है, बुज़ुर्गों का ख्याल रखना. उन्हें फ्लू और निमोनिया की वैक्सीन लगवाएं. सिगरेट के धुएं और प्रदूषण से दूर रखें. आसपास साफ-सफाई रखें. उनकी पुरानी बीमारियों को भी कंट्रोल में रखें. साथ ही, जैसे ही उनमें चेस्ट इंफेक्शन के लक्षण दिखें, उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाएं. वहां ज़रूरत के हिसाब से एंटीबायोटिक्स, ऑक्सीज़न सपोर्ट और गंभीर मामलों में ICU देखभाल दी जाती है. समय पर इलाज शुरू होने से सेप्सिस, कार्डियक अरेस्ट और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर से बचा जा सकता है.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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