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अस्थमा में एक्सरसाइज़ नहीं करनी चाहिए? इनहेलर की लत लग जाती है?

अस्थमा को लेकर अक्सर कई बातें चलती हैं. जैसे अस्थमा सिर्फ बच्चों को होता है. अस्थमा में एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए. इनहेलर इस्तेमाल किया तो इसकी आदत लग जाएगी. इनहेलर सिर्फ गंभीर अटैक में इस्तेमाल होता है.

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5 मई 2026 (अपडेटेड: 5 मई 2026, 06:46 PM IST)
5 common asthma, inhaler myths debunked
अस्थमा सांसों से जुड़ी एक बीमारी है
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आज है वर्ल्ड अस्थमा डे. अस्थमा सांस से जुड़ी एक बीमारी है. अस्थमा के मरीज़ों को अटैक पड़ते हैं. उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है. सांस नहीं आती. सांस फूलती है. अगर मदद न मिले तो जान भी जा सकती है. ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ कोलेबरेशन की 2019 में आई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में 26 करोड़ से ज़्यादा लोग अस्थमा से जूझ रहे हैं. वहीं द ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2022 के मुताबिक, इनमें से करीब साढ़े 3 करोड़ लोग भारत के हैं. ये आंकड़ा बहुत बड़ा है. 

अस्थमा को लेकर अक्सर कई बातें चलती हैं. जैसे अस्थमा सिर्फ बच्चों को होता हैं. अस्थमा में एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए. इनहेलर इस्तेमाल किया तो इसकी आदत लग जाएगी. इनहेलर सिर्फ गंभीर अटैक में इस्तेमाल होता है. और अस्थमा पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. अब इनमें से कितनी बातें सच हैं और कितनी झूठ. ये हमने पूछा मैक्स हॉस्पिटल, शालीमार बाग, दिल्ली में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर डायरेक्टर, डॉ. हेमंत कालरा से. 

dr hemant kalra
डॉ. हेमंत कालरा, सीनियर डायरेक्टर, पल्मोनोलॉजी, मैक्स हॉस्पिटल, शालीमार बाग, दिल्ली 
अस्थमा सिर्फ बच्चों को होता हैं? 

अस्थमा बच्चों को भी हो सकता है. मिडिल एज में भी हो सकता है. बुज़ुर्गों को भी हो सकता है. अस्थमा किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है.

अस्थमा में एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए?

अस्थमा में एक्सरसाइज़ करना बहुत ज़रूरी है. आप जितना एक्सरसाइज़ करेंगे, अस्थमा उतना ही कंट्रोल में रहेगा. मानसिक रूप से भी आपको फायदा होगा. मन शांत रहेगा, तो स्ट्रेस कम होगा. और स्ट्रेस अस्थमा के ट्रिगर्स में से एक है.  

एक्सरसाइज़ से वेट लॉस होगा. ये भी फायदेमंद रहेगा क्योंकि ओबेसिटी अपने आप में अस्थमा का एक ट्रिगर है. 

हालांकि अगर आपको अस्थमा के अटैक आ रहे हैं. सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो उस दौरान एक्सरसाइज़ करने से बचें. और जो कॉम्बिनेशन इनहेलर डॉक्टर ने दिए हैं, उनका इस्तेमाल करें. फिर जब आप ठीक हो जाएं, तो दोबारा एक्सरसाइज़ शुरू कर सकते हैं. 

इनहेलर इस्तेमाल किया तो इसकी आदत लग जाएगी? 

इनहेलर्स की आदत बिल्कुल भी नहीं लग सकती. देखिए, आदत उन चीजों की होती है जो आपके दिमाग पर जाकर हिट करती हैं. जैसे आप शराब पीते हैं. सिगरेट पीते हैं. जब इन्हें बहुत टाइम तक पीने के बाद एकदम छोड़ देते हैं, तब आपको विड्रॉल सिम्पटम्स होते हैं. आपको उन्हें बार-बार पीने का मन करता है, क्योंकि उनकी आदत लग चुकी होती है. लेकिन इनहेलर में ऐसी कोई चीज़ नहीं है जिसकी आदत लगती हो. जितनी बार ज़रूरत हो, आप दिन में उतनी बार इनहेलर का इस्तेमाल कर सकते हैं.  

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अगर अस्थमा ट्रिगर हो जाए, तो मरीज़ों को इसके अटैक पड़ने लगते हैं 
इनहेलर सिर्फ गंभीर अटैक में इस्तेमाल होता है? 

बिल्कुल भी नहीं. जैसे ही अस्थमा का डायग्नोसिस होता है, इनहेलर सबसे पहले देना होता है. अगर बहुत ज़्यादा अटैक आ रहे हैं, तो इनहेलर काम ही नहीं करते. तब नेबुलाइज़र या दवाएं दी जाती हैं. 

अस्थमा पूरी तरह ठीक किया जा सकता है?

अस्थमा एक तरह की जेनेटिक (वंशानुगत) समस्या है. ऐसी समस्याएं पूरी तरह से खत्म नहीं की जा सकतीं. लेकिन इन्हें बहुत अच्छे से कंट्रोल किया जा सकता है. कई बार सही इलाज और देखभाल से मरीज को कई महीनों या सालों तक दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती. हालांकि, जैसे ही किसी ट्रिगर का संपर्क होता है, हल्की परेशानी फिर से शुरू हो सकती है.

अस्थमा के मरीज़ को आमतौर पर ये पता होता है कि उसे कौन-सा इनहेलर इस्तेमाल करना है. अक्सर डॉक्टर कॉम्बिनेशन इनहेलर की सलाह देते हैं, न कि सिंगल इनहेलर की. कॉम्बिनेशन इनहेलर में दो तरह की दवाइयां होती हैं: इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और ब्रोंकोडाइलेटर. ब्रोंकोडाइलेटर सांस की नलियों को खोलने का काम करता है, जिससे सांस लेना आसान होता है. वहीं, इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स सांस की नलियो में सूजन को कम करता है. इसी वजह से अस्थमा में इन दोनों दवाइयों का कॉम्बिनेशन इनहेलर सबसे ज़्यादा असरदार माना जाता है, चाहे वो रोज़ इस्तेमाल के लिए हो या इमरजेंसी की स्थिति में.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)  

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