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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 की रिपोर्ट जारी, मोटापा-हाई बीपी को लेकर बड़ी बात सामने आई

रिपोर्ट से पता चला है कि देश में करीब 20% महिलाएं और पुरुष अंडरवेट हैं. वहीं, लगभग 31% महिलाएं ओवरवेट या मोटापे का शिकार हैं. करीब 27% पुरुष भी ओवरवेट या ओबीज़ हैं.

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2 जून 2026 (अपडेटेड: 2 जून 2026, 03:46 PM IST)
10 key highlights of National Family Health Survey-6 report
देश के लगभग 60% परिवारों में कम से कम एक सदस्य के पास हेल्थ इंश्योरेंस या किसी स्वास्थ्य योजना का लाभ है. (तस्वीर- Unsplash.com)
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नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 की रिपोर्ट आ गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 29 मई 2026 को इसे जारी किया है. साल 2023-24 में हुए इस सर्वे को दो चरणों में पूरा किया गया. इसके लिए 27 अलग-अलग फील्ड एजेंसियों ने देशभर में काम किया. सर्वे के दौरान 6.79 लाख से ज़्यादा घरों, 7.16 लाख महिलाओं और करीब 1 लाख पुरुषों से जानकारी जुटाई गई.

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 की 10 बड़ी बातें आपको बताते हैं.

- लगभग 96% पर्सेंट लोगों को पीने का बेहतर पानी मिल रहा है. शहरों में ये आंकड़ा 99%  है, तो वहीं गांवों में 95%.

- देश के करीब 94% घर आयोडीन वाला नमक इस्तेमाल करते हैं.

- देश के लगभग 60% परिवारों में कम से कम एक सदस्य के पास हेल्थ इंश्योरेंस या किसी स्वास्थ्य योजना का लाभ है. पहले यानी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 में ये आंकड़ा 41% था. यानी अब ज़्यादा लोग हेल्थ कवर से जुड़ रहे हैं.

- टोटल फर्टिलिटी रेट अभी भी 2 ही है. यानी भारत में एक महिला औसतन 2 बच्चों को जन्म दे रही है. हालांकि शहरों में बच्चे कम हो रहे हैं. गांवों में संख्या थोड़ी ज़्यादा है.

national family health survery
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 29 मई 2026 को NFHS-6 रिपोर्ट जारी की है  

- करीब 76% महिलाओं ने प्रेग्नेंसी के शुरुआती 3 महीनों में पहली जांच कराई. पहले ये आंकड़ा 70% था. वहीं लगभग 96% महिलाओं ने प्रेग्नेंसी के दौरान कम-से-कम एक बार डॉक्टर या हेल्थ वर्कर से जांच कराई. ये आंकड़ा भी पहले से बढ़ा है.

- साढ़े 90 पर्सेंट से ज़्यादा बच्चों का जन्म अस्पताल या हेल्थ सेंटर में हुआ. अगर सिर्फ सरकारी अस्पताल में डिलीवरी की बात करें, तो करीब 59% बच्चों का जन्म पब्लिक हेल्थ फैसिलिटी में हुआ. हालांकि सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी का आंकड़ा पहले से घटा है. वहीं, देश में करीब 27% बच्चे सिज़ेरियन यानी ऑपरेशन के ज़रिए हुए हैं.

- देश में करीब 83% बच्चों का पूरा वैक्सीनेशन हो चुका है. ये आंकड़ा वैक्सीनेशन कार्ड और मां द्वारा दी गई जानकारी, दोनों के आधार पर तैयार किया गया है. सिर्फ वैक्सीनेशन कार्ड देखें, तो करीब 87% बच्चे पूरी तरह वैक्सीनेटेड हैं.

- देश में करीब 20% महिलाएं और पुरुष अंडरवेट हैं. यानी उनका BMI सामान्य से कम है. वहीं, लगभग 31% महिलाएं ओवरवेट या मोटापे का शिकार हैं. करीब 27% पुरुष भी ओवरवेट या ओबीज़ हैं. ओबेसिटी के मामले शहरों में ज़्यादा हैं, और पहले से बढ़े हैं.

- करीब 18% महिलाओं और 21% पुरुषों का ब्लड शुगर लेवल ज़्यादा है, और वो डायबिटीज़ की दवा ले रहे हैं. हाई ब्लड शुगर के मामले, महिलाओं और पुरुषों, दोनों में ही पहले से बढ़े हैं.

- करीब 19% महिलाएं और 22% पुरुष, हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं, या बीपी कंट्रोल करने की दवा ले रहे हैं. ये आंकड़ा भी पहले से बढ़ा है. 

यानी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां, जैसे मोटापा, हाई ब्लड शुगर और हाइपरटेंशन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. अब इन तीनों को कंट्रोल करने के लिए क्या कर सकते हैं? हमने पूछा नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम में एंडोक्रिनोलॉजी डिपार्टमेंट की कंसल्टेंट, डॉ. अनिमा शर्मा से.

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डॉ. अनिमा शर्मा, कंसल्टेंट, एंडोक्रिनोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम

डॉक्टर अनिमा कहती हैं कि ओबेसिटी कंट्रोल करनी है, तो प्रोसेस्ड फूड, मैदा, चीनी और तला-भुना कम खाएं. अपने खाने में सब्ज़ियां, दालें और फाइबर से भरपूर चीज़ें शामिल करें. पानी खूब पिएं. हफ्ते में कम से कम 5 दिन, तीस मिनट वॉकिंग, साइक्लिंग या कोई भी एरोबिक एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है. इससे मोटापा कम करने में मदद मिलती है. साथ ही, रोज़ 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें और स्ट्रेस कम करें.

ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करना है, तो हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीज़ों से दूर रहें. जैसे सफेद चावल, मैदा, मीठी ड्रिंक्स और पैकेज़्ड स्नैक्स. ये सारी चीज़ें खून में शुगर का लेवल तेज़ी से बढ़ाती हैं. इनकी जगह साबुत अनाज, ब्राउन राइस और दालें खाएं. एक बार में ढेर सारा खाना न खाएं. बल्कि हर थोड़ी देर में थोड़ा-थोड़ा खाएं, ताकि शुगर का लेवल एकदम से न बढ़े. साथ ही, रोज़ एक्सरसाइज़ करें. और अगर परिवार में डायबिटीज़ का इतिहास हो, तो साल में एक बार फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c जांच ज़रूर करवाएं.

अब बात हाइपरटेंशन यानी हाई बीपी की. ब्लड प्रेशर कंट्रोल करना है, तो खाने में नमक घटा दें. ये सबसे पहला और सबसे असरदार कदम है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO के मुताबिक, एक एडल्ट को हर दिन 5 ग्राम से ज़्यादा नमक नहीं खाना चाहिए. बल्कि आप पोटैशियम से भरपूर चीज़ें लें. जैसे केला, पालक और नारियल पानी. ये ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद करते हैं. साथ ही, रोज़ एक्सरसाइज़ करें. इससे खून की नलियां लचीली बनती हैं और दिल बेहतर तरीके से काम करता है. स्ट्रेस कम करें. नींद ठीक से लें. शराब-सिगरेट न पिएं, इनसे बीपी बढ़ सकता है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.) 

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