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कोरोना: 'वर्क फ्रॉम होम' कर रहे हैं, तो ये पांच चीज़ें आपको कतई नहीं करनी चाहिए

बिस्तर पर बैठकर लैपटॉप चलाते हैं, तो उठ के पढ़ लीजिए.

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वर्क फ्रॉम होम यानी घर से ऑफिस का काम करना. ये कल्चर विदेशों में काफी है. लेकिन भारत में अभी उतना चलन नहीं है इसका. इसलिए COVID 19 की वजह से जब अचानक कई लोगों को वर्क फ्रॉम होम करना पड़ रहा है, तो कुछ चीज़ें हैं जिनका ध्यान रखना ज़रूरी है. (सांकेतिक तस्वीर: pexels)
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प्रेरणा
23 मार्च 2020 (Updated: 25 मार्च 2020, 02:43 PM IST)
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कोरोना वायरस से फ़ैल रही बीमारी COVID-19 की वजह से देश के कई जिलों में लॉकडाउन कर दिया गया है. 22 मार्च को 'जनता कर्फ्यू' भी लगा, जब लोग घर से बाहर नहीं निकले. ट्रेनें चलनी बंद हो गई हैं, फ्लाइट्स कैंसल हो रही हैं. बाहर निकलने और लोगों से मिलने जुलने को मना किया जा रहा है, ताकि वायरस ज्यादा न फैले. ऐसे में कई कम्पनियां अपने यहां काम करने वाले लोगों को 'वर्क फ्रॉम होम' यानी घर से काम करने की सुविधा दे रही हैं, ताकि ऑफिस जैसी जगहों पर ज्यादा लोग इकट्ठा न हों.
अब घर से काम करने के कई फायदे हैं. पाजामे में बैठे-बैठे मीटिंग सलटा लो. केवल शक्ल सुधारकर रखनी होती है. खाते-खाते काम करना हो, तो उसमें भी दिक्कत नहीं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि सब कुछ बमबम ही होता है. वो कहते हैं न, सिक्के के दो पहलू होते हैं. सबके पास 'शोले' के जय जैसा फ्रॉड सिक्का तो होता नहीं. तो बस हम उसी दूसरे पहलू की बात करेंगे कि आखिर 'वर्क फ्रॉम होम' में कौन सी चीज़ें हैं, जिनका ध्यान रखना ज़रूरी है आपके लिए. कौन-सी चीज़ें हैं, जो आपकी मदद कर सकती हैं. क्या हैं, जिनसे आपको सावधान रहने की ज़रूरत है. तो अगर आप भी घर से काम कर रहे हैं, तो ये लिस्ट एक सांस में पढ़ जाइए. देश-दुनिया के साइकोलॉजिस्ट की सलाह छांटकर लाए हैं आपके लिए.

क्या करें?

# सबसे पहले तो घर का एक कोना तय करें, जहां शान्ति से काम किया जा सके. कमरा हो, तो बेहतर. दरवाजा लगाकर बैठिए और काम करिए. लोगों की आवाजाही न हो कमरे में. अगर कमरा पॉसिबल नहीं है, तो कोना पकड़िए. लेकिन उसी कोने में अपना सारा माल-मत्ता रखिए. ये न हो कि लैपटॉप रख लिया और चार्जर भूल गए. या पेन तो रख लिया, लेकिन कॉपी भूल गए.
Whatsapp Image 2020 03 23 At 2.06.37 Pm अलग से टेबल-कुर्सी लगाकर बैठिए. जरूरी नहीं है कि कुछ बहुत फैंसी हो. काम चलना चाहिए. और अपने पास जरूरत का सारा सामान रखना मत भूलिए. (सांकेतिक तस्वीर)

# जगह तय कर ली? बहुत बढ़िया. अब ये डिसाइड कीजिए कि आप पहनेंगे क्या. हां जी. ऐसा है कि लुंगी, धोती, पाजामा, गाउन में आराम बहुत है. पर ये आपके दिमाग के साथ खिलवाड़ कर देता है. आराम वाले कपड़े घर में पहने जाते हैं. तो दिमाग भी रिलैक्स मोड में चला जाता है. तो अपने दफ्तर के कपड़े निकालिए. नहाइए, धोइए और सलीके वाले कपड़े पहनकर तय समय पर काम करने बैठिए. इससे आपके दिमाग को सिग्नल मिलता है कि आप रेडी हैं काम करने के लिए.
# ये तय कर लीजिए कि आप कितनी देर बाद लंच करेंगे. ऑफिस में जिस समय आपका लंच होता, उसी समय उठिए और लंच करके टाइम पर वापस आ जाइए. अगर इस समय आप खाना खाने के बाद वॉक पर जाते हैं ऑफिस में, 10-15 पन्द्रह मिनट के लिए, तो वो चीज़ घर पर भी फॉलो कीजिए. इससे दिमाग भटकता नहीं है. उसको लगता है कि रुटीन ही चल रहा है.
Adult Business Computer Contemporary 380769 जिस तरह ऑफिस में रुटीन फॉलो करते थे, उसी तरह घर पर भी फॉलो करिए. इसमें फांकीबाज़ी से काम नहीं चलेगा. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)

# कम्युनिकेशन बनाए रखिए ऑफिस वालों से. कोई एक प्लेटफ़ॉर्म चुन लीजिए, जहां पर सबकी  एक-दूसरे से बात हो सके. अगर रोज की मीटिंग ऑफिस में करते हैं, तो घर से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर लीजिए. दिन में एक बार. इससे भी बहुत मदद मिलती है. कई ऐसे वीडियो प्लेटफ़ॉर्म हैं, जिन पर आप फ्री में या थोड़ी सी फीस देकर रजिस्टर कर सकते हैं. जैसे ज़ूम, स्लैक. छोटी टीम हो, तो गूगल हैंगआउट या स्काइप भी चलेगा.
# बीच-बीच में उठकर टहलिए. ऑफिस में भी तो इधर-उधर जाते होंगे आप. कभी पानी लेने, कभी अपने ख़्वाबों की दुनिया में खोए कलीग को याद दिलाने कि भई मेल किया है, चेक तो कर लो. या फिर प्रिंटर से प्रिंट लेने. तो बस वही यहां भी करना है. आठों घंटे, दोनों पहर चौकड़ी मारकर बैठे मत रहिए.
# डॉक्टर थु वी न्गूयेन डरहम यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं. साइकोलॉजी इनका विषय है. अकेले रहने की वजह से लोगों पर क्या असर पड़ता है, इस पर उनकी रिसर्च है अच्छी-खासी. टाइम को दिए इंटरव्यू में वो कहती हैं,
‘हमें सामाजिक इन्टरैक्शन की आदत है. इससे आपस में तालमेल और नजदीकी बढ़ती है.’
तो आप अपने कलीग्स से दूर बैठे अकेले काम कर रहे हैं, इसका मतलब ये नहीं कि आप उनसे बिल्कुल ही दूरी बना लें. डॉक्टर न्गूयेन कहती हैं कि अपना एक ऐसा कलीग चुनिए, जिससे आपकी बातचीत बढ़िया होती हो. बेसिकली जो बॉस से आपकी चुगली न खाता हो और जिससे ऑफिस में गपियाने में आपको मजा आता हो, उनसे बीच-बीच में थोड़ा गपिया लीजिए. चाहें तो पांच-दस मिनट का वीडियो कॉल ही कर लीजिए. मूड फ्रेश हो जाएगा. अगर आपके घर में पालतू जानवर हैं, तो शाम में उनको टहलाने निकल लीजिए.
Turned On Macbook 3205403 वीडियो कॉल्स कम्युनिकेशन बनाए रखने का एक बेहतर जरिया हैं. इससे एक और चीज़ होगी, इसी बहाने घर की साफ-सफाई करने का मोटिवेशन भी मिल जाएगा. हैशटैग कड़वी सच्चाई. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)

क्या न करें:

# बिस्तर में बैठकर काम मत करिए. आप कहेंगे भई क्यों? हमारा घर. हम तो कैसे भी काम करेंगे. तो ऐसा है कि दिमाग बड़ी शाणी चीज़ है. उसको ये भरोसा दिलाना पड़ता है कि वर्क मोड में आना ज़रूरी है. हम नहीं कह रहे. बारबरा लार्सन हैं. बोस्टन की नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट पढ़ाती हैं. जो लोग ऑफिस के बाहर से काम करते हैं, उनके बारे में रिसर्च है इनकी. ये बताती हैं कि डिसिप्लीन बनाकर काम करने से प्रोडक्टिव रहा जा सकता है. बिस्तर को सोने के लिए रखिए.
# खुद को एकदम अलग-थलग मत करिए दुनिया से. बफर नाम की एक एजेंसी ने 2500 लोगों पर स्टडी की. ये सभी लोग रिमोट लोकेशन से काम करते थे. इन सबकी जो दिक्कतें थीं, उनमें दूसरी सबसे बड़ी दिक्कत थी अकेलापन. तो अगर आप परिवार के साथ रहते हैं, तो उनसे कटिए मत. बीच-बीच में इंटरैक्शन बना रहना चाहिए.
People 1492052 1920 घर में रहना और एकांतवास में चले जाना दो अलग चीज़ें हैं. खुद को एकांतवास में मत भेजिए. कुछ न कुछ करिए, पर लोगों के टच में रहिए. मानव प्रजाति हाइबरनेशन के लिए नहीं बनी है. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)

# अगर आपको घर से काम करने में दिक्कत आ रही है, तो बॉस से छुपाइए मत. अगर आपको लगता है कि आमने-सामने बातचीत करके मामला सुलझाया जा सकता है, तो वीडियो कॉल करना एक अच्छा ऑप्शन है. इसे टालिए मत. हो सकता है शुरू में दिक्कत आए, लेकिन एक-दो बार के बाद आपको भी आदत हो जाएगी.
# यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया में साइकोलॉजी की प्रोफ़ेसर हैं, क्रिस्टन शॉकली. बीबीसी को इन्होंने बताया कि पूरे घर को ऑफिस न बनाएं. लेकिन बाउंड्री ज़रूर तय कर लें. कि ये आपका वर्कस्पेस है. पूरे घर को ऑफिस की तरह ट्रीट करेंगे, तो किसी एक जगह ध्यान नहीं लगेगा. ऋतुराज शांडिल्य (बदला हुआ नाम) फ्रीलांसर हैं. पिछले कई सालों से घर से ही काम कर रहे हैं. इन्होंने बताया कि जब इनको कोई प्रोजेक्ट मिलता है, तब तो ये काम करते ही हैं. साथ ही जब इनके पास प्रोजेक्ट नहीं भी होता है, तब भी ये तय समय पर वर्क डेस्क पर चले जाते हैं. फिर डिस्टर्ब नहीं करता उन्हें कोई. ये आदत काम आती है.
Office Work 1149087 1920 काम के घंटे तय करिए. किसी भी हालत में उनसे ज्यादा घंटे मत लगाइए. एकाध दिन अपवाद हो सकते हैं. लेकिन हर बार ऐसा करना आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए खराब है. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)

# स्ट्रेस न लें. कोरोना को लेकर लोगों के भीतर गहरा डर बैठा हुआ है. ये चीज़ आपके 'वर्क फ्रॉम होम' के दौरान भी हो सकती है. दो चीज़ें हैं. अगर आपको लगता है कि 'वर्क फ्रॉम होम' की वजह से कहीं आपकी परफॉरमेंस पर असर तो नहीं पड़ेगा, तो अपने बॉस से बात करें. मैनेजर को लूप में रखें. उनसे अपनी चिंता शेयर करें. दूसरा, अगर आपको कोरोना को लेकर स्ट्रेस हो रहा है, तो डॉक्टर निमेश देसाई की सुनिए. ये एक मनोचिकित्सक हैं. साथ ही मानव व्यवहार और सम्बद्ध विज्ञान संस्थान के डायरेक्टर भी हैं. इनके हिसाब से कोरोना से जुड़े डर को हटाने के लिए आप ये चीज़ें कर सकते हैं:

- जो चीज़ आपके कंट्रोल में है, उसपर फोकस कीजिए. जैसे, सफ़ाई. अपने आस-पास सफ़ाई रखिए. कोरोना से बचने के जो सही उपाय बताए जा रहे हैं, उन्हें सख्ती से फॉलो करिए.

-सोशल मीडिया और मीडिया से थोड़ी दूरी बना लीजिए. जो चीज़ आपके कंट्रोल में नहीं है, उसके बारे में हर मिनट सुनने से या पढ़ने पर आपको स्ट्रेस होगा. उससे निपटने के लिए ज़रूरी है कि आप अपने दिमाग को थोड़ा रेस्ट दीजिए.

-अफ़वाहों पर यकीन मत करिए. ये आपको और डरा देंगी. अगर आपको कुछ नया पता चलता है, जिससे आपको स्ट्रेस हो रहा है, तो किसी एक्सपर्ट से बात करिए. अपनी ग़लतफ़हमी दूर करने की कोशिश करिए.

जम के काम करिए. डर के इस माहौल में इसको खुद पर हावी मत होने दीजिए. आप ध्यान रखेंगे, तो बीमारी फैलने से रुकेगी. ऑफिस आने जाने में जो समय लगता था, वो बचेगा अब. इस समय में कुकिंग कीजिए, कोई बढ़िया फिल्म देखिए. कुछ ऐसा सीख लीजिये, जिसका प्लान बहुत टाइम से बना रहे थे, लेकिन मौका नहीं मिल रहा था.
ये ज़रूर याद रखिए कि ये सुविधाएं अगर मिल रही हैं, तो हम जनसंख्या के उस हिस्से से आते हैं, जिसके पास ये प्रिविलेज है. आपके घर पर काम करने के लिए अगर मेड आती हैं, तो उनको कुछ दिन की छुट्टी दीजिए. पैसे मत काटिए. सोशल डिस्टेंसिंग करिए. कोरोना से जुड़े सभी शब्दों की जानकारी
लीजिए, दिल जोड़े रखिए.


वीडियो: कोरोना वायरस में इस्तेमाल हो रहे शब्दों के मतलब आपको जानने चाहिए

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