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10 साल बीते, अब कहां हैं अन्ना आंदोलन और इंडिया अगेंस्ट करप्शन की नींव रखने वाले चेहरे

कोई CM बन गया, कोई सब कुछ छोड़कर कॉर्पोरेट जॉब कर रहा.

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बाएं से दाएं- प्रशांत भूषण, अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल.
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अभिषेक त्रिपाठी
8 अप्रैल 2021 (Updated: 8 अप्रैल 2021, 10:22 AM IST)
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5 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन शुरू किया था. जनलोकपाल की मांग को लेकर शुरू हुआ ये अनशन एक बड़ा आंदोलन बन गया. 80 के दशक या उसके बाद जन्मे लोगों ने इतना बड़ा आंदोलन शायद पहली बार देखा था. लोग आज भी इसे अन्ना आंदोलन के नाम से जानते हैं. इंडिया अगेंस्ट करप्शन इस पूरे आंदोलन के पीछे की कोर कमेटी थी, कोर टीम थी. आज दस साल बीते इस आंदोलन के लोग, इंडिया अगेंस्ट करप्शन के लोग कहां हैं? कहां हैं वो लोग, जिन्होंने इसकी नींव रखी थी.
बात शुरू होती है कि ये आंदोलन शुरू कैसे हुआ, कहां से हुआ. इंडिया अगेंस्ट करप्शन की कोर टीम में पहले दिन से शामिल शिवेंद्र सिंह चौहान से The Lallantop ने बात की. शिवेंद्र 2010 तक दिल्ली में ही पत्रकार थे. फिर भ्रष्टाचार और तमाम घोटालों के ख़िलाफ आवाज़ उठाने के लिए इंडिया अगेंस्ट करप्शन की नींव रखी.
“मैं, अरविंद (केजरीवाल), स्वाति (मालीवाल), अश्वती थे उस मीटिंग में. 2010 की बात होगी. हम पहले भी अपने-अपने स्तर पर घोटालों, भ्रष्टाचार के ख़िलाफ कुछ ना कुछ करते आ रहे थे. इस बार मिलकर कुछ करने जा रहे थे. दिल्ली के चेतनालय की उस मीटिंग में नाम तय हुआ- इंडिया अगेंस्ट करप्शन. काम करने की जगह थी- PCRF दफ्तर, कौशांबी. कुछ समय तय हुआ कि 30 जनवरी 2011 को जंतर-मंतर से एक रैली निकालेंगे. रामलीला मैदान तक. हमने यूं ही देश के कुछ बड़े-बड़े नामों को मेल भेज दिए कि साब, भ्रष्टाचार के ख़िलाफ ऐसा-ऐसा कार्यक्रम करने जा रहे हैं और आपका साथ चाहिए. बड़ी बात ये थी कि उनका जवाब भी आ गया. जनवरी का कार्यक्रम हुआ. फिर अप्रैल में अन्ना जी का अनशन. फिर तो आंदोलन बड़ा ही होता चला गया. फिर जो कुछ हुआ, आप एक गूगल क्लिक पर पढ़ सकते हैं.”
(PCRF माने  Public Cause Research Foundation. 2006 में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने मिलकर इसे शुरू किया था. केजरीवाल ने अपनी रैमन मैग्सेस अवॉर्ड में जीती धनराशि देकर इसकी शुरुआत की थी.)
आंदोलन बाद में जिस तरह से ख़त्म हुआ, उसे लेकर यकीनन अलग-अलग मत हैं. लेकिन ये एक बड़ा आंदोलन था, इसमें किसी को शक नहीं. शिवेंद्र से ही हमने जाना कि वो कौन लोग थे, जो इंडिया अगेंस्ट करप्शन मूवमेंट के शुरुआती दौर से जुड़े थे और अब वो कहां हैं. # अन्ना हजारेतब की भूमिका – बेशक उस समय आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे थे. समाज सेवा में एक बड़ा योगदान होने के नाते अन्ना का काफी सम्मान है. दिसंबर 2010 में वे IAC से जुड़ चुके थे. आए दिन आ रही भ्रष्टाचार की ख़बरों से उकताई जनता को अन्ना में इस दौर का गांधी दिखा. अनशन में उनके साथ हुजूम उमड़ पड़ा.
अब क्या कर रहे – जिस दिन से आंदोलन टूटा और पॉलिटिकल पार्टी बनाई गई, अन्ना ने अरविंद केजरीवाल और आईएसी से उनके साथ गए ग्रुप के सामने एक शर्त रखी थी कि आप कभी भी 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' का इस्तेमाल अपने राजनीति उद्देश्य के लिए नहीं करेंगे. इसके बाद AAP के साथ गए लोग IAC से अलग हो गए. महाराष्ट्र में अपने गांव रालेगण सिद्धी में हैं.
Anna Hazare अन्ना हजारे. (फाइल फोटो)
# अरविंद केजरीवालतब की भूमिका – अरविंद केजरीवाल इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कॉन्सेप्ट से डे-1 से जुड़े थे. इंडियन रेवेन्यू सर्विस के अधिकारी, मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता, RTI एक्टिविस्ट होने के नाते केजरीवाल के पास अच्छे संपर्क थे. इसका फायदा मूवमेंट को मिला.
अब क्या कर रहे – 2012 में आम आदमी पार्टी के गठन की घोषणा की. 2013 में 49 दिन के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री बने. 2015 में फिर CM बने और कार्यकाल पूरा किया. 2020 में फिर जीते.
Arvind Kejriwal अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
# किरण बेदीतब की भूमिका – शिवेंद्र ने हमें बताया कि- आंदोलन में अन्ना हजारे का नाम जुड़ने के बाद लोगों में एक भरोसा जगा था. लेकिन आंदोलन को एक मास-अपील वाला चेहरा मिलना अभी भी बाकी था. वो काम किरण बेदी के जुड़ने से हुआ. देश के घर-घर में उन्हें जाना जाता था.
अब क्या कर रहीं हैं – 2015 में भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी रहीं. पार्टी को करारी हार मिली. इसके बाद 2016 में बेदी को पुडुचेरी का राज्यपाल बनाया गया. वह फरवरी 2021 तक इस पद पर रहीं.
Kiran Bedi किरण बेदी (फाइल फोटो)
# प्रशांत भूषणतब की भूमिका – प्रशांत भूषण तब भी एक नामी वकील थे. लोकपाल बिल को ड्राफ्ट करने में उनकी सबसे बड़ी भूमिका रही थी. सरकार से उस दौरान हुई तमाम वार्ताओं में IAC की तरफ से भूषण भी शामिल रहे थे. इसके बाद बनी आम आदमी पार्टी के गठन में भी भूषण की अहम भूमिका रही, वह 2013 दिल्ली चुनावों और 2014 लोकसभा चुनावों के दौरान पार्टी के निर्णायक नेताओं में रहे. लेकिन साल 2015 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर टिकट वितरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए. इसके बाद अप्रैल महीने में प्रशांत भूषण को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों के चलते बाहर निकाल दिया गया.
अब क्या कर रहे – सुप्रीम कोर्ट के वकील. सरकार और न्याय व्यवस्था को लेकर समीक्षात्मक रवैये के लिए अभी भी सुर्खियों में रहते हैं.
Prashant Bhushan प्रशांत भूषण (फाइल फोटो)
# स्वाति मालीवालतब की भूमिका – इंडिया अगेंस्ट करप्शन की कोर टीम का हिस्सा थीं.
अब क्या कर रहीं हैं – AAP के गठन के साथ पार्टी जॉइन की. 2015 में दिल्ली महिला आयोग की चेयरपर्सन बनीं. इस पद पर बैठने वाली वो सबसे युवा महिला थीं. अभी तक पद पर हैं.
Swati Maliwal स्वाति मालीवाल. (फाइल फोटो)
# श्री श्री रविशंकरतब की भूमिका – शिवेंद्र बताते हैं कि श्री श्री रविशंकर की तरफ से आंदोलन को समर्थन से लेकर रिसोर्स तक उपलब्ध कराए गए थे. उनके अच्छी-ख़ासी संख्या में अनुयायी थे, जिसका फायदा आंदोलन को भी मिला.
अब क्या कर रहे – आध्यात्मिक गुरु. द आर्ट ऑफ लिविंग नाम की संस्था भी चला रहे हैं.
Shri Shri Ravishankar श्री श्री रवि शंकर (फाइल फोटो)
# मनीष सिसोदियातब की भूमिका – शिवेंद्र बताते हैं कि अरविंद केजरीवाल ने ही मनीष सिसोदिया को इंडिया अगेंस्ट करप्शन की टीम से जोड़ा था. सिसोदिया लंबे समय से केजरीवाल के परिचित थे. IAC से जुड़ने के बाद उन्होंने आंदोलन के रिसोर्स मैनेजमेंट से लेकर तमाम चीजों को संभाला.
अब क्या कर रहे – बाद में जब केजरीवाल ने पॉलिटिकल पार्टी के गठन का ऐलान किया, तो भी सिसोदिया उनके साथ ही रहे. आम आदमी पार्टी बनाई. फिलहाल दिल्ली के डिप्टी CM.
Sisodia मनीष सिसोदिया. (फाइल फोटो)
# शिवेंद्र सिंह चौहानतब की भूमिका – 2010-11 में पत्रकारिता का करियर छोड़कर केजरीवाल की टीम के साथ इंडिया अगेंस्ट करप्शन की शुरुआत की. इसका डिजिटल मीडिया कैंपेन और दूसरे शहरों में को-ऑर्डिनेशन का काम पूरी तरह संभाला.
अब क्या कर रहे – आंदोलन टूटने के बाद मीडिया में दोबारा वापसी नहीं हो पाई. मुंबई में नौकरी कर रहे हैं.
Shivendra Singh शिवेंद्र सिंह चौहान

आंदोलन के समय अन्ना ने कहा था कि रामलीला मैदान पर बरसों से रावण जलता आया है, इस बार भ्रष्टाचार का रावण जलेगा. लेकिन शायद भ्रष्टाचार के रावण की नाभि में तीर तब भी नहीं लग पाया. भ्रष्टाचार के ख़िलाफ लड़ाई जारी है. आंदोलन भले बाद में अपनी पूर्ण परिणिति तक नहीं पहुंच पाया, लेकिन इंडिया अभी भी करप्शन के अगेंस्ट है.

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