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अनुपम खेर की 9 कॉमेडी परफॉरमेंस, जिन्हें देखकर हम कतई 'आहत' नहीं हैं

अनुपम खेर ने तन्मय भट्ट के वीडियो को 'डिसग्स्टिंग', 'डिसरिस्पेक्टफुल' बताया. हम लाए हैं खुद अनुपम खेर के 'ग्रेट सेंस अॉफ ह्यूमर' के नमूने

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30 मई 2016 (अपडेटेड: 30 मई 2016, 01:05 PM IST)
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तन्मय भट्ट के स्नैपचैट वीडियो को देखकर अभिनेता अनुपम खेर ने ट्विटर पर बोल्ड NOT के साथ बताया है कि ये ह्यूमर नहीं है. उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता की स्थापना के लिए अपने 9 बार जीते 'बेस्ट कॉमिक एक्टर' पुरस्कार का हवाला भी दिया है. साथ ही ये भी बताया है कि खुद उनके पास 'ग्रेट सेंस अॉफ ह्यूमर' है.

https://twitter.com/AnupamPkher/status/736770785713356800

अनुपम खेर हमारे दौर के सबसे सहज अौर शानदार अभिनेताअों में से एक हैं, अौर हम उनकी बात से पूरी तरह सहमत हैं.  किसी इंसान की उमर पर, त्वचा पर, रंगत पर या शारीरिक भिन्नता पर चुटकुला बनाना बुरे हास्य की श्रेणी में ही आता है. उन्होंने सही किया कि 'डिसगस्टिंग' अौर 'डिसरिस्पेक्टफुल' के हैशटैग के साथ इस वीडियो को ट्विटर पर ज़ोर-शोर से चला दिया. आज खुद उनकी ट्वीट से ही इसके हज़ार से ज़्यादा शेयर हो चुके हैं.

अब तन्मय भट्ट पर एफआईआर हो चुकी है अौर उन्हें व्यक्तिगत धमकियां भी मिल रही हैं.

लेकिन एक दिक्कत है, हमें डर है कि 'आहत भावनाअों के देश' में कहीं अनुपम खेर खुद इस 'नैतिकतावादी आंधी' की चपेट में ना आ जाएं. आजकल तो सोशल मीडिया का दौर है, अौर अनुपम खेर ने वो नौ 'बेस्ट कॉमिक एक्टर' वाली पुरस्कृत फिल्मों के अलावा भी बहुत फिल्में की हैं. अौर ऐसी कई फिल्में सोशल शेयरिंग साइट्स पर उपलब्ध भी हैं. 'डिसगस्टिंग' अौर 'डिसरिस्पेक्टफुल' तक तो ठीक है, लेकिन रचनात्मक कलाकारों को अपनी जिन्दगी कोर्ट के अौर पुलिस हवालातों के चक्कर लगाते गुजारनी पड़े, वो हम नहीं चाहते.

हम उनकी नौ 'दूसरी वाली' परफॉरमेंस लेकर आए हैं. अौर हम इस पोस्ट के माध्यम से स्पष्ट कर रहे हैं कि अनुपम खेर के ये सारे परफॉरमेंस कॉमेडी के लेवल अौर टेस्ट के हिसाब से चाहे कितने भी खराब हों, ये बस वही हैं बुरी कॉमेडी.  अौर कोई बुरी कॉमेडी किसी व्यक्ति या संस्था का 'अपमान' कर रही है ये मान कर हम उसे अौर ज़्यादा वजन ही देंगे.

कॉमेडी अच्छी होती है तो उसके साथ हंसा जाता है. कॉमेडी बुरी होती है तो उस पर हंसा जाता है. बस.

1.

https://www.youtube.com/watch?v=edLlzK916RM

एक अंधा आदमी खंबे से टकरा जाता है अौर उसे बहनजी बोलता है, फिर वो एक लड़की से टकरा जाता है अौर उसे 'बड़ा भारी खंबा' बोलता है. फिर दूसरे नेत्रहीन इंसान को रास्ता पार कराने के नाम पर गटर में गिरा देता है.

लेकिन ये किसी 'दिव्यांग' व्यक्ति का अपमान नहीं, सिर्फ फौरन हास्य हासिल करने का शॉर्टकट है.

2.

https://youtu.be/0JTf7EhWpHA?t=3m10s

'शोला अौर शबनम' से ये सीन देखिए. नहीं नहीं, 'राष्ट्रभक्त' साथी इसे देखकर भड़कें नहीं. यहां भारतीय फौज का मज़ाक नहीं उड़ाया गया है. ना ही लम्बी मूछों वाले इंसानों का. अौर ना ही 'मैं कोई नेता नहीं जो मज़ाक कर रहा हूं' कहकर मेजर 'इंदर मोहन लाठी' यहां किसी खास भारतीय राजनेता को टार्गेट कर रहे हैं.

ये सिर्फ एक अौसत से कमतर हास्य फिल्म है.

3.

https://youtu.be/cPK_Yat4j9w?t=15s

पति अपनी पत्नी की साड़ी खींच रहा है. पत्नी अपने पति के मुंह में लिपिस्टिक घुसा रही है. पति-पत्नी के संबंधों पर बनाए घटिया चुटकुले, जिसमें जेंडर के तमाम स्टीरियोटाइप नज़र आते हैं.

लेकिन ये विवाह संस्था का अपमान नहीं. आइये स्वीकार करें कि ये फूहड़ हास्य आज हमारे कॉमेडी सीन का सबसे कॉमन सीन है. यही हमारी सच्चाई है.

4.

https://youtu.be/p6ma5A3QV7U?t=1h2m32s

'मिस्टर भट्टी अॉन छुट्टी' तो पूरी फिल्म ही एक दिमागी रूप से चुनौती का सामना कर रहे किरदार को लेकर रची गई है. अौर हास्य उसी बीमारी की स्थिति से निकल रहा है. फिल्म इतनी बुरी थी कि किसी को नाम भी याद नहीं, शायद किसी ने देखी भी नहीं.

लेकिन बुरी फिल्म को देखकर आप उसे बुरी फिल्म ही कहते हैं, निर्देशक पर कोर्ट केस नहीं करते.

5.

https://youtu.be/H0gno2aeS-g?t=2m32s

नहीं, पुलिसवालों को लेकर घटिया कॉमेडी बनाना 'पुलिस फोर्स का अपमान' नहीं होता, उसे देखकर सिर्फ हंसा जा सकता है.

6.

https://www.youtube.com/watch?v=b6U20UB2n3M

'कानून अपना अपना' से ये सीन देखिए. उच्चारण दोष वालों को चुटकुले का केन्द्र बनाकर हास्य पैदा करना बुरा है. दरअसल किसी भी असामान्य व्यवहार को लक्ष्य बनाकर हास्य पैदा करना सबसे आसान लेकिन सबसे खराब तरीका होता है. लेकिन इसे भी घटिया हास्य ही कहेंगे, उससे ज़्यादा कुछ नहीं. 'बैन' फिल्म को नहीं, अपनी खराब सोच को करने की ज़रूरत है.

7.

https://www.youtube.com/watch?v=wF9y98alIkc

'शोला अौर शबनम' में मेजर साब यहां जब बॉक्सर बने शक्ति कपूर से पिटते हैं तो यह ना बॉक्सिंग खेल का अपमान है, ना फौजी अफसर का. फूहड़ हास्य है बस.

8.

https://www.youtube.com/watch?v=9rnhuCquS1g

कुत्ता - मां - रामदीन - सेक्स.. इस तरह के जोक आपको 'क्या कूल है हम' जैसी फिल्मों में खूब मिलेंगे. अौर हम देखते हैं उन्हें, तभी तो उनके सीक्वल बनते हैं. लेकिन नहीं, ऐसी घटिया सेक्स कॉमेडी करने के लिए किसी को जेल में नहीं डाल सकते.

9.

https://youtu.be/IFaTpbZHsaA?t=2m9s

घटिया द्विअर्थी संवादों की परंपरा का अनमोल रतन है ये सीन. लेकिन नहीं, इसे चीप कॉमेडी कहकर भूल जाना चाहिए. जिस दिन सेक्स पर बात को लेकर हमारे समाज का टैबू मिटेगा, ये घटिया सेक्स जोक भी उसी दिन हमारे मनोरंजन की दुनिया से विदा होंगे.

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